बोझिल अधिकारियों के खिलाफ मोदी सरकार लेने जा रही है कड़ा एक्शन

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इस चुनावी मौसम के बीच मोदी सरकार फुल फॉर्म में है,पहले जवानों को शहीद होने से बचाने के लिए करोड़ो का बजट मंजूर किया और अब सरकारी क्षेत्र में नौकरी कर रहें “बोझिल अधिकारियों” को बाहर करने की बड़ी बात कह दी। सरकार को तरफ से साफ किया गया है कि वो देश को करप्शन के दंश से मुक्त कराने के लिए ये कदम उठा रही है.

केंद्र सरकार को तरफ से साफ कर दिया गया कि वो भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1100अधिकारियों के पिछले पांच साल के सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा करके ये पता लगाएगी की सिस्टम के ऊपर कौन से अधिकारी बोझ बन हुए हैं। इसके लिए सरकार की तरफ से कुछ मानक बनाये गए हैं यानी जिन अधिकारियो को नौकरी करते करते 25 बरस बीत चुके हैं या वो उम्र में 50 का आंकड़ा पार कर चुके हैं। ऐसे 1143 अधिकारियो के 2015 से 2018 के बीच किए गए कामों को देखा जाएगा और जिसने पिछले चार सालों में ढंग से काम नही किया होगा उनको रिटायरमेंट के लिए बोला जाएगा। असल में सरकार का मानना है कि अगर अधिकारियो के काम काज की समीक्षा नही होगी तो वो निरंकुशता के साथ काम करेंगे जिससे देश करप्शन बढ़ेगा और सरकारी खजाने पर भी बिना मतलब का लोड पड़ेगा।

यहां आप ये जान लीजिए कि केंद्र सरकार खुद किसी को रिटायरमेंट के लिए कहेगी बल्कि जिस स्टेट में उन “बोझिल” अधिकारियों की तैनाती होगी,उस राज्य के सहयोग से रिटायरमेंट को बोला जाएगा । जो भी बोझिल अधिकारी रिटायरमेंट की बात पर सहमत हो जाता है तो फिर उसे केंद्र सरकार की तरफ से तीन महीने का नोटिस दिया जाएगा और तीन महीने की सैलरी और भत्ते भी उन अधिकारियों को देने होंगे।यहां आप ये भी जान लीजिये की फिलहाल भारतीय प्रशासनिक सेवा में 5 हजार 104 अधिकारी काम करते हैं। 


 कुल मिलाकर कहे तो सरकार के इस कदम से करप्शन में कमी तो आएगी ही साथ ही विकास की गति भी तेज़ से होगा क्योंकि सरकारी योजनाओं को आगे बढाने का जिम्मा काफी हद तक इन्ही अधिकारियों के पास होता है और अगर इनके काम काज की समीक्षा यूं समय समय पर होती रहेगी तो देश में तो काम बढ़िया होंगे ही साथ ही सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार पर भी कुछ हद तक लगाम लग लगेगी।