केंद्र सरकार के इस फैसले से बदली मुस्लिम महिलाओं की तक़दीर

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भारतीय जनता पार्टी के केंद्र में आने से पहले से ही इसे मुस्लिम विरोधी पार्टी का दर्जा दे दिया गया.. खैर कुछ लोग आज भी ऐसा मानते हैं.. लेकिन आज हम लोगों की सोच पर नहीं सरकार की उन पहल की बात करेंगे जिससे मुस्लिम लड़कियों और औरतों की स्थिति मजबूत हुई है.. इस्लाम में कई ऐसी परम्पराएं हैं जिनके कारण मुस्लिम महिलाओं के हक का हनन होता आ रहा है.. तीन तलाक, हलाला, खतना, मेहर आदि.

मौजूदा केंद्र सरकार ने तीन तलाक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आवाज उठाई और सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को अवैध बता दिया और जबरन तलाक देने वालों के लिए सजा भी मुकर्रर कर दी.. इस एतिहासिक फैसले ने मुस्लिम महिलाओं के लिए वरदान का काम किया और तलाक के केसेस में कमी आई… कोई मेसेज करके तलाक दे देता था.. कोई ईमेल पर.. कोई व्हाट्सएप पर..

तीन तलाक के बाद केंद्र सरकार मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण के लिए एक और प्रथा को खारिज करवाया जिसका नाम है “मेहर”  

जो लोग इस प्रथा के बारे में नहीं जानते उनको बता देते हैं कि “मेहर” इस्लाम धर्म में प्रचलित उस प्रथा का नाम है जिसमें उन्हें हज करने के लिए या तो अपने पति या फिर किसी रिश्तेदार के साथ ही जाना होता है, इन रिश्तेदारों में उनके पति, पिता, दादा या भाई या बेटे के साथ ही जाना होता है.

कमाल की बात यह है देश को आज़ाद हुए 70 साल हो गए मगर मुस्लिम औरतें इन धार्मिक कुरीतियों से आज़ाद नहीं हो पाई.. मगर मेहर के असंवेधानिक और अनियमित घोषित होने के बाद पहली बार औरतें बिना मेहर के हज यात्रा पर गई.. और आपको जानकर हैरत होगी कि एक या दो नहीं बल्कि 1300 मुस्लिम महिलाओं ने बिना किसी पुरुष के अकेले या अपनी सहेलियों के साथ ये यात्रा पूरी की. और इस साल भी लगभग 2500 मुस्लिम महिलाएं बिना मेहरम हज यात्रा पर जाने के लिए आवेदन कर चुकी हैं.  पिछले साल केंद्र सरकार ने हज के लिए सब्सिडी हटाकर उस पैसों को मुस्लिम महिलाओं के सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक उत्थान में लगा दिया.

पिछले साल 1,75,025 रिकार्ड मुसलमानों ने बिना किसी सब्सिडी के हज यात्रा की थी जिसमें से 48 फीसद महिलाएं थीं. आरकेपुरम में हज डिविजन के नए आफिस का उद्घाटन करते हुए मुख्तार अब्बास नकवी ने बताया कि इस साल देश के विभिन्न राज्यों में रहने वाली 2340 मुस्लिम महिलाओं ने मेहरम के बिना हज 2019 पर जाने के लिए आवेदन किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर साल 2019 में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने बिना मेहरम के हज यात्रा पर जाने वाली महिलाओं को बिना लाटरी सिस्टम के यात्रा पर भेजना सुनिश्चित किया है.

तो यह है अच्छी खबर मुस्लिम महिलाओं के लिए.. उम्मीद है आगामी दिनों में सरकार चाहे जो भी हो.. समाज चाहे जो भी हो.. या चाहे जो भी देश हो… औरतों को वो सारे हक मिले जिसकी वो हक़दार हैं.