नये लोकसभा अध्यक्ष को लेकर मोदी शाह ने एक बार फिर चौंकाया!

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संसद का कार्यकाल शुरू होने के बाद इस बात की खूब चर्चा की जा रही थी कि लोकसभा का स्पीकर कौन होगा? किसे इस बार लोकसभा का स्पीकर बनाया जाएगा? इस रेस में कई नेताओं का नाम शामिल था लेकिन जिस नाम पर फैसला हुआ वो सबको हैरान कर दिया है. आपको बता दें कि लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव पर सबकी नजरें टिकी हुई थी. क्योंकि सदन का सत्र शुरू हो चूका है. लेकिन अब लोकसभा अध्यक्ष के नाम पर मुहर लग चुकी है. राजस्थान के कोटा से बीजेपी सांसद ओम बिड़ला लोकसभा के नए स्पीकर होंगे. लोकसभा अध्यक्ष का नाम घोषित किए जाने के साथ ही पीएम मोदी ने एक बार फिर अपने फैसले से सबको चौंका दिया है. ओम बिड़ला की पत्नी अमिता बिड़ला ने कहा कि यह हमारे लिए बहुत गर्व और खुशी का क्षण है. हम उन्हें (ओम बिड़ला को) चुनने के लिए कैबिनेट के बहुत आभारी हैं.


यहाँ आपको बता दें कि ओम बिड़ला का नाम इससे पहले राष्ट्रीय राजनीति में कभी सुर्खियों में नहीं रहा. लोकसभा अध्यक्ष के लिए बिड़ला का नाम तय कर मोदी और शाह की जोड़ी ने फिर से चौंकाया है. सिर्फ दो बार के सांसद ओम बिड़ला को लोकसभा का अध्यक्ष बनाकर बीजेपी ने संदेश दिया है कि अहम पदों के लिए सिर्फ अनुभव ही नहीं और भी समीकरण मायने रखते हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने बीजेपी संसदीय दल की बैठक में जब गुणवत्ता, निपुणता और तत्परता पर सबसे अधिक फोकस करने की बात कही थी, इसी के साथ यह भी कहा था कि वरिष्ठता ही जिम्मेदारी सौंपने का एकमात्र पैमाना नही है. वैश्य बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले सिर्फ दो बार के सांसद ओम बिड़ला को लोकसभा अध्यक्ष बनाने के पीछे की वजह लोग तलाशने में जुटे हैं. ओम बिड़ला के कम अनुभव के सवाल पर कहा जा रहा है कि वह राजस्थान सरकार में संसदीय सचिव रहे हैं. इस दौरान उनकी पहल को सराहा गया था. कई संसदीय समितियों के भी हिस्सा रहे हैं. बड़े नेताओं से सपर्क अच्छा है और उर्जावान नेता माने जाते हैं. ओम बिड़ला ने गरीबों की मदद के कई काम किये हैं. बाढ़ पीड़ितों, रोगियों और सरकारी अधिकारिओं की मदद के लिए काफी प्रसिद्ध हैं.


केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी के मुताबिक़ प्रधानमंत्री मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष के लिए ओम बिड़ला के नाम का प्रस्ताव रखा. इसके आगे बताया गया कि 10 पार्टियों का समर्थन भी प्राप्त हुआ है. बीजू जनता दल (बीजद), शिवसेना, नेशनल पीपुल्स पार्टी, मिजो नेशनल फ्रंट, अकाली दल, लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा), वाईएसआर कांग्रेस, जदयू, अन्नाद्रमुक और अपना दल ने बिड़ला का समर्थन किया है. हालाँकि कांग्रेस की तरफ से सहमती पत्र पर हस्ताक्षर नही किया गया है लेकिन वो विरोध भी नही करगी. बीजेपी सांसद ओम बिड़ला ने वर्किंग प्रेसिडेंट जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद कहा कि मुझे कोई जानकारी नहीं है, मैं सिर्फ एक कार्यकर्ता के रूप में मिलने गया था।
हालाँकि आपको जानकर हैरानी होगी कि लोकसभा स्पीकर बनने की रेस में कई बड़े नेताओं का नाम शामिल था. इस रेस में मेनका गांधी, राधामोहन सिंह, रमापति राम त्रिपाठी, एसएस अहलुवालिया और डॉ. वीरेंद्र कुमार जैसे कई दिग्गज नेताओं के नाम शामिल बताए जा रहे थे. लेकिन जब नाम सामने आया तो ये सबको चौकाने वाला था. हम इसे मोदी सरकार के सबसे चौकाने वाले फैसलों में से एक मान सकते हैं.
चाहे एस जयशंकर को विदेश मंत्री बनाना हो, राज्यसभा का उपसभापति का चुनाव हो या फिर राष्ट्रपति चुनाव के लिए नाम की घोषणा हो.. ऐसे ना जाने कितने मौके आये हैं जो मोदी और बीजेपी के फैसलों ने सबकों चौंका दिया है.


कौन है ओम बिडला
ओम बिड़ला को साल 2014 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ने का मौका मिला। उस वक्त उन्होंने कांग्रेस के इज्याराज सिंह को 2 लाख से ज्यादा मतों के अंतर से हराया था। साल 2019 के आम चुनाव में भी पार्टी ने उन पर भरोसा जताया और वे कांग्रेस के रामनारायण मीणा को हराकर संसद पहुंचे। ओम बिड़ला के परिवार में पत्नी, दो बेटे और दो बेटियां भी हैं। बता दें कि ओम बिड़ला की पहचान राजनीति के माध्यम से जनसेवा करने वाले नेता की है।
अब आपको बताते हैं बिड़ला को स्पीकर और लोकसभा अध्यक्ष बनाए जाने के पीछे की काहानी… दो बार सांसद और तीन बार विधायक रह चुके हैं. अमित शाह और बड़े नेताओं के साथ नजदीकी भी हैं. राजस्थान बीजेपी के लिए कई सालों से काम कर रह हैं और बीजेपी में सुधार के लिए भी काम करते रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा का प्रतिनिधत्व भी कर चुके हैं. ओम बिड़ला कुपोषण, गरीबी और आदिवासियों के लिए किये कामों के लिए जाने जाते हैं. राजस्थान में लाखों पेड़ लगाने का अभियान चला चुके हैं. समाजिक कामों में अधिक रूचि लेने वाले ओम बिड़ला अपने अच्छे कामों के लिए विख्स्यात हैं. इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि जिम्मेदारी के लिए वरिष्ठता कोई पैमाना नही होती है. अब उन्होंने एक ऐसे नेता को चुना है जो आम तौर पर मीडिया की सुर्ख़ियों से दूर अपने क्षेत्र के लोगों के लिए काम करता रहा है. मतलब इसके जरिये एक सन्देश देने की कोशिश भी की गयी है कि मोदी सरकार और बीजेपी की नजर अपने हर कार्यकर्ताओं पर है जो समाज के लिए काम कर रहे हैं.