मोदी सरकार में कम हुआ नक्सली हमला! रिपोर्ट में हुआ खुलासा

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नक्सली हमले से देश को बड़ा नुकसान होता है. आम नागरिक, जवान और नक्सली बड़ी संख्या में मारे जा रहे हैं. समय समय पर इन नक्सलियों से देश को कई बड़े जख्म दिए हैं. मंगलवार को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में एक नक्सली हमले में बीजेपी विधायक भीमा मंडावी की जान चली गई. उनके साथ चार सुरक्षाकर्मी भी मारे गए.. इस घटना के बाद देश एक बार फिर झकझोर उठा है. एक दिल्ली आधारित ओपन डेटाबेस, साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल के अनुसार इस साल देश में कुल 38 माओवादी हमले हुए है जिसमें 19 नागरिकों, सात सुरक्षाकर्मियों और 41 चरमपंथियों की जानें गईं.


हालाँकि अगर पिछले कुछ सालों के आकड़ों पर नजर डाले तो हमें साफ़ पता चलता है कि पिछले कुछ सालों में इस तरह की घटनाओं में कमी आई है और साथ साथ सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिको की जान गवाने की संख्या में कमी जरूर आई है. पिछले यूपीए सरकार की तुलना में मोदी सरकार में नक्सली हमले में मरने वालों की संख्या में कमी आई है. साल 2014 में जब भारत में मोदी सरकार बनी थी उस वक्त देश में 185 माओवादी घटनाएं हुई थी .इसकी वजह से 127 नागरिकों और 97 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई थी. 2015 में इस तरह की घटनाओं में कमी आई. हालाँकि 2016 में नक्सली घटनाएं बढ़कर 262, 2017 में 199 और 2018 में नक्सली घटनाएं 217 हो गईं.
अगर जून 2014 से लेकर दिसम्बर 2018 तक की कुल घटनाएँ देखी जाये तो 945 नक्सली घटनाएँ हुई है जिसमें 489 नागरिकों, 312 सुरक्षाकर्मियों और 821 चरमपंथियों की मौतें हुईं. वहीं अगर हम बात यूपीए सरकार के दौरान की करें तो जनवरी 2010 से मई 2014 के बीच 1292 चरमपंथी घटनाएं हुई थीं जिसकी वजह से 1272 नागरिकों, 660 सुरक्षाकर्मियों और 800 चरमपंथियों की मौत हुई.
साल 2013 में हुई एक बड़ी घटना में 25 कांग्रेसी नेताओं की एक साथ मौर हुई थी और साल 2017 में हुई एक घटना में 25 सीआरपीएफ जवानों की जान चली गई थी. ये दोनों हमले सुकमा में हुए थे.
30 अक्टूबर 2018 को दंतेवाड़ा में दूरदर्शन के एक कैमरामैन और सीआरपीएफ के एक जवान और 13 मार्च 2018 को सुकमा में हुए हमले में 9 सीआरपीएफ जवानों की मौत हुई थी.


हालाँकि अब तक जो भी आकड़ें सामने आये हैं उसके मुताबिक़ साल 2010 सबसे ज्यादा खूनखराबे वाला साल रहा. इस साल कुल 482 चरमपंथी घटनाएं हुईं जिसमें 627 नागरिकों और 267 सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई.
इन सभी आकड़ों को देखने के बाद एक बात समझ आती है कि नक्सली घटनाएँ पिछले कुछ सालों की अपेक्षा कम हुई है. सेना के जवानों और मृत नागरिकों की संख्या में भी कमी आई है.
लेकिन समय समय ये नक्सली अपने वारदातों को अंजाम देकर जख्म हरे कर देते हैं. ऐसे में कुछ नेता ऐसे भी हैं को इन नक्सलियों के समर्थन में खड़े होते हैं. हालाँकि पिछली सरकारों की अपेक्षा मोदी सरकार में हमले और मृतकों की संख्या में कमी जरूर आई है लेकिन सरकार को नक्सलियों से निपटने के लिए और बड़े पैमाने पर काम करना पड़ेगा.
आइये हम आपको कुछ बड़ी नक्सली घटनाओं के बारे में बताते हैं
11 मार्च 2017: भेज्जी में हमला, 11 जवान शहीद
30 मार्च 2016: दंतेवाड़ा के मालेवाड़ा में 7 जवान शहीद
28 फरवरी 2014: दंतेवाड़ा के कुआकोंडा थाना क्षेत्र में रोड ओपनिंग के लिए निकले जवानों पर हमला, 5 शहीद
11 मार्च 2014: टाहकवाड़ा में 20 जवान शहीद
मई 2013: झीरम में कांग्रेस के बड़े नेताओं समेत 32 लोगों को मारा
12 मई 2012: सुकमा में दूरदर्शन केंद्र पर हमला, 4 जवान शहीद
जून 2011: दंतेवाड़ा में नक्सलियों ने बारूदी सुरंग में विस्फोट, 10 पुलिसकर्मी शहीद
6 अप्रैल, 2010: सुकमा में नक्सलियों ने खून की होली खेलते हुए 76 सीआरपीएफ जवानों को मौत की नींद सुला दिया… सबसे ज्यादा खून खराबा इसी साल हुआ था..