नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला युसुफ़ज़ई, इन हिंदु लड़कियों के साथ हो रहे अत्याचार पर क्यूं चूप है ?

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इमरान खान के पाकिस्तान से एक ऐसी घटना सामने आई जो सोचने पर मजबूर करती है कि पाकिस्तान..जो खुद को लोकतांत्रिक देश मानता है क्या वहां सच में लोकतंत्र है या कुछ और…जब पूरा भारत होली के रंगो से भरा था तब पाकिस्तान में एक हिंदू परिवार तबाह हो रहा था..उस हिंदू परिवार की दो बेटियों का अपहरण कर..जबरदस्ती मुस्लिम पुरुषों से उनकी शादी करवा दी गई..बहरहाल इसके बाद जो हुआ वो और हैरान करने वाला है..मलाला युसुफजई का नाम तो आपने सुना ही होगा जो खुद को नारीवादी बताती है और महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार पर आवाज उठाती है..लेकिन इस मामले पर उन्होंने कुछ बोलाना जरूरी नहीं समझा..यहां तक कि वो इस मामले को इग्नोर करने से भी नहीं रुकी..

दरअसल, एक भारतीय यूजर्स ने ट्विटर पर नोबेल प्राइज विनर मलाला युसुफ़ज़ई को इस घटना के बारे में जानकारी देते हुए उनको टैग किया और उनसे उन लड़कियों के लिए आवाज उठाने के लिए कहा…लेकिन इस ट्वीट पर स्वघोषित विमेंस राइट्स एक्टिविस्ट मलाला का जो रिएक्शन आया वो बहुत हैरान करने वाला है और बहुत निराशाजनक भी..मलाला ने उस यूजर को ही ब्लॉक कर दिया, जिसने उन हिंदूओं लड़कियों पर आवाज उठाने के लिए कहा था….

बता दें कि कृष्णा नाम के ट्विटर यूजर ने अपने ट्वीट में मलाला को टैग कर लिखा था, “आप की ही उम्र की दो हिंदू लड़कियों को उनके घर से अगवा कर लिया गया और उनके साथ बदसलूकी की गयी। इसके बाद धर्म परिवर्तन कर उनका निकाह करवा दिया गया। पूरी दुनिया ने इस्लामवादियों के इस बर्बरता को देखा। कृपया उन दो गरीब हिंदू लड़कियों का समर्थन करें। धन्यवाद! इस ट्वीट के बाद मलाला ने कृष्णा को ही ब्लॉक कर दिया..हैरान करने की बात तो ये है कि नारी सशक्तिकरण की बात करने वाली मलाला ने इस मुद्दे पर कोई जवाब देना जरूरी नहीं समझा..और बिना इसको गंभीरता से लिए उस यूजर को ही ब्लॉक कर दिया..

इस घटना के बाद कई सवाल हमारे मन में उठे और आपके मन में भी उठ रहे होंगे..उठना लाज़मी भी है..क्योंकि अक्सर नारी सशक्तिकरण को लेकर आवाज उठाने का दावा करने वाली मलाला, इस बाबत क्यों चूप हो गई…यहां भी तो लड़कियों के साथ अत्याचार हो रहा है वो भी उनके ही देश में…कही वो इसलिए तो चुप नहीं रही क्योंकि ये दोनों लड़किया हिन्दू थी..पाकिस्तान में नारियों को शिक्षित करने की उनकी मुहीम को बढ़ा-चढ़ा कर बताना..वो क्या सिर्फ एक दिखावा है? क्या सच में मलाला एक एक्टिविस्ट हैं या फिर एक ढकोसला?

इंग्लैंड में बैठ कर पाकिस्तान में नारी सशक्तिकरण का काम करने वाली मलाला का हिंदु लड़कियों के प्रति ये रुख होगा किसी ने सोचा भी नहीं होगा..

जानी-मानी पत्रकार आरती टिकू सिंह ने भी मलाला से इस मामले पर प्रतिक्रिया देने के लिए अनुरोध किया..सिंह ने लिखा, “मलाला जी यदि आपके पास अपने बिजी शेड्यूल में से थोडा भी खाली समय हो तो अपनी आवाज रवीना और रीना जैसी उन कई लड़कियों के लिए उठाएं जिनका जबरदस्ती धर्म परिवर्तित किया जाता है और निकाह करवा दिया जाता है। उनका रेप किया जाता है। कृपया उनके असहाय पिता की सुनें और पाकिस्तान आर्मी से इसपर जवाब मांगें।

लेकिन मलाला का क्या था..इसपर भी वो चुप्पी साधी रही.. इसके बाद अपने एक अन्य ट्वीट में आरती टिकू सिंह ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र मलाला के साथ खड़ा है, लेकिन सवाल यह है कि क्या मलाला सिर्फ पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की उत्पीड़ित लड़कियों और महिलाओं के साथ खड़ी हैं? ऐसा लगता है कि पाकिस्तान में नारी सशक्तिकरण को लेकर भी भेदभाव किया जाता है। वहां अल्पसंख्यक हिंदुओं के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। हिंदू महिलाओं के साथ भी भेदभाव किया जाता है। फिर भी मलाला उनके साथ खड़ी नहीं हैं।

बता दें कि आए दिन मलाला कश्मीरियों के ऊपर हो रहे सो-कॉल्ड ह्यूमन राइट्स वायलेशन हो या फिर रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार हो, मलाला बोलती जरूर है..लेकिन जब बात हिंदूओं पर अत्याचार की होती है तो वो चुप्पी साध लेती है..चाहें रोहिंगयाओं के द्वारा भारत और म्यांमार में की जाने वाली हिंसा हो या पाकिस्तान में हिंदूओं लड़कियों पर अत्याचार हो..ऐसे मुद्दों पर वो कुछ भी बोलने से बचती रही हैं..

कही मलाला को तो ये नहीं लगता की हिन्दूओं को दर्द, तकलीफ नहीं होता..या फिर उनके नारिवाद और एक्टिविस्ट का दायरा फिक्स है और कुछ खास लोगों के लिए है..

ये शर्मनाक है कि नोबेल पुरस्कार विजेता इस तरह के गंभीर मामले से खुद को किनारे कर लेती है