अयोध्या मामले पर फैसले के बाद नेहरू के नेशनल हेराल्ड का जहरीला आर्टिकल

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अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद इस फैसले के पक्ष और विपक्ष में आर्टिकल की बाढ़ आ गई. एक आर्टिकल की हेडलाइन हैं. “Why a devout hindu will never pray at the ram temple in ayodhya”. हिंदी में इसका मतलब हुआ, “क्यों अयोध्या में राम मंदिर में हिन्दू श्रद्धालु प्रार्थना नहीं करेंगे”. ये हेडलाइन है मशहूर अंग्रेजी अखबार नेशनल हेराल्ड का या यूँ कहें कि मशहूर कांग्रेसी अखबार नेशनल हेराल्ड का. इस हेडलाइन को ट्विटर पर शेयर करते हुए अखबार ने एक जहरीला कैप्शन दिया है, “क्या भगवान बल, हिंसा और रक्तपात से निर्मित मंदिर में निवास कर सकते हैं? क्या भक्त कभी ऐसे मंदिर में प्रार्थना करेंगे, भले ही भगवान वहाँ निवास करने का निर्णय लेते हों?”

इस हेडलाइन और कैप्शन से आप उस जहर और उस दर्द का अंदाजा लगा सकते हैं जो नेशनल हेराल्ड के दिल में भरा है हिन्दुओं के लिए. वो नेशनल हेराल्ड जिसकी स्थापना 1938 में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने की थी. वो पंडित नेहरू जिनके कार्यकाल में अयोध्या विवाद की नींव पड़ी.

ये बात लिखते वक़्त नेहरू का हेराल्ड ये भूल गया कि मंदिर को ध्वस्त कर मस्जिद बनाने में भी बल, हिंसा और रक्तपात किया गया होगा क्योंकि बिना रक्तपात के कोई विध्वंस हो ही नहीं सकता. जब बल, हिंसा और रक्तपात करके बनाए गए ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा मस्जिद और बाबरी में नमाज हो सकती है तो अयोध्या राम मंदिर में पूजा क्यों नहीं हो सकती. जब बल, हिंसा और रक्तपात करके बनाए गए ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा मस्जिद और बाबरी में अल्लाह का वास हो सकता है तो फिर अयोध्या के राम मंदिर में भगवान का वास क्यों नहीं हो सकता ? क्या सारी नैतिकता सिर्फ हिन्दुओं के लिए है?

हेराल्ड सिर्फ एक इसी आर्टिकल पर नहीं रुकता, अपने एक दुसरे आर्टिकल में तो हद से बाहर निकल गया और भारतीय सुप्रीम कोर्ट की तुलना पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट से कर दी. इसके लिए तर्क दिया 1954 में पाकिस्तान के गवर्नर जनरल गुलाम मोहम्मद ने पाकिस्तान के संविधान को भंग किया तो सुप्रीम कोर्ट ने उसको सही ठहराया था.

नेशनल हेराल्ड और उनकी टीम के मानसिक स्तर को आप बात से आंकिये कि भारत के सुप्रीम कोर्ट ने पुरातत्व विभाग के दस्तावेजों, सैकड़ों साल पुराने ग्रंथों और दस्तावेजों के आधार पर इस नतीजे पर पहुंची कि विवादित भूमि हिन्दू आस्था का प्रतीक है इसलिए उसे हिन्दुओं को दिया जाए. कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को भी बराबर मौका दिया कि वो अपना पक्ष रखे. कोर्ट ने मस्जिद गिराए जाने को भी गैरकानूनी माना लेकिन इसकी तुलना पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट से कर देना ये बताता है कि कितनी ज़हर भरी है हेराल्ड के मन में हिन्दुओं के लिए.

दरअसल कांग्रेस और उससे जुड़े लोग तो चाहते ही नहीं थे कि कभी इस मसले का हल निकले. उन्होंने कभी राम के अस्तित्व को नकारा गया तो कभी कोर्ट में सुनवाई की तारीखें बढ़वाई गई. अब जब सब कुछ शांति से निपट चूका है तो इन्हें बेचैनी हो रही है .