CAA और NRC के बाद अब अप्रैल में NPR लाने की तैयारी में मोदी सरकार

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इस वक्त पूरे देश में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर हालात बेहद ख़राब हैं, कहीं आगजनी तो कहीं पत्थरबाजी, देश भर में इन्टरनेट सेवायें बाधित हैं, पुलिस प्रशासन मुस्तैद है. लेकिन नागरिकता को लेकर केंद्र की मोदी सरकार CAA के आलावा भी कई अन्य मोर्चों पर कार्य करने में लगी हुई है, और इन्हीं में से एक है NPR (नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर) और इस रजिस्टर में खास बात तो भी ये है कि इसकी अधिसूचना भी जारी की चुकी है, अब पूरे देश में कुछ महीने भीतर इससे जुड़े सर्वे शुरू किये जायेंगे.

CAA और NRC को लेकर जो बवाल मचा हुआ है उससे लग रहा है जैसे देश के अंदर कोई जंग चल रही है, लेकिन नेताओं द्वारा ऐसे हालात में राजनीति भी खूब चमकाई जा रही है और सामाजिक तौर पर कुछ लोग हिंदुस्तान को बांटने का काम भी कर रहे हैं.

ये पूरा बवाल सिर्फ CAA को लेकर मचा हुआ है. और आने वाले भविष्य में NRC की महक भी इसमें महसूस की जा रही है. इसलिए शायद कुछ लोग बेहद परेशान भी हैं. इस एक्ट के खिलाफ भी लोग सडकों पर उतरकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं. लेकिन सरकार भी पूरी तैयारी में है, गृहमंत्री अमित शाह एक इंटरव्यू और संसद में ये स्पष्ट भी कर चुके हैं कि इस एक्ट को वापस नहीं लिया जायेगा. आने वाले बिल NPR के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कैबिनेट से 3,941 करोड़ रुपये की मांग भी की है.आपको बता दें एनपीआर का मकसद देश के सामान्य नागरिकों का व्यापक इंडेंटटी डेटाबेस बनाना है. और इस डेटा में भारतीय जनसांख्यिंकी के साथ साथ निवासियों की बायोमेट्रिक जानकारी भी मौजूद रहेगी.

क्यूंकि CAA और NRC की तरह गैर-भाजपा शासित सभी राज्य भी इसके भी विरोध में खड़े हुए हैं और इसके विरोध में  सबसे आगे हैं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी.वो राज्य जहाँ  CAA और NRC को लेकर सबसे ज्यादा बवाल मचा था. और खुद ममता ने अपने राज्य में मोदी सरकार के खिलाफ CAA और NRC को लेकर मोर्चा खोल दिया था,  इसलिए फ़िलहाल बंगाल में एनपीआर पर जारी काम को भी रोकने का फैसला लिया गया है. वहीँ दक्षिण में लेफ्ट की केरल सरकार ने भी इस बिल के काम को रोक दिया है. इसके लिए वहां के मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से एक बयान जारी करके ये आशंका जाहिर की गयी है कि इसके जरिये केंद्र सरकार NRC की तैयारी कर रही है.