कोरोना की वजह से चीन बन गया अछूत, मोदी सरकार ने चीन को झटका देने के लिए बनाया मास्टरप्लान

2021

कोरोना वायरस ने न सिर्फ दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को चोट पहुंचाई है बल्कि दुनिया भर में इस वायरस ने चीन की विश्वसनीयता को भी कोट पहुंचाई है. इस वायरस के बारे में जिस तरह से चीन ने दुनिया को अँधेरे में रखा और फिर मदद के नाम पर घटिया मेडिकल सप्लाई भेजी उससे हर देश की नज़र चीन पर टेढ़ी है. ऐसे में कई कम्पनियाँ जिनका प्रोडक्शन बेस चीन में है, वहां से निकलना चाह रही है. चीन में प्रोडक्शन कॉस्ट बहुत ही सस्ता पड़ता है जिस वजह से चीन दुनिया भर की कंपनियों का पसंदीदा ठिकाना रहा है. लेकिन अब बदलते हालात में कंपनी चीन से निकलना चाह रही हैं. ऐसी कंपनियों पर भारत की नज़र है. प्रोडक्शन कॉस्ट और मैन पावर की दृष्टि से भारत भी एक सस्ता देश है. मोदी सरकार ने अब चीन से निकलने की तैयारी कर रही कंपनियों के लिए रेड कारपेट बिछा दिया है.

चीन से बाहर आ रही कंपनियों को भारत बुलाने के लिए पीएम मोदी ने एक मास्टर प्लान बनाया है. उन्होंने इशारा भी कर दिया है कि वे इस दिशा में इनवेस्‍टमेंट्स करने को तैयार हैं. इस वक़्त मोदी सरकार चीन से आने वाली कंपनियों के लिए जिस प्लान पर काम कर रहे हैं वो है ‘प्‍लग एंड प्‍ले’ मॉडल. इसके जरिए इनवेस्‍टर्स अच्‍छी जगहों को आइडेंटिफाई करते हैं और फिर तेजी से अपना प्‍लांट वहां लगा देते हैं.

ऐसी कंपनियों को कोई दिक्कत न हो इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिल कर सिंगल विंडो ओलां तैयार करने में जुटी है ताकि इन्वेस्टर्स को भटकना न पड़े. एक ही जगह से उनके सारे क्लेअरेंस हो जाएँ. कंपनियों को लुभाने के लिए और उनकी सुविधाओं के लिए और स्पेशल इकोनोमिक जोन (SEZ) बनाने की तैयारियां की जा रही है. पीएम मोदी की योजना है कि राज्य की खूबियों के हिसाब से इन्वेस्टमेंट जुटाया जाए. जैसे नोएडा और ग्रेटर नोएडा इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों का बेस बने जबकि हिमाचल और उत्तराखंड की पकड़ फार्मा पर है तो वहां फार्मा कंपनियों के लिए इन्वेस्टमेंट जुटाया जाए. जिस तरह से कोरोना के संकट के वक़्त भारत ने दुनिया भर के देशों को दवाइयां सप्लाई की है. उसे देखते हुए पीएम मोदी की ख्वाहिश है कि भारत ड्रग्स हब बने. अगर भारत सरकार की योजना परवान चढ़ती है तो चीन के लिए इससे बड़ा झटका और कुछ नहीं होगा.