भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की जांच करना चाहती थी ये अमेरिकी संस्था, मोदी सरकार ने नहीं दिया वीजा, कहा- हमारे आंतरिक…

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एक अमेरिकी संस्था है USCIRF (अमेरिकी अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग). ये संस्था भारत में आकर ये जांच करना चाहती थी कि यहाँ धामिक स्वतंत्रता की क्या स्थिति है. भारत सरकार ने इस संगठन के सदस्स्यों को वीजा देने से इनकार कर दिया. भारत सरकार ने कहा है कि भारत के आंतरिक मामलों में और भारतीय नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के मूल्यांकन करने का अधिकार किसी विदेशी एजेंसी को नहीं है. आपको बता दें कि ये वही संस्था है जिसने संसद में CAA बिल पास होने के बाद भारत के गृह मंत्री अमित शाह पर प्रतिबन्ध लगाने की मांग की थी. जिस देश की ये संस्था है वो देश खुद नस्लीय भेदभाव क गंभीर आरोपों से जूझ रहा है और वो भारत में आ कर वहां के नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का मूल्यांकन करना चाहती है. ये बेहद हास्यास्पद बात है. जिस तरह से इस संस्था ने CAA के खिलाफ बयानबाजी की, जिस तरह से ये संस्था पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों पर चुप्पी साध लेती है उससे ये पता चलता है कि ये संस्था सिर्फ एक प्रोपगैंडाबाज संस्था है.

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भाजपा सांसद निशिकांत दूबे को लिखे एक पत्र में ये जानकारी दी कि USCIRF को वीजा देने से इनकार कर दिया गया है. निशिकांत दूबे ने पिछले साल लोकसभा में नागरिक संशोधन बिल (CAA) पास होने के बाद USCIRF द्वारा गृह मंत्री अमित शाह पर पाबंदी लगाने की माँग के मुद्दे उठाया था. इसके अलावा अभी हाल ही में अमेरिका के विदेश विभाग ने अपनी धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट जारी की थी. जिसमे दक्षिण एशियाई देशों में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर चिंता जताई गई थी.

निशिकांत दूबे को लिखे पत्र में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि USCIRF भारत में धार्मिक आजादी की स्थिति के संबंध में पूर्वग्रहयुक्त, गलत और भ्रामक टिप्पणियाँ करने के लिए जाना जाता है. इसलिए इस तरह की संस्थाओं की बातों को हम कोई तवज्जो नहीं देते. हम अपने देश के नागरिकों को मिले मौलिक अधिकारों के मामले में किसी भी विदशी एजेंसी के हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेंगे.