राहुल गांधी का किला ढहाने की पूरी पूरी तैयारी कर रही है बीजेपी

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देश तरक्की पर है,कुछ खामियों के बावजूद लगातार आगे भी बढ़ रहा है। विपक्षी भी दबे सुर में इस बात को मान ही रहे है कि मोदी सरकार बढ़िया काम कर रही है और वो नरेंद्र मोदी को ही पीएम के तौर पर देखना चाहते है.
ख़ैर इन सबके बीच ही मोदी सरकार ने एक ऐसी सियासी चाल चली है जिसकी चपेट में राहुल गांधी का पूरा किला आएगा।
अब आप कहेंगे की मैं पहेली क्यो बुझा रहा हूं। ह्म्म्म,चलो सस्पेंस खत्म करते हुए आपको सीधे मुद्दे पर लेक्रर आते है.

दरअसल सरकार ने 7 लाख 47 हजार कलाश्रीकोव राइफल्स बनाने के लिए रूस को अपने घर मे बुलाया है। अब इससे राहुल गांधी को क्या नुकसान होगा,कैसे उनके ससंदीय क्षेत्र मे बीजेपी सेंध लगाएगी। आइए आपको यही बताते है।दरअसल मेक इन इंडिया के तहत इन राइफल्स को बनाने के लिए कांग्रेस मुखिया राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी को चुना गया है  इसके लिए वहां एक बड़ा प्लांट लगाया जाएगा। 

सेना को मजबूत बनाने की बात मोदी सरकार शुरू से ही कहती आई है और सेना को जैकेट्स,गोला बारूद दिलाकर दिलाकर मोदी सरकार ने अपना ये दावा पुख्ता भी किया है। इसी कड़ी में अब ये नया फैसला लिया गया है। सरकार के इस कदम पर कहा जा रहा है इस फैसले के जरिए सरकार ने एक तीर से दो निशाने लगाए है ।

दोनो देशो की सरकारों के बीच होने वाले इस करार के तहत रूस की कलाश्रीकोव कर्सन और भारत का आर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड मिलकर ak-47 की तीसरी पीढ़ी यानी ak-203 राइफल्स तैयार करेगी।

इसको लेकर दोनो देशो की सरकारे आपस मे पहले ही बतिया चुकी है अब बस कागजो का थोड़ा सा काम रह रहा जो पूरा होते ही राइफल्स की कीमतें पता लग जाएगी और उसमें कितना टाइम लगेगा ये सब भी इसमें पता लग जाएगा।


मेक इन इंडिया के तहत हो रहे इस सौदे में भारत सरकार के पास 50.5 शेयर रहेगा जबकि रूस को कह दिया गया है कि 49.5 शेयर आप रखिए।
सरकार ने पिछले हफ्ते भी अमेरिका के साथ 72 हजार 400 एमएम राइफलों की डील फाइनल की है। जो अगले साल तक भारतीय सेना को मिल जाएगी। 
अब थोड़ा बात वहां की करते है जहां ये लगने वाला है।अमेठी में यूँ तो पिछले पंद्रह साल से राहुल गांधी ही सांसद है। राहुल भले ही सरकार को रोजगार ना देने के चलते गरियाते दिखाई पड़ते हो लेकिन उनके अपने ही क्षेत्र में बेरोजगारी अपने चरम पर है। लोग काम के लिए इधर उधर भटक रहे है। अभी बीते दिनों राहुल के क्षेत्र में ही राहुल गांधी मुर्दाबाद के नारे भी सुनने को मिले थे।  (बाइट)

2014 के लोकसभा चुनाव में राहुल को बीजेपी उम्मीदवार स्मृति ईरानी ने उन्हें कड़ी टक्कर दी थी। पिछले दो चुनावो में जहां राहुल अपने निकटतम उम्मीदवार को तीन लाख वोट से हराने में सफल रहे थे वही स्मृति ईरानी को वो मात्र 70 हजार के नजदीकी अंतर से ही हरा पाए थे। हार मिलने बाद भी स्मृति ने अमेठी का दामन नही छोड़ा और वहां के लोगो के सुख दुख में भागीदार बनती रही। ये सब देखकर लग रहा है स्मृति ईरानी 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल को बख्शने के मूड में बिल्कुल नही है।

अमेठी में प्लांट लगने से सेना को हथियार तो मिलेंगे वही अमेठी के बेरोजगार घूम रहे हजारो युवकों को भी रोजगार मिल जायेगा।  जिसका फायदा बीजेपी को आने वाले चुनाव में भी मिल सकता है।

देखो भाई हम तो यही कहेंगे की ही इस मामले में केंद्र सरकार ने चालाकी दिखाई हो लेकिन इसी चालाकी की बदौलत काफी युवकों को रोजगार भी मिलेगा। सेना को हथियार भी मिलेगा।
बाकी हाउस फुल मूवी का एक डायलॉग है कि जिस झूठ से किसी का भला होता हो वो झूठ झूठ नही होता। वैसे यहां बीजेपी ने कोई झूठ तो नही बोला पर जो तिकड़म उसने यहां भिड़ाई है उसपर विपक्षी भले ही सवाल उठाए लेकिन वो कोई गलत नही है क्योकि उससे काफी लोगो को फायदा पहुँचेगा,जो देश के लिहाज से काफी बढ़िया भी है।