निर्भया के आरोपियों को फां’सी देने जा रहे पवन जल्लाद की कहानी आपको अंदर तक झकझोर देगी

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कुछ दिन पहले ये खबर आई थी की निर्भया के आरोपियों को फां’सी होने वाली है और इसके लिए अंतिम मुहर कभी भी लग सकती है.. लेकिन फां;सी देने के लिए पूरी तैयारियां होने के बावजूद भी अबतक तिहाड़ जेल प्रशासन के पास जल्लाद नहीं है, और ऐसे में दोषियों को फां’सी कैसे दी जाये ये सवाल खड़ा हो गया.. सोशल मीडिया पर तमाम लोगों ने कोर्ट से और जेल प्रशासन से अपील की कि निर्भया के आरोपियों को फां’सी देने के लिए वो तैयार हैं.. लेकिन फिर अचानक से आखिर में पुश्तैनी जल्लादों में से एक जल्लाद ने मीडिया में आकर कहा कि वो जल्द ही निर्भया के आरोपियों को फां’सी देने के लिए दिल्ली आने वाला है.

इस जल्लाद का नाम है पवन, इनके पिता मुम्मू जल्लाद ने भी दो लोगों को फां’सी दी थी और पवन के दादा कालूराम जल्लाद ने भी तमाम लोगों को पलक झपकते ही फंदे पर लटका दिया था. ऐसे में पुश्तैनी जल्लादों की तीसरी पीढ़ी में पवन जल्लाद आते हैं.. पवन जल्लाद के मुताबिक निर्भया के साथ जिस तरह से बर्बर’ता की गयी वो बेहद अमानवीय काम था.. और ऐसे आरोपियों को फां’सी पर लटकाने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी.. 58 वर्षीय पवन जल्लाद ने जेल प्रशासन से इस काम के बदले सिर्फ कुछ हजार रूपये चाय पानी के खर्च के लिए लेने की बात कही है, जो कि उनके वेतन के हिसाब से है.

पवन अपने परिवार की चौथी पीढ़ी हैं जो ये काम कर रहे हैं.. उनके मुताबिक़ दुनिया इसे सबसे घिनौना काम मानती है लेकिन ये उनके लिए किसी परम्परा जैसा ही है.. लोग हमें जल्लाद कहकर बुलाते हैं लेकिन हमें ये किसी गाली की तरह नहीं लगता क्यूंकि हमने अपने काम की इस सच्चाई को दिल से स्वीकार किया है.. पवन के परिवार में कुल नौ लोग हैं.. इसमें पवन, उनकी पत्नी और उनके सात बच्चे हैं.. पवन के मुताबिक वो अपनी चार बेटियों का विवाह कर चुके हैं…

वो कहते हैं कि उनके सर पर अब सिर्फ एक बेटे और एक बेटी की शादी की जिम्मेदारी है.. पवन के मुताबिक उनके परिवार को ये काम करते हुए करीब 50 साल से अधिक हो चुका है… लेकिन इसके बाद भी वो अबतक सिर्फ संविदा पर कार्यरत हैं… कोई स्थायित्व की नौकरी नहीं है…. पवन को इस बात का थोडा सा मलाल जरुर है कि वर्ष 2018 के बाद से उन्हें पांच हजार रुपये मिलने शुरू हुए लेकिन इससे पहले तक तक उन्हें सरकार की तरफ से सिर्फ तीन हजार रुपये दिए जाते थे… जो कि परिवार का पेट पालने के लिए न के बराबर हैं