ससुर के बाद अब देवर से ‘हलाला’ का दबाव, पहले भी इंजेक्शन देकर किया था ‘कुकर्म’

1498

21 वी सदी में जहाँ औरतों ने अपनी आप को बहुत मजबूत कर लिया है ..चाहे खेल हो बिज़नस हो या राजनीति हो .. औरतों ने हर जहा अपनी मौजूदगी दर्ज करा ली है ..लेकिन अफ़सोस, आज भी समाज में कई ऐसे लोग है …जो सदियों से चली आ रही कुरीतियों से आज भी औरतों पर अत्याचार कर रहे है… आज जो कहानी आपको सुनाने जा रहे है वो कहानी एक ऐसी ही समाज में फैली कुरूति को दिखता है…कहानी है.. उत्तर प्रदेश के बरेली से..इस कहानी सुनाने से पहले हम आपको बता दे की जो ये नाम हम बोलने वाले है वो दोनों काल्पनिक है…. एक मुस्लिम महिला को उसके पति ने ‘तीन तलाक़’ देने के बाद हलाला करवाने पर मज़बूर किया… हलाल का सीधा मतलब होता है ..रस्म के नाम पर मुस्लिम औरतों का शोषण करना..ये एक ऐसी रस्म है ,जो उन तलाकशुदा औरतों के लिए होती है ..जो औरत अपने पहले शोहर से दुबारा निकाह करना चाहती हो ..

अगर किसी शख्स ने अपनी बीवी को तलाक दे दिया ,तो उससे जब तक दुबारा निकाह नहीं कर सकता है जब तक वह किसी अजनबी से निकाह कर उसके साथ शारीरिक संबंध न बनाये उसके बाद ही वो अपने शोहर से दुबारा शादी कर सकती है …ऐसे ही सलीम ने अपनी बीवी नगमा को अपने पिता यानि (पीड़िता नगमा के ससुर) के साथ ज़बरन हलाला करवाया.. पीड़िता नगमा ने अपनी शिकायत में कहा.. पहले मेरे शौहर ने मुझे तलाक़ दे दिया और दुबारा निकाह करने के लिए ससुर के साथ हलाला करवाया..और अब वह फिर से तलाक़ देने के बाद अपने छोटे भाई यानि देवर से हलाला कराने की ज़िद कर रहा है…इस पर पीड़िता नगमा की बहन ने अदालत में अर्ज़ी देकर न्याय की गुहार लगाई है.. पीडिता की बहन ने भी अपना बयान दिया है .. जब मेरी बहन ने ‘हलाला’ की रस्म से गुजरने से इनकार कर दिया, तो उसके ससुराल वालों ने उसे जबरन इंजेक्शन लगा कर, उसके ससुर के साथ हलाला की ‘रस्म’ पूरी करवाई…अगले 10 दिनों तक, बुजुर्ग व्यक्ति ने मेरी बहन के साथ लगातार बलात्कार किया और फिर उसे ‘तीन तलाक़’ दे दिया.. ताकि वह अपने पति से दोबारा शादी कर सके..

लेकिन, जनवरी 2017 में, उसने फिर से मेरी बहन को तलाक़ दे दिया और फिर परिवार ने उसे उसके पति के छोटे भाई के साथ ‘हलाला’ से गुज़रने के लिए दबाव डालना शुरू कर दिया.. पीड़िता ने बताया कि पहली बार हलाला के बाद उसे अपनाने के बावज़ूद उसका पति उसके साथ काफी मारपीट और गाली-गलौज करता था.. पीड़िता ने सरकार से तीन तलाक़, बहुविवाह और हलाला पर कड़े क़ानून बनाने की माँग की..उसने कहा कि सख़्त क़ानून बनाने से महिलाओं पर अत्याचार कम होगा.. पीड़िता ने कहा कि वह नहीं चाहतीं कि अन्य महिलाएँ उस दर्द से गुज़रे, जो उसे मिला है… कितना अजीब है ना कि एक तरफ तो लड़कियां अन्तरिक्ष तक अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुकी हैं.. और दूसरी तरफ धर्म के नाम पर ये रीतियाँ या यूँ कहें कुरीतियाँ हर पल उनके आत्मसम्मान को चोट देती रहती हैं…धिक्कार उस समाज पर भी जिसने इन प्रथाओ को धार्मिकता का हवाला दे और उन्हें अपनाकर इस सृष्टि का सृजन करने वाली औरत पर ही अत्याचार करने शुरू कर दिए ,आप क्यूँ अपनी उसी सोच और दकियानूसी नियमों में फसे रहना चाहते हैं.. जिनका आधार अन्याय और परिणाम सिर्फ और सिर्फ बर्बादी है.