कश्मीर पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दिया ये आदेश

केन्द्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला लिय़ा था. इस अनुच्छेद को हटाने के बाद घाटी में हिंसा फैलने का डर था और कई विपक्षी पार्टियों ने विरोध प्रदर्शन करने की कोशिश की थी. केंद्र सरकार ने एहतियातन इन्टरनेट सेवाएं बंद कर दी थी. जिसको लेकर कई पार्टियों ने केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की थी. लेकिन वो अपनी कोशिश में सफल नही हो सके. तो उन लोगों ने घाटी में इन्टरनेट सेवा बंद होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. विपक्षी पार्टियों का कहना था की लम्बे समय के लिए नेट सेवा बंद करना उचित नही है.

दरअसल, अनुच्छेद 370 के खिलाफ याचिका में जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद लगाई गई पाबंदियों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘जम्‍मू कश्‍मीर में पाबंदियों के आदेश की समीक्षा के लिए कमेटी बनेगी. यह कमेटी समय-समय पर पाबंदी की समीक्षा करेगी. सरकार पाबंदियों पर आदेश जारी करके इनकी जानकारी दे’. SC ने कहा कि अुनच्‍छेद 19 में लोगों को इंटरनेट की आजादी का हक है.

आगे सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि “इंटरनेट लोगों का मौलिक अधिकार है. J&K में इंटरनेट अनिश्चितकाल के लिए बंद नहीं किया जा सकता. जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट पर लगी पाबंदी को हटाने के लिए सरकार स्थिति की समीक्षा तत्काल करे. इंटरनेट का अस्थायी निलंबन, नागरिकों की बुनियादी स्वतंत्रता में मनमानी नहीं होनी चाहिए, न्यायिक समीक्षा के लिए खुलापन होना चाहिए. जम्‍मू कश्‍मीर में इंटरनेट निलंबन की तत्‍काल समीक्षा की जानी चाहिए.”

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा कि जम्मू-कश्मीर में सरकारी वेबसाइटों और ई-बैंकिंग सुविधाओं को लोगों तक समय से पहुँचाने की अनुमति देने पर विचार करने को कहा है. साथ ही कहा कि रिव्‍यू कमेटी द्वारा हर 7 दिनों में क्षेत्र में इंटरनेट प्रतिबंधों की आवधिक समीक्षा की जानी चाहिए.

जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह फैसला सुनाया और सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट में आगे कहा कि लोगों के अधिकारों को सुरक्षित करना होगा. आजादी और सुरक्षा में संतुलन जरूरी है. राजनीति में दखल देना हमारा काम नहीं है. जम्‍मू कश्‍मीर ने बहुत हिंसा देखी है.

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