20 मार्च को निर्भया के दो’षियों की फां’सी होनी है. लेकिन उससे पहले दो’षियों ने बचने के सारे हथकंडे अपनाने शुरू कर दिए. क़ानून विशेषज्ञों का कहना है कि अब उनका बचना मुमकिन नहीं है क्योंकि उनके पास अब कोई भी कानूनी रास्ता नहीं बचा. यहाँ तक कि दो’षियों ने इंटरनेशनल कोर्ट में भी अपील की. वहां कोई सुनवाई होने से रही. क्योंकि इंटरनेशनल कोर्ट सिर्फ दो देशों के बीच के मामले की ही सुनवाई करता है. अपनी दाल वहां भी न गलते देख अब उन्होंने अपने परिवार को आगे कर दिया है.

निर्भया के चार दोषियों में से एक दोषी अक्षय ठाकुर की पत्नी पुनीता ने अब अपने पति को फां’सी से बचाने के लिए कानूनी चाल चली है. पुनीता ने एक फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दी है. पुनीता ने अपनी अर्जी में कहा है कि वह अक्षय की विधवा बनकर नहीं रहना चाहती है इसलिए उसे तलाक चाहिए. अक्षय की पत्नी ने औरंगाबाद के फैमिली कोर्ट ने अर्जी दी है. उसने कहा है कि ‘मेरे पति को रे’प के मामले में दो’षी ठहराया गया है और उसे फां’सी दी जानी है, हालांकि वह निर्दोष हैं. ऐसे में मैं उसकी विधवा बनकर नहीं रहना चाहती है.’

अक्षय की पत्नी के वकील मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत महिला को यह कानूनी अधिकार है कि वह कुछ खास मामलों में तलाक ले सकती है, इसमें रे’प भी शामिल है. उन्होंने बताया कि अगर रे’प के मामले में किसी महिला के पति को दोषी ठहरा दिया जाता है, तो वह तलाक के लिए अर्जी दाखिल कर सकती है. चूँकि तलाक के लिए दोनों पक्षों का अदालत में मौजूद होना अनिवार्य होता है इसलिए अक्षय की पत्नी की ये चाल फां’सी की तारीख आगे बढवाने की कोशिश के अलावा और कुछ नहीं है.