निर्मला सीतारमण ने आखिर ऐसा क्या कह दिया कि लोग उन्हें ट्रोल करने लगे.

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वित्त मंत्री सीतारमण को ट्रोल किया गया. उन्हें विलेन बनाने की कोशिश की गयी. जानते हैं किस लिए.. उस बयान के लिए जो उन्होंने दिया ही नही… 

 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पुणे पहुंची थी यहाँ उन्होंने बिजनेसमैन, चार्टेड अकाउंटेंट्स के सवालों का जवाब दे रही थी. इसी दौरान वित्त मंत्री ने यहाँ जीएसटी को लेकर कुछ ऐसा कहा जिसके बाद उन्हें ट्रोल किया जाने लगा.. हालाँकि जिस पर विवाद खड़ा हुआ था उसे निर्मला सीतारमण ने कहा ही नही था. दरअसल वित्त मंत्री एक सवाल के जवाब में कहा कि GST को सभी पार्टियों के लोग ,सभी राज्य सरकारें, कई साल के बाद एक साथ मिलकर संसद में लाए हैं. लेकिन अचानक हम इसे यह नहीं कह सकते कि ये कितना खराब स्ट्रक्चर लाया गया है. और ये परेशान कर रहा है .इसे अभी केवल 2 साल ही हुए हैं. मैं उम्मीद करती हूं कि इसे पहले ही दिन से आपकी संतुष्टि के हिसाब से होना था , पर मुझे माफ़ करना ये आपकी संतुष्टि के हिसाब से नहीं हो पाया. होना यह चाहिए कि  GST को बेटर कंप्लायंस वाला बनाने के लिए हम सबको मिलकर सॉल्युशन पर काम करना चाहिए. सुझाव देना चाहिए खामियों को सुधारने के लिए.. GST पर तो मुझे लगता है कि हम सबकी थोड़ी जिम्मेदारी है देश में , और मुझसे जितना होगा मैं बिल्कुल करुंगी, सबसे मिलूंगी सबकी बात सुनूंगी.  लेकिन हम इसे खारिज नहीं कर सकते, इसे बिल्कुल बेकार का नहीं कह सकते.(We can’t just damm it )’

बस इसी वाक्य को लेकर We can’t just damm it को लेकर कुछ लोगों ने उत्पात मचाना शुरू कर दिया.. तमाम तरह की websites की हैडलाइन इस तरह आने लगी कि मानो वित्त मंत्री कह रही हैं कि जीएसटी में खामियां हैं तो हम क्या कर सकते हैं? एक हेडलाइन तो ऐसी बनाई गई कि जिससे ऐसा लग रहा है कि उन्होंने ये कह दिया है कि ‘ये देश का कानून है कि हम इसे वाहियात कह ही नही सकते” इन हैडलाइन को पढने के बाद आपको ये लगेगा कि वित्त मंत्री मानो ये कह रही हैं कि लोगों की परेशानी से, जीएसटी की बातों से उन्हें कोई फर्क नही पड़ता. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सवाल पूछने वाले की सोच के आधार पर जवाब देते हुए कहा कि “हम GST को एकदम बाहियात या बेकार नहीं कह सकते . ये देश का एक कानून है ,ये संसद में पास हुआ है,राज्यों की विधानसभा में पास हुआ है. इसमें कुछ कमी भले ही हो सकती है या आपको परेशानी भी हो सकती है.” वित्त मंत्री की पूरी बात या बयान का वीडियो देखने के बाद ये बात स्पष्ट हो जाती थी मतलब साफ है कि जिस ‘डैम’ वाली बात को आधार बना कर उनकी ट्रोलिंग हुई वो दरअसल किसी और वाक्य के साथ किसी और परिपेक्ष्य में कहीं गई थी.

दरअसल वित्त मंत्री के कहने का मतलब था कि जीएसटी अब एक कानून हैं. इसे हमें बेहतर बनाना है. इसमें हम सबकी भागीदारी होनी चाहिए, लेकिन इसे इस तौर पेश किया गया कि वित्त मंत्री ने कहा है कि  जीएसटी अब देश का कानून है.. इससे अब दिक्कत हो रही है तो मैं क्या करूँ?
  जीएसटी में समय समय पर बदलाव किया जाता रहा है, इसमें केंद्र सरकार के साथ साथ राज्य सरकार शामिल होती है. जीएसटी बढाने और घटाने को लेकर या कोई भी फैसला जीएसटी को लेकर लेने के लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों की भागीदारी होती है. वहीँ वित्त मंत्री ने लोगों से सुझाव भी मांगे कि कैसे हम इस कानून को और बेहतर बना सकते हैं लेकिन भैया मीडिया हीरों को विलेन और विलेन को हीरों बनाने में जरा सा भी वक्त नही लगाती.. लेकिन एक बात आपको ये समझने की जरूरत है कि किसी भी खबर पर अपनी राय बनाने से पहले आप उस खबर की तह तक जाएँ.. वीडियो देखें पूरा वीडियो देखे और समझने की कोशिश करें कि क्या जो खबर हमें दिखाई जा रही है.. या आपके सामने परोसी जा रही है वो सही भी है?