घाटी में कभी इनका आ’तंक था पर आज हो रही है तिहाड़ में खातिरदारी

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1990 के दशक में जम्मू कश्मीर की घाटी में खौफ का दूसरा नाम बन चुके दो दोस्तों की हालत तिहाड़ जेल में खराब है. कुछ समय पहले इस जोड़ी का नाम सुनते ही अच्छे अच्छे लोगों को पसीना आ जाता था. सरकार और सेना भी इनसे परेशान रहती थी लेकिन आज इनको कोई पूछने वाला नही है. कभी साथ मिलकर अपने हाथों को खून से रंगने वाले ये जोड़ी आज बेहद नजदीक रहने के बावजूद भी एक दुसरे को देखने के लिए तरस गये हैं. गुजरे हुए कल की यह खूनी जोड़ी लंबे समय से एशिया की सबसे सुरक्षित समझी जाने वाली दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल में कैद है. नाम है यासीन मलिक और फारुख अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे. हालाँकि यासीन मलिक अलगाववादी नेता के तौर पर भी काफी प्रसिद्द हुआ है.


मिली जानकारी के मुताबिक़ दिल्ली की तिहाड़ जेल के जेल नम्बर एक में यासीन मलिक बंद है और कभी यासीन का साथी रह चुका बिट्टा कराटे भी यहीं 8-9 नंबर जेल में कैद है. ये कहा जा सकता है कि दोनों तिहाड़ जेल में बंद है लेकिन ये सिर्फ कहने के लिए ही है क्योंकि तिहाड़ जेल में रहने के बाद भी दोनों कभी आपस में मिल नही पाते. बिट्टा और यासीन को हाई-सिक्युरिटी वार्डस में रखा गया है. बिट्टा जम्मू कश्मीर के साथ साथ देश की कई अन्य जेलों में रह चुका है. आगरा की जेल में बंद रहने के वक्त बिट्टा 14 महीने की भूख हड़ताल पर बैठ गया था. बिट्टा कराटे कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कश्मीर घाटी की जेल में बंद रहने के दौरान उस पर एक कैदी का सिर-कुचल कर उसे मार डालने का भी आरोप लगा था. जिसका कत्ल उसने किया था वह उसका जिगरी दोस्त कश्मीरी पंडित युवक राम था. ये कराटे की जिन्दगी का पहला कत्ल था. इस घटना का डर आज भी कश्मीरी पंडितों की जेहन में आज भी है. फारुख अहमद डार उर्फ बिट्टा, कराटे में ‘ब्लैक-बेल्ट’ होल्डर है. रुबिया सईद जो मुफ़्ती मोहम्मद सईद की बेटी हैं और महबूबा मुफ़्ती की बहन हैं, इनके अपहरण में भी यासीन और बिट्टा का नाम सामने आया था और कई बार यासीन इस बात को स्वीकार भी कर चुका है.

यहाँ आपको यह बताना जरूरी है कि कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने से पहले ही यासीन मलिक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था और फिर दिल्ली कि तिहाड़ जेल में शिफ्ट कर दिया गया. हालाँकि बाद में बिट्टा और यासीन के बीच इस कदर दूरी आ गयी कि दोनों ने जेकेएलएफ के दो पार्ट बना दिए एक को मुखिया बिट्टा और दुसरे का मुखिया यासीन बन गया. तिहाड़ में बंद इनदोनों से मिलने आने वालों की संख्या ना के बराबर है. वहीँ जानकारी के मुताबिक इसी जेल में एक और खूंखार आतंकी परवेज राशिद फिलहाल तिहाड़ जेल नंबर-3 में कैद है. इससे भी मिलने वालों में सिर्फ इसका पिता ही शामिल है. जबकि तिहाड़ में वर्तमान समय में बंद चौथा खूंखार नाम है अब्दुल सुभान. सुभान हरियाणा के मेवात का रहने वाला है.


ये चार वो कैदी हैं जो तिहाड़ में बंद हैं और तिहाड़ प्रशासन इनकी अच्छे से खातिरदारी कर रहा है. ये चारों कभी खूंखार अपराधी हुआ करते थे, इनकी तूती बोलती थी लेकिन आज हालात ये हैं कि इनसे मिलने वाला कोई नही है. कश्मीर से धारा 370 हटाए से पहले ही घाटी के सभी उपद्रवियों को उत्तर प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों में शिफ्ट कर दिया गया है.