प्रधानमंत्री मोदी के काफिले को चेक करने वाला अधिकारी इसलिए हुआ सस्पेंड

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चुनावी माहौल चल रहा है. चुनाव के बीच में कई नेता वोट पाने की लालच में वोटरों को पैसा, सामान और हां दारु बांटकर आकर्षित करने की कोशिश करते हैं. निष्पक्ष और साफ़ चुनाव कराने और वोटरों को लालच में आने से रोकने के लिए चुनाव आयोग लगातार छापेमारी कर रहा है. इस छापे मारी में चुनाव आयोग को बड़ी सफलता भी मिल रही हैं. कभी लिफ़ाफ़े में नोट पकडे जा रहे हैं तो कहीं करोडो रूपये नगदी पकडे जा रहे हैं जिनका कोई हिसाब किताब ही नही है. ऐसे में इस समय एक और खबर सामने आई कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के काफिले को भी चेक किया गया.. और काफिले को चेक करने वाले अधिकारी को चुनाव आयोग ने ससपेंड कर दिया गया है. आखिर क्यों इस अधिकारी को पीएम मोदी के काफिले की तलाशी लेने पर ससपेंड कर दिया गया… इसकी वजह हम आपको आगे बताएँगे लेकिन यहाँ आपको बताते हैं कि पूरा मामला क्या है.

दरअसल मंगलवार 16 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओडिशा के संबलपुर में चुनावी दौरा किया था और उस वक्त कर्नाटक बैच के आईएएस अफसर मोहम्मद मोहसिन संबलपुर में जनरल ऑब्जर्वर के तौर पर नियुक्त थे. उन्होंने पीएम मोदी के काफिले की तलाशी लेने की कोशिश की. इस बात को लेकर पीएमओ ने चुनाव आयोग से शिकायत की. चुनाव आयोग ने इस मामले को संज्ञान में लिए और इसके बाद चुनाव आयोग की एक टीम वहां पहुंची और पूरी जानकारी ली. इसके बाद पता चला कि अधिकारी मोहम्मद मोहसिन चुनाव आयोग के नियमों का उलंघन किया है और साथ ही यह बात भी सामने आई उन्होंने ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरती है. इसके बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया.. यहाँ आपको यह भी बताना जरुरी है कि एसपीजी सुरक्षा प्राप्त लोगों को तलाशी से छूट मिलती है। अप्रैल 2014 को चुनाव आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार एसपीजी सुरक्षा प्राप्त लोग जिसमें प्रधानमंत्री शामिल हैं उन्हें जांच से छूट मिलती है। लेकिन इस बात का ध्यान रखे बिना अधिकारी ने प्रधानमंत्री के काफिले की जांच की इस पर कार्रवाई करते हुए चुनाव आयोग ने मोहम्मद मोहसिन को सस्पेंड कर दिया है. वैसे चुनाव आयोग इस लोकसभा चुनाव में काफी सख्त नजर आ रहा है.

हाल ही में नेताओं के बयानबाजी पर कठोर एक्शन लेते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री मायावती और सपा के बड़े नेता आजम खान के प्रचार प्रसार और ट्वीट करने पर बैन लगाया था. हालाँकि इसके बाद जैसे ही बैन खत्म हुआ मायावती सोशल मीडिया के जरिये चुनाव आयोग पर बरस पड़ीं. चुनाव आयोग की कार्रवाई पर राजनीतिक आरोप लगने के बावजूद आयोग अपना काम कर रहा है और बिना पक्षपात के.. पिछले दिनों नेताओं पर हुई कार्रवाई इस बात का सबूत है.