मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, इन शरणार्थियों को देगी फिक्स्ड डिपॉजिट और जमीन

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एक तरफ जहाँ देश में कुछ लोग CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीँ दूसरी तरफ मोदी सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है. मोदी सरकार ने त्रिपुरा के ब्रू शरणार्थियों की समस्याओं का समाधान निकाल लिया है और उनके पुनर्वास के लिए कई ऐतिहासिक घोषणाएं की है. गृह मंत्री अमित शाह और त्रिपुरा के बरू शरणार्थियों के प्रतिनिधि ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किये और अपने जीवन की शुरुआत की. इस समझौते के तहत करीब 30 हज़ार ब्रू शरणार्थियों को त्रिपुरा में बसाया जाएगा. इनके पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार ने 600 करोड़ के पुनर्वास पैकेज का भी ऐलान किया.

ब्रू शरणार्थी

कौन हैं ब्रू शरणार्थी ?

ब्रू शरणार्थी कहीं बाहर से नहीं आये बल्कि इसी देश के शरणार्थी हैं. इन्हें ब्रू जनजाति भी कहते हैं. ये जनजाति पहले मिजोरम में रहती थी. लेकिन 1995 में मिजोरम में उग्रवाद फैला. मिजोरम में मिजो जनजाति की बहुलता थी इसलिए वहां से उन्हें बाहर खदेड़ा जाने लगा जिन्हें वो बाहरी समझते थे. साल 1995 में यंग मिजो एसोसिएशन और मिजो स्टूडेंट एसोसिएशन ने ब्रू जनजाति को बाहरी घोषित कर दिया. 1997 में ब्रू जनजाति के लोगों के साथ जमकर हिंसा हुई. उनके गाँव के गाँव जला दिए गए. उसके बाद ये लोग मिजोरम से भाग कर त्रिपुरा आ गए और वहां रिलीफ कैम्पों में रहने लगे. इस समुदाय के करीब 33,000 लोग पिछले 23 सालों से उत्‍तरी त्रिपुरा के शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं.

सर्कार ने कई बार कोशिश की कि वो सभी मिजोरम वापस लौट जाएँ, उनका ख्याल रखा जाएगा. कुछ परिवार वापस लौटे भी लेकिन अधिकतर ने हिंसा के डर से वापस लौटने से इनकार कर दिया. अब मोदी सरकार ने इनकी समस्या का समाधान कर दिया है और त्रिपुरा में ही उन्हें बसाने का ऐलान किया है. ब्रू शरणार्थियों के पास मूलभूत सुविधाएँ नहीं थी लेकिन अब सरकार ने उनके जीवन यापन की व्यवस्था कर दी है.

सरकार का ऐलान

सरकार ने ऐलान किया है कि ब्रू जनजाति को 5000 रुपये प्रतिमाह की नगद सहायता दी जायेगी और 2 साल तक मुफ्त राशन दिया जाएगा. बरू शरणार्थियों को 4 लाख रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट के साथ घर बनाने के लिए 30 से 40 फुट का प्लाट भी मिलेगा. उन्हें वोटर लिस्ट में भी शामिल किया जाएगा.