रेशमी जुल्फों के करोड़पति बनने की पूरी कहानी

इन बालों की मांग कोलकाता और चेन्नई में बहुत अधिक है। वहां इनका ट्रीटमेंट कर इन्हें चीन भेजा जाता है। व्यापारियों के अनुसार पूरे देश में पैर पसार चुका बालों का कारोबार तकरीबन 30 हजार करोड़ रुपये तक का हो चुका है, जबकि मध्यप्रदेश में करीब 100 करोड़ रुपये के बाल हर साल बिक रहे हैं। बस शर्त यह है कि बाल कटे हुए नहीं, बल्कि कंघी से झड़े हुए हों और इनकी लंबाई 8 इंच से कम न हो।कोलकाता में एक किलो बाल की कीमत 800 से 1200 रुपये तक है। होली से पहले इन बालों की कीमत 2000 रुपये प्रति किलो तक भी पहुंच जाती है, क्योंकि होली में रंगीन विग की डिमांड बढ़ जाती है। भारत में सैलून में कटे हुए बालों के साथ-साथ कंघी से झड़े हुए बालों की बिक्री का फीसद भी पिछले पांच सालों में काफी बढ़ा है।

वर्ष 2014 में तिरुपति मंदिर से ही 220 करोड़ रुपये के बालों की बिक्री हुई। सल दर साल ये आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर में मुंडन कराने की परंपरा है। यहां काफी संख्या में महिलाएं भी मुंडन कराती हैं। लिहाजा, महिला बालों के लिए तिरुपति प्रमुख स्थान है।

बालों के व्यापार का सबसे बढिय़ा सीजन क्रिसमस के बाद शुरू होता है जो अप्रैल-मई तक चलता है।होली व शादियों के मौसम में कारोबार जमकर चलता है। बारिश में बालों का व्यवसाय बंद रहने के बाद एक बार फिर अक्टूबर यानी दिवाली के समय शुरू हो जाता है।वर्ष 2018 में एक नामी समाचार चैलन के कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया था कि वह तिरुपति मंदिर से रोजाना पांच ट्रक बाल खरीदते हैं।इन बालों से उनकी फैक्ट्री में एमिनो एसिड आधारित माइक्रो न्यूट्रिएंट बनाया जाता है, जिसका खेती में प्रयोग होता है। इसकी एक बोतल की कीमत लगभग 900 रुपये होती है, जिसे वह किसानों को 300 रुपये में देते हैं।

दुबई ने भी उन्हें 180 कंटेनर एमिनो एसिड का ऑर्डर दिया है, जिसकी आपूर्ति चरणबद्ध तरीके से की जा रही है।इस कार्यक्रम में नितिन गडकरी ने बताया था कि कटे हुए बालों से तैयार एमिनो एसिड से उन्हें सालाना 12 से 15 करोड़ रुपये का मुनाफा होता है, जबकि वह इसे लगभग लागत के खर्च पर ही बेच देते हैं।

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