क्या है यूनाइटेड नेशन्स सिक्यूरिटी काउंसिल में भारत के न शामिल होने का नेहरु कनेक्शन

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मोदी सरकार के कार्यकाल में विदेश नीति में जो कार्य हुए हैं उनका लोहा दुनियां मानती है…. अगर पिछले 6 सालों की बात करें तो भारत के रिश्ते यूरोप से लेकर एशिया तक अधिकतर देशो के साथ बेहतर हुए हैं… कश्मीर के मुद्दे पर मलेशिया और इंडोनेशिया और टर्की जैसे कुछ देशों को छोड़ दें तो ज्यादातर देशों ने भी भारत का ही साथ दिया था… ऐसे में भारत विदेश मामलों में अपनी मजबूती और भी प्रगाढ़ करना चाहता है जिसके लिए एक लम्बे वक्त से UNITED NATIONS SECURITY COUNCIL में भारत अपनी जगह तलाश रहा है.. भारत के विदेश मामलों में अगर किसी की सबसे अहम भूमिका है तो वो हैं विदेश मंत्री एस जयशंकर जो अबतक हर इंटरनेशनल फोरम पर भारत को मजबूत करने का काम कर रहे हैं… अब एस जयशंकर ने भारत की विदेश नीति के सबसे बड़े सपने यानि कि UNSC को लेकर बड़ा बयान दिया है..

S Jaishankar

दरअसल राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने UNITED NATIONS SECURITY COUNCIL में भारत के शामिल होने के लिए लगातार किये जा रहे प्रयासों पर खुलकर चर्चा की.. उन्होंने कहा.. ”भारत सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता हासिल करने के लिए निरंतर प्रयासरत है और इसमें लगातार सार्थक तरीके से प्रगति भी हो रही है.. तो वहीँ मोदी सरकार के इस दिशा में लिए जा रहे फैसलों पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार भी लगातार उन मुद्दों पर काम कर रही है जो सुरक्षा परिषद में शामिल होने में भारत की मदद करेंगे…. सुरक्षा परिषद् में शामिल होना हमारे लिए एक लम्बी प्रक्रिया है जिसके लिए धैर्य सबसे जरूरी है.. मैं यथार्थवादी हूँ इसलिए समझ सकता हूँ कि इसमें थोडा समय लगेगा लेकिन हम वहां जरुर पहुंचेगे”….

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में शामिल होने से भारत को अंतराष्ट्रीय स्तर पर तमाम बड़े फायदे मिलेंगे जैसे – संयुक्त राष्ट्र की स्थायी सेना में शामिल होना , आतंकवाद की परिभाषा क्या होनी चाहिए ये तय करना….. जो देश आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं या उसको प्रमोट कर रहे हैं उनपर प्रतिबन्ध लगाना आदि…  इस वक्त UNSC में 5 स्थायी सदस्य हैं  जिसमें अमेरिका रूस चीन ब्रिटेन और फ़्रांस मौजूद हैं और इन्हें वीटो पॉवर मिली हुई है जो किसी भी मामले पर वीटो करके संयुक्त फैसलों का विरोध कर सकते हैं या समर्थन कर सकते हैं. यानि कि अगर सभी सदस्यों ने किसी मामले पर सर्वसम्मति बना ली है मगर एक सदस्य उसपर वीटो कर दे तो उसको रद्द कर दिया जायेगा.. अगर इस काउन्सिल में किसी सदस्य को शामिल करना है तब भी इन पाँचों सदस्यों को एकमत होना जरूरी है. इसके आलावा UNSC में 10 अस्थाई सदस्य भी होते हैं जो समय समय पर वोटिंग के हिसाब से बदलते रहते हैं मगर ऐसा नहीं है कि भारत कभी UNSC का पार्ट नहीं रहा है, भारत पहले भी अस्थाई सदस्य के तौर पर इसमें शामिल हो चुका है. गौरतलब है इस वक्त भारत को इसमें शामिल करने के लिए 4 सदस्य अमेरिका, रूस, फ़्रांस, ब्रिटेन तैयार हैं. ये चारों ही देश भारत को UNSC में शामिल करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जाहिर कर चुके हैं.. पिछले कुछ वर्षों में भारत के अमेरिका के साथ सामरिक रिश्ते सबसे बेहतर रहे हैं इसलिए अमेरिका भारत को इसमें शामिल करने के लिए सबसे आगे आकर अपना समर्थन देता आया है…. लेकिन सिर्फ चीन ही हर बार भारत को इसमें शामिल करने से इनकार करता आया है.. भारत का विरोध करने के लिए चीन तमाम मुद्दों को उठाता है फिर चाहे वो कश्मीर में मानवाधिकार का मुद्दा हो या पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा हो…

UNSC LOGO

भारत के विरोध में हर बार चीन वीटो पॉवर का इस्तमाल करता है क्यूंकि चीन ये बात अच्छे से समझता है कि भारत और पाकिस्तान के बॉर्डर विवाद के चलते रिश्ते बेहद ख़राब रहे हैं..  और भारत एशिया में उभरती बड़ी शक्तियों में से एक है जो चीन को लगभग हर मोर्चे पर टक्कर देता है तो ऐसे में भारत को पाकिस्तान के साथ विवादों में उलझा देने से उसकी समस्या कुछ हद तक हल हो सकती है.. इसलिए वो बिलकुल नहीं चाहता कि भारत UNSC में शामिल हो.. क्यूंकि UNSC में भारत के शामिल होते ही पाकिस्तान अंतराष्ट्रीय पोडियम पर बेहद पिछड़ जायेगा.. तब भारत और चीन आमने सामने खड़े होंगे…. इसके आलावा अगर इकनोमिक जोन की बात की जाये तो वहां भी भारत लगातार अपनी मजबूती बढाता जा रहा है, फिर चाहे वो इकनोमिक फोरम की बात हो या आशियान में भारत के प्रतिनिधित्व की बात हो… एशिया की Geopolitics में भारत इस वक्त चीन का सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी है.. और चीन एशिया ही नहीं दुनिया की महाशक्ति बनने के सपने देख रहा है.. क्या चीन ये चाहेगा कि भारत एशिया का बॉस बन जाये ? ये भी वजह है जिसके लिए वो भारत को UNSC में शामिल करके एक Upper hand नहीं देना चाहता है..

में यहाँ भारत के लिए बॉस शब्द का इस्तमाल क्यूँ कर रहा हूँ, जरा इसपर गौर कीजिये- जून 2019 में भारत को UNITED NATIONS SECURITY COUNCIL में अस्थाई तौर पर शामिल किये जाने को लेकर एशिया पेसिफिक से सभी 55 देशों ने भारत के समर्थन में वोट किया था… आप सोचिये एक भी देश ऐसा नहीं था जिसने भारत का विरोध इस मंच पर किया हो… कमाल की बात ये रही कि भारत को सपोर्ट करने वाले 55 एशियाई देशों में पाकिस्तान और चीन भी थे.. एशिया में भारत का दबदबा इस कदर है कि पाकिस्तान चाहकर भी भारत का विरोध नहीं कर सका. ये दिखाता है कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में किस हद तक भारत अंतराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुआ है.. भारत के पास मौजूदा समय में एक बड़ा सपोर्ट सिस्टम है जो हर मंच पर भारत के साथ खड़ा है.. इस फैसले के बाद भारत को 2021 से 2022 तक UNSC का अस्थायी सदस्य बनाया जायेगा…

वैसे अगर चीन की बात की जाये तो ऐसा नहीं है कि हर मंच पर वो सिर्फ भारत का विरोध ही करता रहता है.. क्यूंकि ट्रेड वार में इस वक्त चीन और भारत एक ही तरफ नजर आ रहे हैं.. जिसमें अमेरिका का स्टैंड इन दोनों देशों से अलग है..भारत को UNSC का अस्थाई सदस्य बनाये जाने के लिए चीन से जो सपोर्ट दिया है उसके पीछे एक वजह छुपी है जो आपको जान लेनी चाहिए… दरअसल चीन की शंघाई कोऑपरेशन आर्गेनाइजेशन नाम की एक संस्था है जिसमें तमाम एशिया और यूरोप के देश शामिल हैं… इसकी एक 2019 के शुरुआत में किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में  एक मीटिंग हुई थी जिसमें भारत भी शामिल रहा.. उस वक्त भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस मीटिंग में अपील की थी कि सभी देशों को भारत की UNSC में अस्थाई सदस्यता के लिए वोट करना चाहिए…… जहाँ पर बिना किसी विरोध के सभी देशों ने भारत की इस मांग को स्वीकार किया था.. इतने बड़े मंच पर भारत के लिए ये एक बड़ी राजनयिक जीत थी.. लेकिन भारत को UNSC का परमानेंट सदस्य बनना है… इसके पीछे तमाम बड़े कारण हैं जिनसे सवाल खड़े होते हैं कि अबतक भारत को security council का स्थाई सदस्य क्यूँ नहीं बनाया गया…

कुछ फैक्ट्स पर अगर नजर डाली जाये तो भारत दुनिया का दूसरा सबसे populated देश है जो कुछ ही सालों में चीन को पछाड़ते हुए नम्बर एक पर पहुँच जायेगा…. भारत economically भी बेहद तेजी से ग्रो कर रहा है. 3 ट्रिलियन की इकॉनमी के साथ भारत एशिया में एक मजबूत देश के तौर पर उभर रहा है… जिस तरह से हमारी इकॉनमी ग्रो कर रही है, ये उम्मीद की जा रही है कि कुछ ही सालों में भारत 10 Trillion के आंकड़े को भी छू लेगा.. एक बड़ी मिलिट्री पॉवर भारत के पास है इसके आलावा एक सबसे ancient सभ्यता को भारत represent करता है तो ऐसे में भारत को तो कबका UNSC का स्थाई सदस्य बन जाना चाहिए था… फिर क्या कारण हैं कि भारत अब भी इसमें शामिल होने के लिए संघर्ष कर रहा है… आप में से बहुत लोग .कैसे UNSC में जो इस वक्त स्थाई सदस्य हैं वो स्थाई बने… ये जानने के लिए हमें इतिहास में थोडा पीछे 1945 में जाना होगा.. जब सेकंड वर्ल्ड वार खत्म हुआ था.. एक तरफ थी अलाइड पावर्स—अमेरिका रूस फ़्रांस चीन ब्रिटेन —– तरफ  थी एक्सेस पावर्स— जापान, फासिस्ट इटली, नाजी जर्मनी आदि  जिनकी इस युद्ध में हार हुई… इसलिए automatically अलाइड पावर्स में जो देश थे उनकी जीत के बाद UNSC में जगह पक्की हो गयी….

second World War 1945

हालाँकि ये इसके ऑफिसियल चार्टर में कहीं भी नहीं लिखा गया है कि द्वितीय विश्वयुद्ध में जीतने वाले देशों को ही security council में रखा जायेगा.. लेकिन फिर  भी क्यूंकि द्वितीय विश्वयुद्ध के शुरू होने से पहले ही UNSC का विचार Invision कर लिया गया था इसलिए जो देश इस युद्ध में जीते उनका यहाँ dominance स्थापित हो गया… और इस तरह से इन देशों को यहाँ स्थाई जगह मिली.. इस तरह 1945 में UNSC बन चुका था और इसके सदस्य भी आ चुके थे.. लेकिन यहाँ पर एक सवाल और खड़ा होता है कि द्वितीय विश्वयुद्ध में भारत ने भी तो अपना योगदान दिया था.. ब्रिटिश शाशन के अधीन हमारी भी सेना वहां जाकर लड़ी थी.. फिर हमको इस prestigious council में जगह क्यूँ नहीं मिली.. बाकी जो देश वहां जीते थे उनको UNSC में जगह मिली फिर भारत पीछे कैसे रह गया… एक तरह से देखा जाये तो हम भी उस जीत में भागीदार थे…. तो इसका ये जवाब ये है कि भारत उस वक्त independent country नहीं था.. मतलब हम अंग्रेजों के लिए लड़े थे….

मगर भी ऐसा बिलकुल नहीं है कि भारत को आजादी के बाद UN की security council में शामिल होने के मौके नहीं मिले थे…. 27 सितम्बर 1955 में में लोकसभा में चर्चा के दौरान JN पारेख ने प्रधानमन्त्री जवाहर लाल नेहरु से सवाल किया था.. की क्या भारत को UN security council में शामिल होने के लिए कोई ऑफर आया है… तो जवाहर लाल नेहरु ने साफ़ तौर पर मना कर दिया कि उनके पास ऐसा कोई ऑफर नहीं है… लेकिन जवाहर लाल नेहरु ने यहाँ एक बड़ा झूठ बोला था.. आपको बताते हैं कैसे… चलिए सितम्बर 1955 से 2 महीने पहले चलते हैं.. अगस्त की शुरुआत 2 अगस्त को जब जवाहर लाल नेहरु ने सभी राज्यों के चीफ मिनिस्टर्स को एक चिट्ठी लिखी थी.. इस चिट्ठी में नेहरु ने इस बात का जिक्र किया कि उनके पास UNITED NATIONS SECURITY COUNCIL में स्थाई सदस्य के तौर पर शामिल होने के लिए एक इनफॉर्मल ऑफर आया है..  नेहरु की इस बात को हम यूँही नहीं बोल रहे हैं इसके लिए हमारे पास एक पुख्ता सबूत भी है.. ये सबूत एक किताब में मौजूद है.. जिसका नाम है Jawahar Lal Nehru’s letter to chief ministers 1947 to 1964 जिसके volume 4 के 1954 to 1957 में एक खत है…

इस किताब का ये पेज नम्बर 237 है जिसमें लिखा है.. कि informally suggestions have been made that china should be taken out from the UNITED NATIONS SECURITY COUNCIL and India should take China’s place in Council.. इसका मतलब भारत के पास इनफॉर्मल ऑफर आया था की वो UNSC में शामिल हो जाये.. और इसके लिए सदस्य देश चीन को बाहर भी कर सकते हैं.. लेकिन जवाहर लाल नेहरु ने ये कहते हुए मना कर दिया कि भारत चीन के साथ अपने रिश्ते खराब नहीं करना चाहता है और चीन जैसे महान देश का UNSC से बाहर रहना अच्छा नहीं होगा.. इसलिए हम इसमें शामिल नहीं हो सकते..

जो लोग नेहरु को बेहद विजनरी PM मानते हैं… वो इस लैटर को झूठ बता सकते हैं इसलिए हमने इस किताब का पीडीऍफ़ फॉर्मेट लिंक इस आर्टिकल में नीचे दे दिया है.. आप भी चाहें तो वहां जाकर देख सकते हैं.. सब मेंशन है.. इसके बाद से हमारे पास कोई ऐसा ऑफर नहीं आया.. तो ये था UNSC का वो इतिहास जिसपर आपके बहुत सारे सवाल रहे होंगे.. उम्मीद है मैंने आपको सभी सवालों के जवाब दिए होंगे..  रही बात हमारे अब इसमें शामिल होने की तो इसमें शामिल होना भारतीय विदेश मंत्रालय की प्राथमिकताओं में से एक इसलिए है क्यूंकि इसके अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत को दूरगामी फायदे होंगे.. मोदी सरकार इसके लिए लगातार काम कर रही है जिससे की जो गलती पहले हुई वो फिरसे न दोहराई जाए…