राहुल या मोदी कौन पहले लायेगा न्यूनतम आय बजट ?

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सत्ता में आने के लिए लोग क्या क्या दांव नहीं खेलते हैं.. अब देखिये ना राहुल गाँधी ने “न्यूनतम आय गारंटी” का क्या जबरदस्त पासा फेंका हैं.. बिलकुल वैसे ही जैसे किसान कर्ज माफ़ी का वादा किया था विधानसभा में आने से पहले.

अब खबर यह है कि मोदी सरकार न्यूनतम आय गारंटी का एलान अंतरिम बजट में करने वाली थी.. तो क्या राहुल गाँधी ने वो बजट पढ़ लिया है?? और क्या है न्यूनतम आय बजट?? क्या देश की अर्थव्यवस्था यह बोझ उठाने में सक्षम है?? और वो क्या क्या चुनौतियां है जो इसे लागू करने में सामने आयेंगी.

पहले तो यह जान लेते हैं कि “यूनिवर्सल बेसिक इनकम” है क्या ??

लन्दन यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर गाए स्टैंडिंग ने गरीबी हटाने के लिए अमीर और गरीब सभी को एक तय रकम देने का विचार पेश किया. उनके मुताबिक यह स्कीम सभी के लिए हो जिसका फायदा लेने के लिए किसी को अपनी कमजोर आर्थिक या सामाजिक स्थिति या बेरोजगारी का सबूत ना देना पड़े.

भारत में यूनिवर्सल बेसिक इनकम की चर्चा कबसे होनी शुरू हुई??

नवभारत टाइम्स ने 2017 में जेनेवा से ही प्रोफ़ेसर गाए स्टैंडिंग का एक इंटरव्यू लिया था जिसमे उन्होंने बताया कि कांग्रेस के शासन के दौरान भी इस स्कीम के बारे में सरकार ने उनसे संपर्क किया था, लेकिन तब सरकार इसे लागू करने की हिम्मत नहीं कर सकी थी।

उसके बाद 2016-17 के आर्थिक सर्वे में मोदी सरकार ने यूबीआई का जिक्र किया, जिसमे उन्होंने 40 पेज की एक रिपोर्ट तैयार की और बताया कि ubi स्कीम भारत में व्याप्त गरीबी का एक संभव समाधान हो सकता है.  

2018 के बजट में यूबीआई के ऐलान को लेकर खुद प्रफेसर गाय स्टैंडिंग ने इंटरव्यू में दावा किया था कि मोदी सरकार से जुड़े एक जिम्मेदार शख्स ने कन्फर्म किया कि बजट में इसकी घोषणा मुमकिन है जिसके बारे में नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविन्द पनगढ़िया ने मुझसे बात की थी और जानकारी दी।’ लेकिन तब बजट में इसका ऐलान नहीं हुआ। 

इस बार ऐलान कितनी संभावना?

 
इस बार मोदी सरकार अपने मौजूदा कार्यकाल का आखिरी बजट पेश करने जा रही है। लोकसभा चुनाव के बेहद नजदीक होने के कारण यूबीआई जैसी लोकलुभावन घोषणा की उम्मीद पहले से ही की जा रही थी, लेकिन जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ की किसान रैली में कांग्रेस की जीत के बाद ‘मिनिमम गारंटी इनकम’ स्कीम लागू करने का ऐलान किया तो यकीन होने लगा है कि 1 फरवरी के बजट में इसका ऐलान होना लगभग तय है। दरअसल, कयास यह लगाए जा रहे हैं कि राहुल गांधी ने ‘मिनिमम गारंटी इनकम’ का ऐलान किया ही इसलिए क्योंकि उन्हें इस बजट में इसकी घोषणा की भनक मिल गई। 

तो क्या यह योजना लागू हो गई तो सबके खातों में पैसा जायेगा??

जब 2016-17 का आर्थिक सर्वे हुआ था.. तब उसका निष्कर्ष यह निकला था कि देश के प्रत्येक व्यक्ति को लाभ पहुंचाने वाली योजना सफल नहीं हो सकती तो फिर योजना को लागू करने के लिए कुछ उपाय सुझाए गए थे जैसे..

पहला-  गरीबी रेखा से नीचे की 75 प्रतिशत आबादी को ही यूबीआई के दायरे में लाया जाए। 


दूसरा- सिर्फ महिलाओं को इसके दायरे में लाया जाए क्योंकि महिलाओं को रोजगार के अवसर, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पैसों के मामले में हमेशा पिछड़ेपन का सामना करना पड़ता है और ऐसा करने पर आबादी का आधा हिस्सा यूबीआई के दायरे में आएगा। सर्वे में यह भी कहा गया था कि महिलाओं के हाथ में पैसे गए तो उनके दुरुपयोग की आशंका भी नहीं के बराबर रहेगी। 

तीसरा- शुरुआत में यूबीआई स्कीम का लाभ विधवाओं, गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ वृद्ध एवं बीमार आबादी को दिया जा सकता है। 

तो यह थे वो उपाय जो UBI लागू करने में सहायक होंगे


अब बात करते हैं, क्या हमारी अर्थव्यवस्था UBI के लिए सक्षम है? 


प्रोफेसर गाय स्टैंडिंग के मुताबिक भारत में ‘यूनिवर्सल बेसिक इनकम’ स्कीम को लागू करने पर जीडीपी का 3 से 4 फीसदी खर्च आएगा जबकि अभी कुल जीडीपी का 4 से 5 फीसदी सरकार सब्सिडी में खर्च कर रही है।

जीडीपी क्या होती है ? GDP – ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट यानि राज्य कि वो आय जो राज्य के अन्दर बन रहे उत्पादों की खरीद बेच से उत्पन्न होती है.

गरीबी से उबारने के लिए 7,620 करोड़ के सालाना इनकम या यूबीआई की जरूरत बताई गई थी।

तो क्या हट जाएगी सब्सिडी?

प्रोफेसर स्टैंडिंग के मुताबिक, यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम और सब्सिडी दोनों का साथ-साथ चलना ठीक नहीं है। यानी, एक वक्त के बाद सब्सिडी पूरी तरह खत्म हो सकती है और इसकी जगह निश्चित रकम सीधे लोगों के खाते में जाती रहेगी।

यकीनन.. न्यूनतम आय गारंटी को हिन्दुस्तान में लागू करना बहुत बड़ी चुनौती होगी.. तो देखते हैं राहुल का फेंका यह पासा उनके काम आता है.. या उससे पहले बीजेपी ही इसे इस बार के बजट में ले आती है जिसपर वो लम्बे समय से विचार कर रही है