मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार का तुगलगी फरमान ‘जबरदस्ती करो नसबंदी, नहीं तो…’

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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के एक आदेश ने हडकंप मचा दिया. उनका ये अजीबो-गरीब आदेश सुनकर लोगों को इमरजेंसी की यादें ताजा हो गई. दरअसल कमलनाथ सरकार ने जनसँख्या नियंत्रण के लिए अपने अधिकारियों को एक तुगलगी फरमान सुनाते हुए कहा था कि कम से कम एक व्यक्ति की नसबंदी कराएं और अगर ऐसा नहीं होता है तो उनको जबरदस्ती वीआरएस दे दिया जाएगा और उनके वेतन में भी कटौती की जाएगी.

इस आदेश के बाद जमकर बवाल हुआ. लोगों को आपातकाल और इंदिरा सरकार की याद आ गई. जब संजय गांधी ने जनसँख्या नियंत्रण के लिए जबरदस्ती नसबंदी करवाने का फरमाना सुनाया था और लाखों लोगों की नसबंदी कर दी गई थी. भाजपा ने इस आदेश का विरोध करते हुए इअसे आपातकाल-2 बताया. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘मध्यप्रदेश में अघोषित आपातकाल है. क्या ये कांग्रेस का इमरजेंसी पार्ट-2 है? एमपीएचडब्ल्यू (Male Multi Purpose Health Workers) के प्रयास में कमी हो, तो सरकार कार्रवाई करे, लेकिन लक्ष्य पूरे नहीं होने पर वेतन रोकना और सेवानिवृत्त करने का निर्णय, तानाशाही है.’

आलोचनाओं के बाद कमलनाथ बैकफुट पर आ गए और उन्होंने इस आदेश को वापस ले लिया. मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि हम सर्कुलर को वापस ले रहे हैं. वहीं, स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सहलावत ने कहा कि राज्य सरकार ने आदेश वापस ले लिया है. हम किसी को बाध्य नहीं करेंगे और हम आदेश का अध्ययन करेंगे.