मोदी सरकार ने इस फ़ैसले के जरिए रख दी राम मंदिर की नींव ??

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हम सालो से ये सुनते आ रहे है कि मंदिर आज बनेगा,कल बनेगा,अगले साल बनेगा लेकिन बस हम सुनते ही रहे और मंदिर निर्माण नही हुआ । इसे सत्ता में बैठी सरकारों की तरफ से कोशिश ना करना कहे,विपक्ष की तरफ से रोड़ा अटकाने कहे या फिर सुप्रीम कोर्ट की तरफ से हो रही देरी,कारण कुछ भी रहा हो पर मंदिर आज तक नही बन सका है।

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामला पेंडिंग होने के चलते अपने हाथ मसोस कर बैठी मोदी सरकार ने आख़िरकार लोकसभा चुनाव से ठीक पहले राम मंदिर मामले पर मास्टरस्ट्रोक चल दिया है और मास्टरस्ट्रोक भी ऐसा की अब विरोधियों के लिए इसकी काट ढूंढना बेहद मुश्किल है। 
दरअसल मोदी सरकार ने विवादित राम मंदिर- बाबरी मस्जिद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल करते हुए कहा कि जो जमीन विवादित नही है उस भूमि को उसके वास्तुविक हकदारों को सौंप दी जाए।और बाकी की जमीन पर कोर्ट सुनवाई करे।


यहां आपके लिए ये जानना बहुत ज़रूरी है कि वहां सारी ज़मीन 70.47 एकड़ है जिसमे से 2.77 एकड़ जमीन विवादित है और उसमे से 0.313 एकड़ पर रामलला विराजमान है।
लगभग 67 एकड़ ज़मीन ऐसी है जो गैर विवादित है यानी उसपर कोई झगड़ा नही है।ये ज़मीन रामजन्मभूमि न्यास की है और अगर सुप्रीम कोर्ट मोदी सरकार की इस मांग पर राजी हो जाती है तो आने वाले कुछ दिनों में ही राम मंदिर निर्माण शुरू हो सकता है।
रामजन्म न्यास के अध्यक्ष राम विलास वेदांती सरकार के इस कदम से बेहद खुश है और उन्हें उम्मीद है कि सरकार के इस कदम से वो बहुत खुश है।

कोर्ट के चक्कर काटने की शायद ज़रूरत भी ना पड़ती पर 1993 में केंद्र की कांग्रेस सरकार ने अयोध्या अधिग्रहण एक्ट के तहत विवादित स्थल और आसपास की सभी जमीनों का अधिग्रहण कर लिया था जिसके बाद कोर्ट ने ये सारी ज़मीन केंद्र सरकार को अपने पास ही रखने की बात करते हुए कहा था कि जिसके भी पक्ष में फैसला आएगा उसको ही ये ज़मीन दे दी जाएगी। इस फैसले को चुनौती देते हुए  सुन्नी वक्फ बोर्ड,निर्मोही अखाड़ा और राम जन्मभूमि न्यास कोर्ट पहुँच गए और 30 सितंबर 2010 को हाईकोर्ट ने 2.77 की विवादित ज़मीन को तीन पक्षो में बराबर बांटने का आदेश दे दिया लेकिन उसके फैसले को किसी ने भी नही माना और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दी और तब से ही ये मामला कोर्ट में पेंडिंग है।

अब मोदी सरकार ने इस मुद्दे को फिर से उठाया है,सरकार की तरफ से की गई इस पहल से राम मंदिर के बनने की सम्भावनाओ को बल मिला है। देखते है ये कोशिशें चुनावी है या फिर हकीकत से भी इनका कोई सरोकार है। देखना होगा सरकार और विपक्ष राम मंदिर मुद्दे को कहाँ तक लेकर जाएंगे। फिलहाल ख़बर बस इतनी थी जिसको आपको बताना बहुत ज़रूरी था।