मोदी सरकार का फैसला, अपडेट होगा राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर, सभी को कराना होगा पंजीकरण

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मोदी कैबिनेट ने बड़ा फैसला लेते हुए राष्ट्रीय जनसँख्या रजिस्टर (NPR) को अपडेट करने की मंजूरी दे दी. NPR के तहत देश भर में जनगणना कर के नागरिकों का एक डाटाबेस तैयार किया जाएगा. NPR किसी तरह का नागरिकता प्रमाणपत्र नहीं होगा. इसके अंतर्गत उनकी भी जानकारी शामिल होगी जो पिछले 6 महीनों से किसी दुसरे देश से आ कर भारत में रह रहे हैं. इस पूरी प्रक्रिया के लिए केंद्र सरकार ने 8,700 करोड़ रुपये आवंटित किये हैं.

सरकार NPR का इस्तेमाल सरकारी योजनाओं को लागू करने के लिए करती है. इस डेटा में जनसांख्यिकी के साथ बायोमीट्रिक जानकारी भी होगी. इसमें व्यक्ति का नाम, पता, शिक्षा, पेशा जैसी सूचनाएं दर्ज होंगी. NPR में दर्ज जानकारी लोगों द्वारा खुद दी गई सूचना पर आधारित होगी. एनपीआर को अपडेट करने का काम 1 अप्रैल 2020 से शुरू हो कर 30 सितम्बर 2020 तक चलेगा.

इससे पहले 2010 में एनपीआर को अपडेट किया गया था. ये अपडेशन 2011 की जनगणना से पहले हुआ था और इस बार भी 2021 की जनगणना से पहले एनपीआर को अपडेट किया जाएगा. यह रजिस्टर नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों के तहत स्थानीय, उप-जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है. कोई भी व्यक्ति जो 6 महीने या उससे अधिक समय से किसी इलाके में रह रहा हो तो उसे नागरिक रजिस्टर में जरूरी रजिस्ट्रेशन कराना होता है. एनपीआर और एनआरसी में बहुत अंतर है. एनआरसी घुसपैठियों की पहचान के लिए है जबकि एनआरपी जनगणना के लिए है. एनआरपी हर उस नागरिक की जानकारी होगी जो इस देश में पिछले 6 महीनों से रह रहा है.