LIC पर मोदी सरकार ने जो फैसला लिया है, जानिये उसका आप पर क्या होगा असर ?

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भारतीय जीवन बीमा निगम के नाम को शायद ही कोई ऐसा हो जो इसका नाम नहीं जनता हो या इसका निवेशक न हो. भारतीय जीवन बीमा निगम अपने ही स्लोगन में कहता हैं जिंदगी के साथ भी , जिंदगी के बाद भी.  इसका मतलब LIC केवल एक ऐसी संस्था हैं जो अपने निवेशकों को जीवन के साथ साथ उनके मरण के बाद भी उनके परिवार जनों को घ्यान रखती हैं. LIC भारत की सरकारी निवेश संस्था हैं.लेकिन इस बार LIC बजट पेश होने के बाद से चर्चा में आ गयी हैं.

दरअसल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को इस साल का पहला बजट पेश किया. जिसके बाद उन्होंने अपने भाषण में कहा कि सरकार LIC में अपनी हिस्सेदारी कम कर दी. जिसके बाद से लोगो में LIC को लेकर चिंता बनी हुई हैं, क्यूंकि LIC भारत की केवल एक ऐसी संस्था हैं. जिसके निवेशक हर गाँव, गली , कस्बे और शहर में मिल जाएंगे और उनके एजेंट भी. पिछले दो साल से मोदी सरकार आर्थिक स्थिति को सुधारने की कोशिश कर रही हैं. लेकिन पिछले साल  आर्थिक स्थिति कुछ ज्यादा ही ख़राब हो गयी जिसकी वजह से बाजार पर इसका असर देखने को मिला.

गौरतलब हैं सरकार की LIC में 100 प्रतिशत की हिस्सेदारी हैं. जिसकी वजह से अब सरकार आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए अपनी हिस्सेदारी को कम करने जा रही हैं जिसकी वजह से इसके निवेशकों को में भी चिंता हैं की इसका असर उनके निवेश कर पड़ेगा या नहीं . लेकिन जानकरों से मिली जानकारी के मुताबिक इसका असर निवेशकों के निवेश पर नहीं पड़ेगा.  मोदी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21  के विनिवेश को बढ़ाकर 2.1 लाख रुपए कर दिया हैं. जो 2019 -20 में 1.05 लाख जुटाने का लक्ष्य साधा था. जो साल 2019 में केवल 12,359 ही जुटा पाए. तो वित्त मंत्री के बजट भाषण के बाद LIC के कर्मचारियों ने 4 फ़रवरी को हड़ताल करने का ऐलान किया हैं. कर्मचारियों का कहा है कि LIC के आंशिक विनिवेश के प्रस्ताव राष्ट्रहित में नहीं हैं.