इमरान खान के लिए नोबेल की मांग है पुरस्कार की तौहीन

430

एक तरफ तो अटैक और सेर्गिकल स्ट्राइक का दौड़ चल रहा है वहीं विंग कमांडर अभिनन्दन को पाकिस्तान से वापस भेज कर इमरान खान वाह-वाही लूट रहे हैं .उन्हें “शांति का दूत” कहा जा रहा है और दूसरी तरफ उनको नोबेल पुरस्कार देने की मांग हो रही है .

27 फरवरी को जब विंग कमांडर अभिनन्दन के पाकिस्तान में होने की खबर आये थी तब पुरे देश में तनाव का माहौल बना हुआ था . जब पाकिस्तानी संसद में प्रधानमंत्री ने विंग कमांडर को वापस भेजने की बात की थी तब एक तरफ देश में भारत सरकार की कुटनीतिक जीत के जश्न का माहौल था तो वहीं दूसरी ओर कुछ लोग ऐसे भी थे जो पाकिस्तान के इस कदम को सराह रहे थे और पाकिस्तान के दरियादिली के लिए लिए उसे धन्यवाद दे रहे थे .कुछ लोग तो इमरान खान को शांति का दूत बता रहे थे और उनके लिए नोबेल पुरस्कार की मांग कर रहे थे .तो वैसे लोगों को यह जान लेना जरूरी है कि इमरान खान कोई मसीहा नही और ना ही उनके इरादे पाक है .

भारतीय विंग कमांडर अभिनंदन  की सकुशल वतन वापसी हो गई है. उनका मिग-21 विमान 27 फरवरी की सुबह दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. इसके बाद पाकिस्तान ने अभिनंदन को 1 मार्च देर रात भारत आने दिया. यानि करीब तीन दिन तक पाकिस्तान ने अभिनंदन वर्तमान को अपने कब्जे में रखा और फिर दिनभर के ड्रामे के बाद रात करीब साढ़े 9 बजे उन्हें भारत को सौंपा. अब पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान खान के इस कथित ‘पीस जेस्चर’ के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग हो रही है. भारत में भी कुछ लोग हैं जो पाकिस्तान की इस फर्जी मुहिम का समर्थन कर रहे हैं. यहां हम आपको बताएंगे कि क्यों इमरान खान को नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलना चाहिए.

शांति दूत नहीं हैं इमरान खान
14 फरवरी तो अभी तक हम  नहीं भूले . जब पूरी दुनिया प्यार का संदेश दे रही थी, वेलेंटाइन डे मना रही थी… ठीक उसी दिन आतंकियों ने सीआरपीएफ के काफिले पर हमला किया. आतंकवादियों के इस कायरतापूर्ण हमले में हमारे 40 वीर सैनिक शहीद हो गए थे. अभी इस घटना को एक घंटा भी नहीं हुआ था और पाकिस्तान में मौजूद जैश-ए-मुहम्मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ले डाली. पूरी दुनिया ने पुलवामा टेरर अटैक की आलोचना की. लेकिन इमरान खान कई दिन बाद सामने आए और उन्होंने पुलवामा आतंकी हमले में पाकिस्तान के हाथ से साफ इन्कार कर दिया, जबकि जैश ने इसकी जिम्मेदारी ली थी. अगर इमरान खान शांति दूत हैं तो फिर उन्हें जैश के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात करनी चाहिए थी.

सीजफायर का उल्लंघन क्यों?
इमरान खान अगर  शांति दूत हैं तो फिर क्यों सीमा पर लगातार सीजफायर का उल्लंघन हो रहा है. क्यों पाकिस्तानी गोले जम्मू-कश्मीर में निर्दोष लोगों की जान ले रहे हैं. पिछले 8 दिन से हर दिन र पाकिस्तान की तरफ से सीजफायर का उल्लंघन हो रहा है. शुक्रवार यानि सात दिन में 60 से ज्यादा बार पाकिस्तान की तरफ से युद्ध विराम का उल्लंघन हुआ है.

शांतिदूत ने सीमापार क्यों भेजे अपने वायुदूत
भारत ने 26 फरवरी को पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की. भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी सेना या वहां के आम लोगों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया, पाकिस्तान भी यही दावा कर रहा है कि भारत के 1000 किलो बम खाली खेतों में गिरे थे. पाकिस्तानी मीडिया चैनलों के अनुसार वहां आतंकी कैंप थे ही नहीं और सिर्फ एक कौवे की मौत हुई है. अगर पाकिस्तानी मीडिया की इस रिपोर्ट में जरा सी भी सच्चाई है तो फिर कथित ‘शांति दूत’ इमरान खान ने 27 फरवरी को क्यों भारतीय सीमा में अपने लड़ाकू विमान भेजे? क्यों उनके लड़ाकू विमान भारत के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना चाहते थे? वो तो भला हो भारतीय वायुसेना का जिन्होंने पाकिस्तानी F16 विमानों को खदेड़ दिया और एक को मार भी गिराया.

सेना नहीं सुनती इमरान की
इमरान खान नेशनल असेंबली में शांति की बात करते हैं, टीवी चैनल पर शांति की बात करते हैं, लेकिन उनकी सेना सीमा पर सीजफायर का उल्लंघन करती है. उनकी वायुसेना के विमान भारत में घुसपैठ करते हैं. कहीं ऐसा तो नहीं कि इमरान खान सच में शांति चाहते हैं, लेकिन सेना उनकी नहीं सुन रही है. अगर ऐसा है तो भी इतने कमजोर प्रधानमंत्री को तो बिल्कुल शांति पुरस्कार नहीं मिलना चाहिए, जो अपनी सेना को ऑर्डर भी नहीं दे सकता.

‘शांति के दूत’ इमरान खान, जिन्हें कुछ लोग नोबेल शांति पुरस्कार दिलाना चाहते हैं वे अपनी सेना को भारत में गोलाबारी करने से रोक भी नहीं रहे हैं. एक ऐसा शख्स जो अपनी सेना को निर्दोषों पर गोलाबारी करने से रोक भी नहीं पा रहा, उसे नोबेल शांति पुरस्कार देने की मांग करना ही बेमानी और हास्यास्पद बात है.

ना तो सेना, उनकी अपनी धरती पर पल रहे आतंकवादी भी उनकी नहीं सुनते। अगर ऐसी कमजोर शख्सियत के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग हो रही है तो यह इन प्रतिष्ठित पुरस्कारों की भी तौहीन होगी।