सुषमा स्वराज का पा’र्थिव शरीर देखकर प्रधानमंत्री मोदी और लालकृष्ण आडवाणी की आंखों से छलके आंसू

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बीजेपी की वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज हमारे बीच नही रही. सुषमा स्वराज का मंगलवार देर रात को एम्स हॉस्पिटल में निधन हो गया. सुषमा स्वराज के यू अचानक निधन से पूरा देश गम में डूबा है. श्रद्धांजलि देने के लिए दिल्ली के जंतर-मंतर स्थित उनके घर पर तांता लगा हुआ है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के साथ तमाम नेताओ ने सुषमा के आवास पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी. सुषमा स्वराज का अंतिम संस्कार 3 बजे लोधी घाट स्थित शमशान घाट पर किया जाएगा.

विरोधी दलों के नेता भी उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे. समाजवादी पार्टी नेता रामगोपाल यादव तो सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि देते हुए बेहद भावुक हो गए और रोने लगे. अपनी पूर्व सहयोगी का पा’र्थिव शरीर देखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेहद भावुक हो गए और उनकी आंखें छलक आई. प्रधानमंत्री ने बेहद गमगीन माहौल में सुषमा की बेटी बांसुरी स्वराज के सिर पर हाथ फेर कर उनको सांत्वना दी. प्रधानमंत्री मोदी के बाद बीजेपी के वरिष्ण नेता लालकृष्ण आडवाणी अपनी बेटी प्रतिभा आडवाणी के साथ सुषमा को श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे. लालकृष्ण आडवाणी सुषमा के पा’र्थिव शरीर को कुछ देर तक शांत खड़े निहारते रहे. इस दौरान उनकी बेटी प्रतिभा पास ही खड़ीं सुषमा की बेटी बांसुरी से गले लगकर रोने लगीं.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करके ट्वीट कर कहा कि, भारतीय राजनीति में एक गौरवशाली अध्याय का अंत हो गया है. भारत एक असाधारण नेता के निधन से शोकसंतप्त है, जिन्होंने जनसेवा और निर्धनों के जीवन में सुधार के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया. सुषमा जी अपने आप में अलग थीं और करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत थीं.

मोदी ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर स्वराज को असाधारण वक्ता और उत्कृष्ट सांसद बताया साथ ही कहा कि सभी राजनीतिक दलों के लोग उनकी तारीफ करते थे और उनका सम्मान करते थे. पीएम मोदी ने कहा, ‘जब बात विचारधारा की आती थी या फिर बीजेपी के हितों की आती थी तो वह किसी प्रकार का समझौता नहीं करती थीं, जिसे आगे ले जाने में उनका बहुत योगदान था.’ उन्होंने कहा,’एक उत्कृष्ट प्रशासक, सुषमा जी ने जो भी मंत्रालय संभाला, उसमें उच्च मानक स्थापित किए. उन्होंने विभिन्न देशों के साथ भारत के संबंधों को सुधारने में अहम भूमिका निभाई. एक मंत्री के तौर पर हमने उनका करुणामय पक्ष भी देखा जो विश्व के किसी भी कोने में परेशान भारतीय की मदद करता था.’