शहीदों के सम्मान में बना राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, जानें.. क्या है ख़ास ?

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स्वतंत्रता आन्दोलन और देश की आज़ादी के बाद हुए युद्धों और ऑपरेशंस में शहीद हुए हमारे 22600 सैनिकों के सम्मान में अब जाकर इंडिया गेट के ठीक सामने नेशनल वॉर मेमोरियल और नेशनल वॉर म्यूजियम बनाये गए हैं.. देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर देने वाले इन सैनिकों के सम्मान में पिछले 6 दशकों से राष्ट्रीय स्मारक की मांग की जा रही थी.. और अब अंततः भारतीय सैनिकों के सम्मान में राष्ट्रीय स्मारक उनके शौर्य और बलिदान का प्रतीक बन  खड़ा हो चुका है जिसका सन्देश है “आपके आज और कल को सुरक्षित रखने के लिए, भारत की आन, बान और शान को बरकरार बने रहने के लिए हमने अपना बलिदान दे दिया”

देश की सुरक्षा, संप्रभुता के लिए प्राण देने वाले शहीद सैनिकों के सम्मान के लिए राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की मांग दशकों से की जा रही थी। 25 फरवरी को नैशनल वॉर मेमोरियल के उद्घाटन के साथ ही यह मांग पूरी हो जाएगी। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का उदघाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कल करेंगे

आइए जानते हैं इस स्मारक में क्या है खास… 


 इस प्रॉजेक्ट पर करीब 500 करोड़ रुपये की लागत आई है।

1947-48,

1961 में गोवा मुक्ति आंदोलन,

1962 में चीन से युद्ध,

1965 में पाक से जंग,

1971 में बांग्लादेश निर्माण,

1987 में सियाचिन,

1987-88 में श्रीलंका

और 1999 में कारगिल में शहीद वाले सैनिकों के सम्मान में इसे बनाया गया है। 

 इस मेमोरियल में थल सेना, वायुसेना और नौसेना के जवानों को एक साथ श्रद्धांजलि दी गई है। उन सभी वीर सैनिकों के नाम स्मारक में दर्ज हैं। 

 दुनिया के बड़े देशों में अब तक भारत ही था, जहां सैनिकों के बलिदान को याद करने के लिए युद्ध स्मारक नहीं था। इस स्मारक के साथ ही यह कमी पूरी हो गई है। 

 इससे पहले इंडिया गेट वॉर मेमोरियल बना था। यह 1931 में पहले विश्व युद्ध में हिस्सा लेने वाले भारतीय सैनिकों के सम्मान में इसे बनाया गया था। 

 पहली बार 1960 में नैशनल वॉर मेमोरियल बनाने का प्रस्ताव सशस्त्र बलों की ओर से दिया गया था। 

 25 फरवरी को पीएम नरेंद्र मोदी स्मारक को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इस मौके पर थल सेना प्रमुख के अलावा वायु सेना चीफ और नेवी चीफ भी मौजूद रहेंगे। 

 इस स्मारक के तहत एक दीवार बनी है, जिसमें देश के लिए बलिदान देने वाले सैनिकों के नाम उस पर उकेरे गए हैं।

– मौजूदा केंद्र सरकार ने 2015 में इस स्मारक के निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। 

भारत की अस्मिता पर आंच ना आने देने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर देने वाले शहीदों की शहादत के सम्मान का प्रतीक राष्ट्रीय युद्ध स्मारक अब आम जनता के लिए तैयार है.. ताकि आप उन शहीदों के बलिदान को सलाम कर सकें जो फिर कभी लौटकर घर ना आये