ऐसे ही नही लोगों के दिलों पर राज करती थीं सुषमा स्वराज, पढ़िए ये पूरी खबर

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पूर्व केन्द्रीय मंत्री, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और लाखों लोगों के दिलों पर सम्मानपूर्वक राज करने वाली सुषमा स्वराज अब हमारे बीच नही रहीं. ये उनका प्रेम ही था कि नेता भी उन्हें बहन, दीदी कहकर पुकारते थे. आम लोगों में तो उनकी छवि एक मां जैसी बनी थी. उन्होंने ना जाने कितनों को मुसीबत से बाहर निकाला. विदेशों में फंसे लोगों की स्वदेश वापसी के लिए सुषमा जी को हमेशा याद किया जाएगा. आइये हम आपको सुषमा स्वराज के उन एतिहासिक कदम के बारे में आपको बताते हैं जिनकी वजह से उन्हें पूरा हिन्दुस्तान सलाम करता है.

मसूद अजहर को अन्तर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित किया गया 

भारतीय संसद पर हमला और पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों के काफिले पर आतंकी हमले में शामिल जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी मौलाना मसूद अजहर को अंतराराष्ट्रीय आतंकी घोषित किया गया. ये सुषमा स्वराज के ही प्रयासों का नतीजा था कि बार बार अडंगा लगाने वाला चीन कुछ नही कर पाया था. 1 मई को मसूद अजहर को अन्तर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित किया गया था. आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के लिए पाकिस्तान को अलग थलग छोड़ने में भी सुषमा स्वराज का बड़ा हाथ था.

ऑपरेशन राहत से बचाए गये 4000 भारतीय 

2015 में यमन में जब हूती विद्रोहियों और सरकार के बीच दंग छिड़ गई तो वहां हजारों भारतीय फंस गये थे. उस वक्त सुषमा स्वराज ही विदेश मंत्री थी. सुषमा स्वराज ने भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए ऑपरेशन चलाया जिसे नाम दिया गया था ‘ऑपरेशन राहत’. सेना की मदद से इस खतरनाक ऑपरेशन को अंजाम दिया गया था. 11 दिन तक चले इस ऑपरेशन पर सुषमा स्वराज की नजर तब तक थी जब तक ये ऑपरेशन खत्म नही हो गया.

ईराक से 46 भारतीय नर्सों को बचाया 

ईराक के आंतकी संगठन ISIS ने 46 भारतीय नर्सों को बन्धक बना लिया था. इन नर्सों को बचाने के लिए सुषमा स्वराज ने अन्तराष्ट्रीय स्तर पर कवायद शुरू की थी और तब तक वे शांत नही बैठी थी जब तक सभी नर्सें वापस नही लौट आई. ये सुषमा स्वराज के प्रयासों का ही नतीजा था.

गीता को भारत वापस लाने में मिली सफलता 

एक लड़की जो ना बोल सकती है और ना ही सुन सकती है. 11 साल की उम्र में बॉर्डर पार कर पाकिस्तान चली गयी थी. उसके स्वदेश वापसी होने पर सुषमा जी ने सबका दिल जीत लिया था. कराची स्थित एधि फाउंडेशन में भारत के उच्चायु्त में सुषमा स्वराज की गीता से मुलाकात कराई थी. गीता की मदद करने वाले पाकिस्तानी कार्यकर्ता भारत 2012 में गीता की तस्वीर लेकर भारत आये थे. उस समय भारत सरकार की तरफ से कोई मदद नही मिली थी.

विदेशों में रहने वालों के लिए ‘माँ’ थी सुषमा स्वराज 

विदेशों में पढ़ने वाले, जॉब करने वाले लोगों के लिए सुषमा स्वराज माँ के समान देखभाल करती थी. एक ट्वीट की देरी होती थी कि उधर से सुषमा स्वराज जी का सन्देश मिल जाता था और जल्द से जल्द मदद मांगने वाले को सहायता मिल जाती थी. ट्वीटर पर अपनी सक्रियता को लेकर भी सुषमा जी खूब सुर्ख़ियों में रहीं और लोगों तक मदद पहुंचाती रहीं.

सुषमा स्वराज जी के निधन से पूरा देश स्तब्ध है, परेशान है. द चौपाल की पूरी टीम की तरफ से सुषमा स्वराज  जी को नमन