अब उत्तर प्रदेश के सभी मतदान केन्द्रों में VVPAT का इस्तेमाल

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2019 लोक सभा चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और पार्दर्शीपूर्ण तरीके से हो इसके लिए चीफ इलेक्शन कमिश्नर सुनील अरोड़ा ने पिछले तीन दिनों से चल रही बैठक के बाद शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि आयोग के साथ बैठक में पोलिटिकल पार्टियों ने जातीय, सांप्रदायिक भाषणों पर रोक लगाने, चुनाव के दौरान केंद्र बलों कि तैनाती करने, मतदाता सूची को आधार से जोड़ने और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से वोटिंग की गोपनीयता सुनिश्चित करने के मुद्दे उठाये.

साथी ही उन्होंने बताया कि आगामी लोक सभा चुनावों के दौरान पूरे देश में सी-विजिल मोबाइल एप्लीकेशन जरी किया जायेगा जिसके चलते कोई भी नागरिक चुनाव सम्बन्धित शिकायत दर्ज करा सकेगा. इसमें शिकायत करता का नाम गोपनीय रखने का विकल्प भी होगा. सबसे महत्वपूर्ण हलाकि यह बात रही कि इस बार पूरे उत्तर प्रदेश के 63 हज़ार 331 मतदान केन्द्रों पर ईवीएम के साथ VVPAT का प्रयोग किया जायेगा.

तो आज हम आपको VVPAT के बारे में बतायेंगे ताकि एक ज़िम्मेदार और जागरूक नागरिक कि तरह आप आगामी लोक सभा चुनावों में वोट कर सके. VVPAT का फुल फॉर्म है- Voter verifiable paper audit trail. इसमें पेपर स्लिप के माध्यम से मतदाता को ये पता चल जाता है कि उन्होंने किस उम्मीदवार को वोट दिया है. VVPAT एक तरीके का प्रिंटर होता है जिसे ईवीएम से कनेक्ट किया जाता है. VVPAT ईवीएम सेटअप में एक नया addition है. इसके दो हिस्से है पहली यूनिट मेन बॉडी और दूसरी VVPAT स्टेटस डिस्प्ले यूनिट. VVPAT सिस्टम्स कि फर्स्ट लेवल चेकिंग डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर, ECIL के अधिकृत इंजिनियर राजनीतिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी में करते हैं. VVPAT को चुनावों के लिए रिटर्निंग ऑफिसर स्तर पर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप दिए जाने के बाद तैयार किया जाता है. BEL यानि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स या ECIL के अधिकृत इंजिनियर उम्मीदवारों की क्रम संख्याओं, नामों और चुनाव चिन्हों को VVPT में अपलोड करते हैं.

जब कोई मतदाता वोट के लिए ईवीएम में बटन दबाता है तभी एक पेपर स्लिप VVPAT से प्रिंट होकर मतदाता को मिल जाती है. स्लिप में मतदाता ने किस सिंबल को वोट दिया है और उसका नाम दोनों लिखा होता है. इससे मतदाता अपने वोट को वेरीफाई कर सकता है.

उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनावों के बाद ईवीएम पर बसपा ने सवाल उठाये थे. इसके बाद अलग अलग राजनीतिक पार्टियों ने अपनी सहूलियत के हिसाब से भी ईवीएम पर निशाना साधा था. चुनावों को ईवीएम के बजाये बैलट पेपर से करने तक कि बात की थी. इसके बाद इलेक्शन कमीशन ने खुला न्योता दिया था तमाम राजनीतिक पार्टियों को की वे आये और ईवीएम को हैक करके दिखाएँ. इस पूरे प्रकरण में 13 राजनीतिक पार्टियों ने ईवीएम पर सवाल उठाया था लेकिन इलेक्शन कमीशन ने जब उन्हें हैक करने का मौका दिया तो सिर्फ 2 राजनीतिक पार्टियाँ ही इलेक्शन कमीशन पहुंची. और बाद में इन दो पार्टियों ने भी ईवीएम को चुनौती देने से मना कर दिया था.

अक्टूबर 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्शन कमीशन को VVPAT को लागू करने के लिए आदेश दिया था. फंड्स कि कमी के चलते इलेक्शन कमीशन 2014 के लोक सभा चुनावों में VVPAT को पूरी तरह से लागू नहीं कर सकी थी. लेकिन बीते दिनों ईवीएम controversy के बाद केंद्र सरकार ने अप्रैल 2017 में दो हज़ार करोड़ से ज्यादा फंड्स इलेक्शन कमीशन के लिए आवंटित कर दिए थे. इसी का नतीजा ये है कि अब इलेक्शन कमीशन उत्तर प्रदेश के सभी चुनाव केन्द्रों में VVPAT का इस्तेमाल कर पायेगा और मतदाताओं का भरोसा इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बढ़ेगा और राजनीतिक दलों कि चिंता का भी समाधान होगा

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