नीरव मोदी की तलाश हुई खत्म, जल्द दिखेंगे सलाखों के पीछे

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पंजाब नेशनल बैंक  घोटाले के मुख्य आरोपी नीरव मोदी की जल्द ही गिरफ्तारी हो सकती है.  गिरफ्तारी के लिए लंदन की एक अदालत ने वारंट जारी किया है. बताया जा रहा है कि नीरव मोदी को किसी भी वक्त गिरफ्तार किया जा सकता है. प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक नीरव मोदी ने 11,400 करोड़ रूपए का घोटाला किया है.

वहीं विपक्ष तो इंतज़ार में बैठा रहता है कि कैसे सरकार पर आरोप लगाया जाए . तो बात दरअसल ऐसी है कि नीरव मोदी के नाम में मोदी होने के कारण उसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का रिश्तेदार बताया जाने लगा और नीरव मोदी के फरार होने के बाद उसका भी इजलाम प्रधानमंत्री पर लगने लगा. बहरहाल विपक्ष का बस चले तो वो हर मोदी को पीएम मोदी का रिश्तेदार बताने लगे.

आरोप प्रत्यारोप से कहीं ऊपर उठ कर सरकार ने इस पर कार्रवाई की और नीरव मोदी की सभी सम्पत्तियों को जब्त  कर लिया. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंजाब नेशनल बैंक के साथ किए गए लोन धोखाधड़ी के मामले में  नीरव मोदी की एक के बाद एक संपत्तियां जब्‍त कर  ली है . वहीं विदेशों में भी उनकी  संपत्तियों को सील किया गया है . यह मोदी सरकार की बड़ी जीत है और अब तो विजय माल्या भी ट्वीट के ज़रिये रहम की भीख मांग रहा है . विपक्ष नीरव मोदी के फरार होने का दोषी सरकार को ठहराता है लेकिन तब वो यह भूल जाता है कि यह धांधली 2011 में शुरू हुई थी और इसका खुलासा 2018 में हुआ. हालांकि 2011 में कांग्रेस की सरकार थी और 2018 में बीजेपी, तो आरोप ज्यादा किसपर लगना चाहिए. खैर यह कोई और मुद्दा है इसपर चर्चा हम बाद में करेंगे

फिलहाल हम आपको विस्तार में बताते है कि क्या है  ये पूरा मामला –

महज 3500 रूपए कमाने वाला एक इंसान जो थोड़े दिन में हीरा कारोबारी बन जाता है उसका मनोबल इतना ऊंचा उठ जाता है कि उसको किसी का भय नहीं रहा. उसकी हिम्मत इतनी बढ़ जाती है कि वो देश के दूसरे सबसे बड़े बैंक घोटाले को अंजाम दे कर फरार हो जाता है. साल 2018 में इस बात का खुलासा हुआ कि नीरव मोदी ने अपने बिजनेस पार्टनर्स के  साथ मिलकर देश को 11400 करोड़ का चूना लगाया है.

साल 2008 में हीरा व्यापारी नीरव मोदी ने अपने नाम से एक इंटरनेशनल डायमंड ज्वेलरी ब्रांड बनाया और इसके आउटलेट दिल्ली, लन्दन, न्यूयॉर्क और मोस्को में खोले. बहुत सी खूबसूरत मॉडल और अभिनेत्रियों ने इसकी ब्रांडिंग की. लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि  उनके ऐड के पैसे नहीं मिले. इस लिस्ट में प्रियंका चोपड़ा भी शामिल हैं.

नीरव मोदी, उनकी पत्नी अमी, उनके भाई निश्चल और उनके कारोबारी साथी मेहुल को अपनी तीन कंपनियों डायमंड आर यूएस, सोलर एक्सपोर्ट और स्टैलर डायमंड के लिए कुछ सामान मंगवाना था. ये सामान हॉन्ग कॉन्ग में खरीदा कर लाया जाना थ. सामान मनवाने  के लिए 280 करोड़ रूपए की ज़रुरत थी और इनके पास पैसे नहीं थे. इसके लिए इन्होंने 16 जनवरी, 2018 को मुंबई के पंजाब नेशनल बैंक से संपर्क किया. उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक से कहा कि वो इन सामानों को मंगवाने के लिए एक लेटर ऑफ अंडरटेकिंग जारी कर दे.

इसका मतलब यह था कि नीरव मोदी 280 करोड़ रूपए बैंक में जमा करा दें और बैंक उन्हें लैटर ऑफ़ अंडरटेकिंग दे देगी . लेकिन बात यहाँ पर आकर अटक गयी जब  नीरव मोदी ने यह कह दिया की आज से पहले उन्हें इस प्रोसेस को करने की ज़रुरत कभी नहीं पड़ी. क्योंकि बैंक अफसर वहां नए थे और उनको इस से गड़बड़ी का संदेह हुआ तब उन्होंने कहाँ कि वह कागज़ देख कर बताएंगे.

उसके बाद समय जाया किये बिना जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई  . जांच में यह ज़ाहिर हो गया कि आज तक नीरव मोदी गलत तरीके से लेटर ऑफ अंडरटेकिंग बनवाते रहे थे. जांच में यह भी सामने आया कि  ऐसे लेटर जारी करने में पंजाब नेशनल बैंक के डिप्टी मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी ने बैंक के ही एक और साथी मनोज खरात के साथ मिलकर ये खेल किया था. बैंकों में एक स्विफ्ट मैसेजिंग सिस्टम होता है जिसको हम Society for Worldwide Interbank Financial Telecommunication भी कहते है , जिसके जरिए बैंक हर घंटे लाखों डॉलर ट्रांसफर करते हैं. विदेश में क्रेडिट हासिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘स्विफ्ट’ से जुड़े मैसेज पंजाब नेशनल बैंक के सॉफ्टवेयर सिस्टम में तुरंत नहीं दिखते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन्हें बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम में एंट्री किए बिना जारी किया जाता है. गोकुलनाथ शेट्टी ने इसी का फायदा उठाते हुए नीरव मोदी की मदद की. इससे  विदेश में क्रेडिट हासिल करने के लिए लेटर ऑफ अंडरटेकिंग तो जारी हो जाता था , लेकिन वो मुंबई स्थित पंजाब नेशनल बैंक के कोर सिस्टम में दर्ज नहीं हो पता था . ऐसे में नीरव मोदी और उनके साथियों को पैसे तो मिल जाते थे, लेकिन वो खुद पंजाब नेशनल बैंक को पैसे देने की जिम्मेदारी से बच जाते थे.

जांच पूरी होने के बाद सीबीआई को सूचना दी गई. पंजाब नेशनल बैंक के मैनेजिंग एडिटर सुनील मेहता ने बताया था कि “यह सबकुछ 2011 से चल रहा था. जनवरी 2018 में इस बात का खुलासा हुआ . 2-3 दिन की जाँच के बाद सीबीआई को इत्तिला कर दिया गया.”

हालांकि सीबीआई को इन सबकी तलाश 280 करोड़ रुपये के मामले में थी. बैंक और सीबीआई जब इस मामले की जांच कर रहे थे तो पता चला कि नीरव मोदी और उनके साथियों ने इसी तरीके से बैंक से अब तक करीब 11,400 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं. इससे संबंधित कोई रिकॉर्ड न होने की वजह से बैंक के अधिकारियों को पता भी नहीं चला कि बैंक से पैसे निकाले गए हैं. 14 फरवरी,2018 को बैंक की ओर से 11,400 करोड़ रुपये के घोटाले का मामला दर्ज करवाया गया.

आपको बता दें कि सरकारी एजेंसियों की इतनी सख्ती के बाद नीरव मोदी ने पंजाब नेशनल बैंक को खत लिखकर ने कहा है वो अगले छह महीने में बैंक को पैसे लौटा देंगे. नीरव मोदी के खत के मुताबिक वो फायर स्टार डायमंड्स कंपनी के जरिए पैसे लौटाएंगे, जिसकी कीमत 6,400 करोड़ रुपए है.

बहरहाल अब देखते है कि नीरव मोदी इसबार पुलिस की गिरफ्त में आते है या फिर फरार हो जाते है.