कश्मीर पर NDTV की रिपोर्ट को पाकिस्तान ने किया शेयर, भारत के खिलाफ किया इस्तेमाल

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अगर कोई आपसे पूछे कि क्या आप एनडीटीवी देखते हैं? तो आपका जवाब हाँ भी हो सकता और ना भी हो सकता है.. लेकिन अगर आप किसी पाकिस्तानी से पूछेंगे कि क्या वो एनडीटीवी देखता है तो उसका जवाब जरूर हाँ होगा क्योंकि भारत के खिलाफ सारी जानकारियाँ उन्हें एनडीटीवी से ही मिलती है .

अब हम आपको बताते हैं क्या हुआ ? एनडीटीवी के एंकर श्रीनिवासन जैन लाइव शो में एक एंकर के जरिये कश्मीर की ग्राउंड रिपोर्ट ले रहे थे . एंकर उन्हें बताता है कि भारत सरकार कह रही है कि आर्टिकल 370 हटने से कश्मीर के लोग खुश हैं लेकिन ऐसा नहीं है .फिर वो रिपोर्टर एक बूढ़े आदमी की बातें बताता है कि कैसे वो कह रहा था कि भारत सरकार झूठ फैला रही है कि कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने से सब खुश हैं .हम बिलकुल खुश नहीं है. एक दिन के लिए कर्फ्यू हटा कर देखो फिर हम बताते हैं कि कितने खुश हैं” .अब एनडीटीवी के इस क्लिप को पाकिस्तान की सत्ताधारी पार्टी PTI ने ट्वीट कर दिया .

PTI के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया- “नई दिल्ली में रहने वाले सभी लोगों के लिए यह भ्रम है कि अनुच्छेद 370, जम्मू-कश्मीर क्षेत्र के मिलन से कश्मीर खुश है, एक बूढ़े कश्मीरी ने एक संदेश दिया है “एक दिन के लिए कर्फ्यू उठाएं और हम उन्हें बताएंगे कि हम [कश्मीरियों] कितने खुश हैं”। क्या मोदी ऐसा कर सकते हैं?”

भारत सरकार जहाँ दुनिया को ये बता रही है कि कश्मीर उसका आतंरिक मामला है और लोग खुश हैं वहीँ एनडीटीवी भारत सरकार को दुनिया के सामने झूठा साबित करने की कोशिश में जुटी है . पाकिस्तान ने एनडीटीवी की रिपोर्ट का इस्तेमाल कर दुनिया को ये बताने की कोशिश कर रहा है कि भारत सरकार ने कश्मीरियों पर ज्यादती कर कब्ज़ा किया है . एनडीटीवी ने जो किया है वो राष्ट्रद्रोह की श्रेणी में आता है . जब ये बात सोशल मीडिया पर सामने आई तो एनडीटीवी बैकफुट  पर आ गया और सफाई देने लगा . एनडीटीवी ने दो ट्वीट किये .. एक ट्वीट में उसने अपनी रिपोर्ट के गलत इस्तेमाल के लिए पाकिस्तान की आलोचना की . वहीँ दुसरे ट्वीट में उसने स्पष्टीकरण दिया कि एनडीटीवी के सभी कर्मचारी, रिपोर्टर, एंकर ये मानते हैं कि कश्मीर भारत का हिस्सा है और ये भारत का आतंरिक मसला है. हमारे सभी रिपोर्टर बिना किसी डर और पक्षपात के सभी भारतीयों की आवाज को उठाते रहेंगे .

एनडीटीवी वो ही चैनल है जिसके हिंदी वर्जन एनडीटीवी इण्डिया में मैग्सेसे पुरस्कार विजेता ब्रह्माण्ड के सर्वश्रेष्ठ पत्रकार रवीश कुमार काम करते हैं और जो भारत के लोगों को सलाह देते हैं कि टीवी देखना बंद कर देना चाहिए. देश में डर का माहौल है . वाकई देश में डर का माहौल तो है .. जिस देश में एनडीटीवी जैसा मीडिया संसथान हो जो अर्बन नक्सलों और देशद्रोहियों से भरा हो उस देश को डरना तो चाहिए .. उस देश के नागरिकों में डर का माहौल तो होगा ही .

वैसे एनडीटीवी पाकिस्तान में कोई नया नया लोकप्रिय नहीं हुआ है .एनडीटीवी में काम कर चुकी बरखा दत्त के बारे में आतंकवादी हाफिज सईद ने एक बार कहा था – इंडिया में बरखा दत्त जैसे अच्छे लोग भी हैं . एक आतंकवादी किसे अच्छा कहता है . उसे ही जो उसकी बातों से सहमत हो और जिससे उसे फायदा मिल सके. आज एनडीटीवी के रिपोर्ट को पकिस्तान ने अपना हथियार बना लिया . जब देशहित की बात आती है जो पूरी दुनिया में शायद ही कोई ऐसा देश हो जिसने नागरिक एक ना होते हों . लेकिन भारत में तो आपको सेक्युलर दिखना है , लिबरल दिखा है और सबसे बढ़कर मोदी विरोधी दिखना है तो उसके लिए चाहे जिस भी हद तक जाना पड़े जा सकते हैं और उसी हद तक एनडीटीवी गया .