डिनर डिप्लोमेसी के जरिये शक्ति प्रदर्शन की तैयारी में एनडीए

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एग्जिट पोल के नतीजों के बाद और चुनाव परिणाम से पहले का दौर सबसे मुश्किल दौर होता है. चुनाव परिणाम आने में सिर्फ दो दिन बचे हैं लेकिन भाजपा और विपक्ष ने अपनी अपनी रणनीतियों को धार देना शुरू कर दिया है. इसी सिलसिले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सभी एनडीए नेताओं को मंगलवार 21 मई को डिनर पर आमंत्रित किया है. दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल में होने वाले इस डिनर में शामिल होने के लिए नीतीश कुमार, उद्धव ठाकरे, प्रकाश सिंह बादल, राम, विलास पासवान और AIADMK के नेता भी शामिल होंगे .

डिनर के लिए ख़ास तरह की तैयारियां की गई है. सहयोगियों के राज्य के हिसाब से उनकी पसंद का ख्याल रखा गया है. नीतीश कुमार और राम विलास पासवान के लिए लिट्टी चोखा की व्यवस्था हो रही है तो उद्धव ठाकरे के लिए पूरनपोली की, पंजाब में भाजपा के सहयोगी बदल के लिए पंजाबी पकवानों की भी व्यवस्था है. मेन्यु में हर सहयोगी के पसंद को तरजीह दी गई है. प्रधानमंत्री मोदी भी इस डिनर में शामिल हो रहे हैं तो उनके लिए गुजराती व्यंजनों की व्यवस्था है. इस डिनर के जरिये ये सन्देश देने की कोशिश हो रही है कि एनडीए अपनी जीत के प्रति आश्वस्त है और पूरी एकता के साथ खड़ा है . इस डिनर से पहले भाजपा के केन्द्रीय मंत्रियों और नेताओं की एक बैठक भाजपा मुख्यालय में होनी है. जिसमे एग्जिट पोल के नतीजों औr 23 मई को उभरने वाले समीकरणों पर चर्चा की जायेगी .

एक्जिट पोल के बाद विपक्षी खेमे में भी हलचल है. 23 मई को उभरने वाले समीकरणों की संभावनाओं को देखते हुए कांग्रेस ने भी अपने सहयोगियों को टटोलना शुरू कर दिया है, साथ ही उन क्षेत्रीय दलों पर भी डोरे डालना शुरू कर दिया है जो अब तक किसी गठबंधन के साथ खड़े नहीं दिखे हैं . कांग्रेस ने नवीन पटनायक को मनाने की जिम्मेदारी कमलनाथ को सौंपी थी लेकिन एक्जिट पोल के बाद UPA को सबसे बड़ा झटका नवीन पटनायक की तरफ से ही लगा . उन्होंने NDA के साथ जाने के संकेत दिए . हालाँकि ओडिशा में बीजेपी और BJD के बीच मुख्य मुकाबला है लेकिन फिर भी दोनों पार्टियों के बीच उस तरह की तल्खी देखने को नहीं मिली जैसा पश्चिम बंगाल में हो रहा है .

एग्जिट पोल में चंद्रबाबू नायडू को नुक्सान और जगनमोहन रेड्डी को फायदा मिलता दिखाई दे रहा है . जगनमोहन और नायडू के बीच आन्ध्र में सीधी टक्कर है और साथ ही जगनमोहन के कांग्रेस के साथ भी समीकरण ठीक नहीं है. इसलिए उनको मनाने की जिम्मेदारी शरद पवार को सौंपी गई है. शरद पवार ने जगनमोहन को फोन किया लेकिन जगनमोहन ने उनका फोन तक उठाना जरूरी नहीं समझा . जाहिर सी बात है कि 23 मई से पहले जगन अपने पत्ते नहीं खोलना चाहते . आन्ध्र में लोकसभा के साथ ही विधानसभा के चुनाव भी हुए हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार राज्य की सत्ता से चन्द्रबाबू नायडू की विदाई हो जायेगी और जगनमोहन बड़ी ताकत बन कर उभरेंगे .

अब कौन किसके पाले में जाता है इसके लिए हमें 23 मई तक का इंतज़ार करना होगा .. तब तक दोनों गठबन्धनों की तरफ से अपने अपने दांव चले जा रहे हैं . अगर 23 मई को नतीजे NDA के पक्ष में आये तो कई क्षेत्रीय डाल जो अभी किसी पाले में नहीं हैं वो NDA की तरफ आ सकते हैं .