चीन छोड़ने जा रही हैं कंपनियों के लिए मोदी सरकार ने खोली अपनी बाहें, सरकार ने उठाया ये बड़ा कदम !

कोरोना वायरस ने इस समय पूरी दुनिया में हाहाकार मचा दिया है. अमेरिका लगातार इस वायरस के लिए चीन को जिम्मेदार ठहरा रहा है और कह रहा है कि चीन ने वायरस को लेकर जानकारी छिपाई, अगर समय से इस वायरस के बारे में दुनिया को आगाह कर दिया होता तो आज ये स्थिति नही होती. कोरोना की जन्मस्थली चीन के इस कारनामे के बाद पूरी दुनिया में उसकी छवि खराब हो चुकी है और बहुत सारी कंपनियां चीन छोड़ने जा रही हैं.

जानकारी के लिए बता दें चीन को अब झटका देने के लिए भारत ने बड़ा प्लान तैयार कर लिया है. चीन छोड़ने जा रही कंपनियों को भारत ने अपनी बाहें खोल दी हैं. भारत इन कंपनियों को आसानी से जमीन मुहैया कराने के लिए तैयार है. अगर ये सब कंपनियां भारत आ जाती हैं तो चीन को ये बहुत बड़ा झटका हो सकता है. बताया जा रहा है कि करीब 1000 कंपनियां चीन छोड़ने जा रही हैं. भारत सरकार इन कंपनियों को अपने यहाँ लाने के लिए लैंडपूल तैयार किया है जो आकार में यूरोपीय देश लक्जमबर्ग से दोगुना और देश की राजधानी से तीन गुना बड़ा होगा.

पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर इस मामले से जुड़े एक अधिकारी ने बताया है कि देशभर में 4 लाख 61 हजार 589 हेक्टेयर जमीन की सरकार ने पहचान कर ली है. जिसमें से 1 लाख 15 हजार 131 हेक्टेयर जमीन महाराष्ट्र, गुजरात, आँध्रप्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में औद्योगिक भूमि है. भारत सरकार इन कंपनियों को लाने के लिए अपनी हर संभव मदद करने को तैयार है.

गौरतलब है कि भारत में निवेश करने वाली कंपनियों को पहले से ही जमीन एक बड़ी बाधा रही है. अब मोदी सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर इस समस्या को बदलने में लग गयी है. इस समय स्थिति ये है कि भारत में फैक्ट्री लगाने को इच्छुक कंपनियों को खुद ही जमीन अधिग्रहण करना पड़ रहा है. इसी बीच बार्कलेज बैंक पीएलसी के वरिष्ठ अर्थशास्त्री राहुल बाजोरिया ने कहा है कि ”पारदर्शी और तीव्र भूमि अधिग्रहण एफडीआई बढ़ाने वाले कारकों में से एक है। यह कारोबार सुगमता का एक आयाम है और इसलिए आसानी से भूमि उपलब्ध कराने के लिए अधिक व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।” वहीँ भारत सरकार ऊर्जा, जमीन, पानी और रोड कनेक्टिविटी के माध्यम से निवेशकों को आकर्षित करके अपनी अर्तव्यवस्था में जान डाल सकती है.