Movie Review: ‘जजमेंटल है क्या’

961

सालों बाद कंगना और राजकुमार राव की फ़िल्म जजमेंटल है क्या फाइनली रिलीस हो गयी, फंस को इस दिन का बेसब्री से इंतज़ार था. होता भी क्यों नहीं, आखिर कंगना और राजकुमार राव जैसे एक्टर्स एक साथ मूवी रोज़ रोज़ थोड़ी ही करते हैं.

वैसे रिलीस होने से पहले ये फ़िल्म पूरे वक्त विवादों में ही घिरी हुई थी. लेकिन इन्ही कॉन्ट्रोवर्सी ने इस फ़िल्म को सुर्खियों में भी बनाये रखा, वैसे आपको बता दें कि फ़िल्म को बम्पर ओपनिंग मिली है और दर्शकों को फ़िल्म काफी पसंद भी आ रहीं है.

शुरूरत करते है एक्टिंग से, दोनों ही एक्टर्स ने अपनी अबतक की सबसे बेहतरीन परफॉर्मेंसइस मे से एक, इस फ़िल्म में भी दी है. फ़िल्म में दोनों की एक्टर्स एक दूरसे को एक्टिंग के मामले में कड़ी टक्कर दे रहे हैं. कोई किसी से काम नहीं है और दोनों नहले पर दहला दे रहे हैं.

कहानी की बात की जाए तो फ़िल्म में कंगना का किरदार “बॉबी” mentally ill acute physosis से ग्रस्त है. बचपन मे माँ बाप की झगड़े में हुई मौत के बाद से ही उसे ये बीमारी हो जाती है. बीमारी का असर कुछ ऐसा होता है कि वो सच और झूठ में कोई फर्क ही नहीं पर पति है, इस बीमारी के साथ ही आते हैं कंप्लीमेंट्री पर्क्स जैसे halucinations illusions और mood swings, जो कि समय समय पर अपने रंग दिखाते रहते हैं.

मूवी में बॉबी की एक और आदत है, फ़िल्म में वो प्रोफेशन से डबिंग आर्टिस्ट हैं, इसका उनपर कुछ ऐसा असर रहता है कि वो कभी कभार खुद को वही फिलमी कैरेक्टर समझने लगती हैं. और उसी अककॉर्डिंग बर्ताव करती हैं. इसी चक्कर में वो कभी पुलिसवाली बन जाती है, तो कभी हॉरर फिल्मों की ऐक्ट्रेस.

मारपीट करने की वजह से उन्हें 3 महीने के लिए मेंटल हॉस्पिटल में भी बिताने पड़ते है उसी टाइम उसके घर में केशव यानी राजकुमार राव का करैक्टर आता है जो कि अपनी पत्नी रीमा के साथ किराए पर रहने आता है.

बॉबी को केशव पसंद आ जाता है, लेकिन केशव भी कोई कम थोड़ी न होते हैं, उनकी हरकतें बॉबी को शक में दाल देती हैं. फिर क्या बॉबी की जासूसी शुरू, उसके बाद शुरू होता है असली चैप्टर जब एक कत्ल हो जाता है. पुलिस अफसर (सतीश कौशिक) और बृजेंद्र काला को ये यकीन दिलाने की कोशिश कि जाती है कि केशव ही कातिल है,

वहीं केशव पूरा इल्ज़ाम कंगना पर डाल रहे होते हैं, केस पूरा उलझता ही जाता है और फिर कहानी एक ऐसा मोड़ लेती है जिसकी आप उम्मीद नहीं कर सकते है.

डायरेक्टर प्रकाश कोवलामुदी और स्क्रिप्ट राइटर कनिका ढिल्लन एक दमदार स्क्रिप्ट डिलीवर की है. ये फ़िल्म थ्रिलर, सस्पेंस से भरी पड़ी है, जो आपको पूरे वक्त एंगेज रखेगी. डायरेक्टर ने इस फ़िल्म में सस्पेंस बनाए रखने के साथ ही काफी वाइब्रेंट theme का इस्तेमाल किया है आम तौर पर ऐसी फिल्में काफी डार्क और shady होती हैं.फ़िल्म के गाने भी काफी अच्छे है जो मूवी के साथ फिट बैठते है, गानों के लिरिक्स लिखे हैं प्रखर और वरुण की जोड़ी ने, दोनों ही debuenats हैं लेकिन गाने क्या खूब लिखे हैं.

फ़िल्म के सेकंड हाफ में कहानी थोड़ी खिंच हुई है, लेकिन ये ट्रैक पर बरकरार रहती है. फिल्म में रामायण के किरदारों को सिंबॉलिक रूप से रिप्रेजेंट किया गया है,इससे कहानी और भी relatable लगती है.

कंगना के Mentally unstable करैक्टर के दिमाग मे चल रही बातें उनके कैरक्टर को समझने और relate करने में काफी मदद करते हैं. निर्देशक विभिन्न शक्लों का रूप देने में कामयाब रहे हैं. निर्देशक ने जिमी शेरगिल और कंगना के ट्रस्ट वाले द्रश्य के जरिए मेंटल इलनेस से पीड़ित रोगियों के प्रति मेसेज देने की कोशिश की है. बैकग्राउंड स्कोर उम्दा है, मगर कलाईमेक्स का प्रिडिक्टिबल होना थोड़ा अखरता है.

इसमें कोई दो राय नहीं कि फिल्म कंगना की है और बॉबी के किरदार की डर, बेबसी, गुस्से और पागलपन को कंगना ने जुनूनी अंदाज में निभाया है. कॉस्टूम से लेकर फेशल हाव-भाव तक वह सभी में अव्वल साबित हुई हैं. उनका अभिनय मेंटल इलनेस से पीड़ित लोगों का हाल बयान करने में सफल साबित होता है. दिलचस्प बात यह है कि राजकुमार राव कहीं भी उन्नीस साबित नहीं हुए हैं. समर्थ अभिनेता के रूप में केशव के किरदार की विविधता को उन्होंने बनाए रखा है. पहले दिन फ़िल्म को बॉक्स ऑफिस पर काफी अच्छा रेपोंसे मिला है, अनुमान है कि ये फ़िल्म पहले दिन 7 से 8 cr काम सकती है.