NDTV गलत ग्राफ से लोगों को कर रहा था गुमराह, हो गया एक्सपोज तो मांगी माफ़ी

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अगर कोई आपसे पूछे कि 39%, 57%, 81%, 41% में से बड़ा कौन है तो आप कहेंगे कि 81 प्रतिशत सबसे बड़ा आंकड़ा है और 39 प्रतिशत सबसे छोड़ा आंकड़ा है. आप ही नहीं बल्कि कोई भी सामान्य इन्सान, जो पढ़ा लिखा है, जिसकी मानसिक स्थिति ठीक है वो भी यही कहेगा कि 39 प्रतिशत सबसे छोटा आंकड़ा है जबकि 57 प्रतिशत और 81 प्रतिशत बड़ा आंकड़ा है. लेकिन यही सवाल अगर NDTV से पूछा जाए तो वो कहेंगा कि 39 प्रतिशत सबसे बड़ा आंकड़ा है और 81 प्रतिशत, 57 प्रतिशत छोटा आंकड़ा है. वो ऐसा इसलिए कहेगा कि वो ndtv है. वो ऐसा इसलिए कहेगा क्योंकि उसका काम है प्रोपगैंडा फैलाना.

अब हम आपको पूरा मामला बताते हैं. बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक पार्टियों द्वारा क्रिमिनल्स को टिकट देने पर सवाल उठाये. NDTV पर कोर्ट के इसी टिप्पणी के ऊपर डिबेट चल रहा था. इस डिबेट में टीवी स्क्रीन पर एक ग्राफ दिखाया गया. जिसके अनुसार संसद में भाजपा के 39 प्रतिशत सांसद आपराधिक पृष्ठभूमि से है जबकि कांग्रेस के 57 प्रतिशत सांसद आपराधिक पृष्ठभूमि से हैं और JDU के 81 प्रतिशत सांसद आपराधिक छवि के हैं. उसके बाद DMK के 43 प्रतिशत सांसद और फिर TMC का नंबर था जिसके 41 प्रतिशत सांसद आपराधिक पृष्ठभूमि से है.

अब NDTV ने बड़ी ही चालाकी से भाजपा के ग्राफ को सबसे ज्यादा बड़ा दिखाया, जबकि उसके सबसे कम 39 प्रतिशत सांसद आपराधिक पृष्ठभूमि से है. जबकि कांग्रेस के 57 प्रतिशत वाला आंकड़ा और JDU का 81 प्रतिशत वाले आंकड़े का ग्राफ सबसे छोटा दिखाया. ताकि कोई भी स्क्रीन पर देखते ही ये अनुमान लगा ले कि भाजपा ही क्रिमिनल्स की सबसे बड़ी हितैषी है. ये एक अलग तरह का प्रोपगैंडा है. ये एक अलग तरह का मैथ है. ये NDTV का रिसर्च है कि कैसे 39 प्रतिशत को 81 और 57 प्रतिशत से ज्यादा बड़ा दिखाएँ.

सोशल मीडिया पर NDTV की फजीहत हो गई. उसका प्रोपगैंडा एक्सपोज हो गया. लोगो ने उसे जमकर खरीखोटी सुनाई. उसके बाद NDTV बैकफुट पर आ गया और उसने सफाई देते हुए अपनी गलती मान ली और नया ग्राफ दिखाया. लेकिन तब तक तो ndtv का प्रोपगैंडा एक्सपोज हो चूका था.