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नासा नहीं बल्कि इस स्पेस एजेंसी ने चाँद पर पानी की खोज कर बनाई दुनिया में अलग पहचान

चाँद जो धरती से बहुत ही खूबसूरत दिखाई देता है क्या आप जानते हैं कि ये आया कहाँ से है?

सुंदर चमकीले चंद्रमा को देवताओं के सामान ही पूजनीय माना गया है. चंद्रमा के जन्म की कहानी पुराणों में अलग-अलग मिलती है. ज्योतिष और वेदों में चन्द्र को मन का कारक कहा गया है. वैदिक साहित्य में सोम का स्थान भी प्रमुख देवताओं में मिलता है. अग्नि ,इंद्र ,सूर्य आदि देवों के समान ही सोम की स्तुति के मन्त्रों की भी रचना ऋषियों द्वारा की गई है.

वैसे तो चाँद की धरती पर कई देशों ने कदम रखा है. लेकिन सिर्फ कुछ मिशन ही कामयाब हो पाए हैं. सोवियत राष्ट्र का लूना-1 पहला अन्तरिक्ष यान था जो चन्द्रमा के पास से गुजरा था और लूना-2 पहला यान था जो चन्द्रमा की धरती पर उतरा था और उसके बाद तो बहुत से देशो ने चन्द्रमा पर जाने की तयारी कर ली और सन् 2008 के बाद से, जापान, चीन, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी में से प्रत्येक ने चाँद की परिक्रमा के लिए यान भेजा था. इन अंतरिक्ष अभियानों ने चंद्रमा पर जल-बर्फ की खोज में योगदान दिया है.

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अब तक 3 देशों ने चंद्रमा की अँधेरी साइड पर 20 मून मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च किए हैं. ये बहुत ही आश्चर्य की बात है कि रूस ने अंतरिक्ष की दौड़ शुरू की लेकिन वह अब तक एक भी ‘मानवयुक्त मून मिशन’ भेजने में सफल नहीं हो सका है.

चन्द्रमा पर पानी की खोज

चंद्रयान-1

चंद्रयान-1 को चन्द्रमा तक पहुँचने में 5 दिन लगे और चन्द्रमा की कक्षा में स्थापित करने में 15 दिनों का समय लग गया था. चंद्रयान ऑर्बिटर का मून इम्पैक्ट प्रोब (MIP), 14 नवंबर 2008 को चन्द्रमा की सतह पर उतरा था और भारत चंद्रमा पर अपना राष्ट्रीय झंडा लगाने वाला चौथा देश बन गया था. उम्मीद है कि भारत जल्दी ही चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अपना झंडा फहराने में सफलता प्राप्त करेगा और मानवयुक्त विमान भी भेजेगा.

चांद पर पानी की खोज भारत ने 18 नवंबर 2008 को की. 100 किलोमीटर (62 मील) की ऊंचाई पर भारत के चंद्रयान -1 से तस्वीरों को जारी किया गया था की चंद्रमा की सतह से ऊपर पतली परत है और वहाँ पानी के सबूत दर्ज किये गये हैं. 24 सितम्बर 2009 को साइंस पत्रिका ने सूचना दी कि मून मिनरलॉजी मैपर (एम 3) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के चंद्रयान -1 ADH से  चंद्रमा पर पानी का पता चला है. सितम्बर 2009 में अमेरिका के  नासा के मून मिनरलॉजी मैपर पेलोड चंद्रयान -1 पर चंद्रमा की सतह पर पानी का पता लगाया था. नवम्बर 2009 में नासा ने अपने LCROSS अंतरिक्ष से हाइड्रॉक्सिल का इस्तेमाल करके कुछ सामग्री चांद के ऊपर दक्षिणी ध्रुव पर फेंकी जिससे पानी का पता लगाया गया. सन 2010 के अंदर मिनी SAR बोर्ड पर चंद्रयान -1 से पता लगाया  गया कि एक अनुमान से  600 मीट्रिक मिलियन टन पानी बर्फ है. जब सारे अपोलो अंतरिक्ष यान चाँद से वापिस आए तब वह कुल मिलाकर 296 चट्टानों के टुकड़े लेकर आए जिनका द्रव्यमान(वजन) 382 किलो था. आज भी सभी देश चांद के ऊपर खोज कर रहे हैं और अब चांद के ऊपर जीवन संभव करने की खोज भी की जा रही है.

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चांद पर पानी का अस्तित्‍व अरसे तक एक सवाल जैसा था, लेकिन भारत के मिशन चंद्रयान से मिले आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि चांद पर हर जगह पानी मौजूद है. चंद्रयान के साथ गए अमेरिकी उपकरणों से मिले आंकड़ों के मुताबिक चांद पर पानी अपने दूसरे स्वरूप हाइड्रोक्सिल के रूप में है.

चाँद पर अपना सफल मिशन भारत ने पहली बार में ही कर लिया था. भारत वो पहला देश भी है जिसने मंगलयान को भी पहली बार में सफल किया और ये दुनिया का सबसे सस्ता स्पेस मिशन भी था. इन्ही वजह से भारतीय स्पेस एजेन्सी इसरो (ISRO) ने खुद को दुनिया की बड़ी स्पेस एजेंसियों में शामिल किया है.

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