दुश्मनों के लिए दिल्ली को छू पाना भी होगा नामुमकिन

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देश की राजधानी दिल्ली में देश का दिल बसता है. और देश का ये दिल सुरक्षित रहे इसके लिए भारत अपनी तरफ से पुख्ता इंतजाम रखता है. इन पुख्ता इंतजामों को और पुख्ता करने के लिए अब भारत अमेरिका से NASAMS-II यानी “नेशनल अडवांस्ड सरफेस टु एयर मिसाइल सिस्टम- II” लेने के काफी करीब बढ़ रहा है.

भारत इसका इस्तेमाल भारतीय, रूसी और इजरायली रक्षा प्रणालियों के साथ करेगा. देश इन तीनो प्रणालियों को एकसाथ मिलाकर दिल्ली के लिए एक मल्टी डाइमेंशनल एयर शील्ड तैयार करेगा. अगर दिल्ली पर ये एयर शील्ड तैयार हो जाती है तो देश की राजधानी सिर्फ दुश्मन की मिसाइलों से ही नहीं बल्कि ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से भी सुरक्षित होगी.

इस के बाद ना तो दिल्ली पर सामने से हमला किया जा सकेगा और ना ही 9/11 की तरह धोखे से वार. दिल्ली की सुरक्षा में ये एक बेहद ज़रूरी कदम साबित होगा. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने इस बात की जानकारी दी है कि जुलाई या अगस्त तक अमेरिका की तरफ से इसके लिए स्वीकृति पत्र मिल सकता है.

अगर यह प्रणाली भारत के पास आ जाती है तो दिल्ली सुरक्षा की कई परतों से ढँक जायेगी. इस सुरक्षा प्रणाली में सतह से हवा में वार करने वाली मिसाइलों, अत्याधुनिक बंदूकों और मध्यम दूरी की मिसाइलों के साथ-साथ और भी कई तरह के हथियार मौजूद होंगे.

ये पूरी प्रणाली थ्री डाइमेंशनल सेंटिनल राडार पर आधारित होगी. इस नेटवर्क प्रणाली की मदद से इमारतों के बीच और आस-पास भी आसानी से शूट किया जा सकेगा. इस प्रणाली में सबसे बाहरी परत की रक्षा करेगा डीआरडीओ द्वारा तैयार किया जा रहा भारतीय टू डाइमेंशनल बीएमडी यानी बिलिस्टिक मिसाइल डिफेन्स. इसमें तैनात मिसाइलें करीब 100 किलोमीटर ऊंचाई और 2,000 किलोमीटर की दूरी तक के टारगेट को मिटाने में सक्षम होंगी.

दिल्ली सुरक्षा प्रणाली की दूसरी परत पर होगा रूस का मोबाइल एस- 400 सिस्टम. इस सिस्टम में 120 किलोमीटर से 380 किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें मौजूद होंगी जिनमें रडार, लॉन्चर्स के अलावा और भी कई खूबियाँ होंगी. इसके बाद सबसे आखिर में बराक-8 के अलावा इजरायल और भारत की एयरोस्पेस रक्षा प्रणाली रहेगी.

भारतीय रक्षा मंत्रालय की तरफ से NASAMS लेने की मंजूरी दिए जाने के बाद अमेरिका को इस सौदे के लिए पत्र लिखा गया था. अगर अमेरिका भारत के साथ इस सुरक्षा प्रणाली का सौदा करने की मंजूरी दे देता है तो कुछ ही सालों में भारत को इसकी डेलेवेरी भी हो ही जायेगी. रिपोर्ट्स की मानें तो भारत एक लम्बे वक़्त से दिल्ली के आसपास मिसाइल बैटरीज तैनात करने की तैयारी कर रहा है.

अमेरिका भारत पर दबाव बना रहा है कि भारत अमेरिका से THAAD यानी टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस और PAC-3 यानी पैट्रियट अडवांस्ड कैपेबिलिटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी खरीदे. लेकिन रक्षा मंत्रालय पहले ही करीब 40,000 करोड़ रुपये में उन्नत एस- 400 मिसाइल प्रणाली के लिए रूस से सौदा कर चुका है. 

भारत ने रूस के साथ ये समझौता अमेरिका के तमाम प्रतिबंधो का ख़तरा उठाते हुए किया. ये समझौता अक्टूबर, साल 2018 में किया गया. अमेरिका का THAAD रूस के एस-400 के साथ बराबरी करने लायक नहीं है, इसलिए भारत ने देश की सुरक्षा को पहले रखते हुए अमेरिका की बात ना मानकर रूस के एस- 400 को अपनाया.

साल 2020 के अक्टूबर महीने तक भारत को रूस का एस- 400 सिस्टम मिल जाने की उम्मीद है. इस सिस्टम की मदद से 380 किलोमीटर की रेंज में आने वाले जेट, मिसाइल, बम और ड्रोन का पता लगाकर उन्हें मिटाया जा सकेगा.

इसके साथ ही अगर भारत को अमेरिका का NASAMS भी आने वाले वाले समय में मिल गया तो रूस का एस-400, अमेरिका का NASAMS और भारत की खुद की सुरक्षा प्रणाली साथ मिलकर क्या कमाल करते हैं ये देखने वाली बात होगी.

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