मोदी सरकार की इस पहल से अब नही डूबेगा आम जनता का पैसा।

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आपने अपनी गली मोहल्ले में ऐसे कई लोगो को देखा होगा जो पैसा डबल करने का लालच देकर कमेटी डलवाते है जिसमे कुछ टाइम तो सही पैसा मिलता है।लेकिन एक दिन पैसा लेकर भागने की ख़बर भी देखने और सुनने को मिल जाती है।
इस देश मे ना जाने कितने ऐसे मामले हुए है जब आम जनता का पैसा डूबा है। अभी आप बंगाल में सीबीआई और ममता बनर्जी के बीच चल रही जो खींचतान देख रहे है उसके तार भी उसी चिटफंड घोटाले से जुड़े है।
जिसमे सीबीआई घोटाले की जांच करने वाले अधिकारी से पूछताछ करना चाहती है और ममता उसकी पैरवी कर रही है। 

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शारदा चिट फंड घोटाला हो या रोज वैली घोटाला ये तो वो घोटाले रहे जिनका पता देश को लग गया पर इसके अलावा भी कंपनी द्वारा पब्लिक की इन्वेस्ट रकम लेकर भागने जैसे कितने ही ऐसे केस हमारे देश मे हर महीने दो महीने में सामने आते रहते है। सिर्फ 2015 से 2018 के बीच ही ऐसे 166 मामले सामने आ चुके है जिनपर सीबीआई जांच कर रही है।

लेकिन अब ऐसा नही हो पाएगा क्योकि जनता की गाढ़ी कमाई को बचाने के लिए मोदी सरकार ने कमर कस ली है। सरकार ने अनरेगुलटेड डिपाजिट स्कीम्स पर प्रतिबंध बिल 2018 में संशोधन को अपनी मंजूरी दे दी है। अब ये बिल लोकसभा और राज्यसभा जाएगा जहां से पारित होने के बाद ये लागू हो जाएगा।


इस संशोधन में होगा ये की अब जो भी चिट फंड की स्कीम्स पंजीकृत नही होगी यानी उनका रजिस्ट्रेशन नही हुआ होगा वो अवैध मानी जाएगी। अगर कोई बिना रजिस्ट्रेशन के ऐसी स्कीम्स को चलाता पकड़ा जाएगा तो उसकी संपत्ति को जब्त करने का प्रावधान किया गया है।

इस बिल में क्या ख़ास होगा आइए मोटी मोटी निगाह उपसपर भी डाल लेते है।
1) अवैध तरीके से डिपॉजिट लेने पर पूरी तरह से बैन
2) कोई अवैध तरीके से डिपॉजिट स्कीम्स चलाएगा तो उसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है।
3) जो निवेशकों को उनका पैसा नही लौटाएगा सको कड़ी सजा दी जाएगी,ऐसा सरकार कह रही है।
4) राज्य सरकार एक इस संस्था बनाएगी जो डिपॉजिट लेने वाली कंपनी के डिफॉल्ट होने के बाद निवेशकों के पैसे लौटाना सुनिश्चित करेगी।
5) एक निश्चित समय मे निवेशकों के पैसे लेकर भागने वाली कंपनी के मालिक की प्रोपर्टी जब्त होगी।
इसके अलावा इस बिल की कुछ खास भी है।

चिट बिजनेस के लिए फ्रेटरनिटी फंड शब्द का उपयोग।
चिट फंड ड्रा के लिए कम से कम 2 मेंबर होने जरूरी ।
फोरमैन का कमीशन 5 से बढ़ाकर 7 प्रतिशत होगा।
चिट फंड के लिए 100 रुपए की सीमा हटेगी और नई सीमा तय करने का अधिकार राज्य सरकार तय करेंगे।

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए साफ साफ शब्दो मे कह दिया है कि जो भी डिपॉजिट स्कीम्स रेगुलेटेड नही है तो उनको अवैध माना जाएगा और अगर कोई चोरीछिपे ऐसा करता है तो संचालनकर्ता की संपत्ति को बेचकर इन्वेस्ट करने लोगो को उनका पूरा पैसा सरकार लौटा देगी। इसके अलावा कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति किसी बड़ी हस्ती से अपनी गैर रजिस्टर्ड कम्पनी का प्रचार करवाता है तो भी करवाई की जा सकती है.

कह सकते है कि लोगो को ठगने वालो की मरहम पट्टी में सरकार का ये बिल अहम भूमिका निभाएगा और आम जनता की खून पसीने की गाढ़ी कमाई सुरक्षित रहेगी।