लोकसभा चुनाव 2019 से निकल रहे है कई बड़े संदेश और संकेत

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देश में एक बार फिर मोदी की सुनामी ऐसी आई कि उसने कई क्षत्रपों के किले ढाह दिए ..हर समीकरण को झुठला दिया … इस जीत की कल्पना किसी ने नहीं की थी … आखिर ऐसी जीत की कल्पना कोई कर भी कैसे सकता था … ऐसे वक़्त में जब 5 सालों में ही जनता का मोह सरकारों से मोह भंग हो जाता है तब सत्ताधारी पार्टी ने पिछली बार से अधिक सीटें ला कर उन सब का मुंह बंद कर दिया जो पार्टी के अन्दर और पार्टी के बाहर मोदी और शाह के खिलाफ आवाज उठाया करते थे..शिवसेना जैसे उन सहयोगियों की जुबान पर भी ताला पड़ जाएगा जो चुनाव से पहले मोदी का मुखर विरोध करते थे

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इस लोकसभा चुनाव में मोदी पहले से भी ज्यादा मजबूत नेता बनकर उभरे हैं. ऐसे में लोकसभा चुनाव के इन परिणामों से कई बड़े संकेत और संदेश निकल रहे हैं. जानिए क्या हैं ये संदेश..

इस चुनावों के नतीजों के बाद मोदी पहले से अधिक मजबूत नेता बनकर उभरेंगे..मोदी तीसरे ऐसे नेता है जो पूर्ण बहुमत के साथ दोबारा वापसी कर रहे है..इससे पहले नेहरू और इंदिरा ने पूर्ण बहुमत के साथ दोबारा सत्ता में वापसी की थी..

इस जीत के बाद पार्टी के अंदर मोदी और अमित शाह सबसे ताकतवर हो गए है..ये जीत सीर्फ उन दोनों की बदौलत मिली है..पार्टी में उनके खिलाफ आवाज उठनी बंद हो जाएंगी..

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लगातार दूसरी बार पार्टी को शानदार जीत दिला कर अमित शाह ने साबित कर दिया कि उन्हें वर्तमान राजनीति का चाणक्य क्यों कहा जाता है ? उनके बूथ प्रबंधन ने सबको हैरान करके रख दिया है. ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’ महज एक स्लोगन भर नहीं रहा, बल्कि राजनीति के विद्यार्थियों के लिए यह एक अध्ययन का विषय हो गया है…. जहाँ जहाँ उन्हें लगा पार्टी को नुक्सान हो सकता है वहां उन्होंने उम्मीदवार बदलने और टिकट काटने में भी संकोच नहीं किया . अमित शाह का चुनाव प्रबंधन , मैनेजमेंट कॉलेजों में रिसर्च का विषय होना चाहिए

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को आत्ममंथन कर खुद को नए सिरे से तैयार करने की जरूरत पड़ेगी. राजनीति की जमीन पर उनकी लव-पॉलिटिक्स कहीं नहीं ठहरी..लव- पॉलिटिक्स मतलब राहुल गांधी अपने हर भाषण में कहते थे..मोदी मुझे जितना नफरत देंगे..मै उन्हें उतना ही प्यार दूंगा..

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कांग्रेस महासचिव के तौर पर राजनीति में उतरने वालीं प्रियंका गांधी का उत्तर प्रदेश में जादू नहीं चला. इससे साफ पत्ता चलता है जनता का मोह अब परिवारवाद से भंग हो चुका है..और ऐसे में जनता उन्हें वोट देती है जो परिवारवाद से अलग हट कर काम करती है..

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राजनीति में खुद को बनाए रखने के लिए कांग्रेस को अब गंभीर हो कर सोचना पड़ेगा कि लगातार जनता द्वारा नकारे जाने के बावजूद कब तक देश की सबसे पुरानी पार्टी एक परिवार को ढोती रहेगी … कांग्रेस अब विकल्प तलाशने होंगे जो मोदी-शाह की जोड़ी का मुकाबला कार सके और संगठन को खड़ा कर सके

दिल्ली के रुझान बता रहे हैं कि बीजेपी 7- 0 के साथ क्लीन स्वीप करने जा रही है. चुनाव से पहले तमाम कोशिशों के बावजूद आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन भी नहीं हो सका, सभी सातों सीटें बीजेपी को जा रहीं हैं….

बिहार में गठबंधन पूरी तरह से फेल होता दिख रहा है..एनडीए बिहार में सबसे मजबूती से उभर रही है..वहीं गठबंधन को मात्र एक या दो सीटे मिलने की संभावना है.. अमित शाह समय को भांप लेने वाले राजनेता है . जिस तरह से उन्होंने बिहार में रूठे नितीश को और महाराष्ट्र में रूठे उद्धव को मनाया वो उनके पक्ष में गया .

मोदी की वापसी से शेयर बाज़ार झूम उठा .सेंसेक्स में उछाल जारी है. पहली बार सेंसेक्स 40 हजार अंकों के पार गया है. बाजार और उद्योग ने भी रुझान को सकारात्मक लेते हुए स्थिरता के संकेत दिए हैं.