मोदी और अमित शाह कि इस चाल से विपक्ष हुआ चारो खाने चित्त

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नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी चुनाव प्रबंधन की उस्ताद मानी जाती है . इस जोड़ी से पार पाना कितना मुश्किल है ये सबको पता है . अब ये जोड़ी संसद के अन्दर भी प्रबंधन की नै मिशल पेश कतर रहा है .इस जोड़ी की रणनीति देख विपक्ष भी हक्का बक्का है .क्योंकि कोई भी पार्टी कुछ भी करने की स्थिति में नहीं है .

हम बात कर रहे हैं राज्यसभा की जहाँ भाजपा और एनडीए अभी बहुमत से दूर है . मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में सर्जार के कई महत्वकांक्षी बिल राज्यसभा में जा कर अटक गए थे .लोकसभा में तो पार्टी के पास अकेले बहुमत है इसलिये कोई दिक्कत नहीं थी बिल पास करवाने में लेकिन राज्यसभा में बहुमत न होने के कारण किसी भी बिल को पास करवाने के लिए विपक्ष का मुंह देखना पड़ता था .

2022 से पहले भाजपा का राज्यसभा में बहुमत में आना मुश्किल था इसलिए अब इस मुश्किल से निपटने के लिए मोदी शाह ने नयी रणनीति बनाई है जिसके तहत दूसरी पार्टियों के राज्यसभा सांसदों को भाजपा में शामिल कराया जाए और फिर उन्हें दोबारा से राज्यसभा भेजा जा सके . पहले तो इनलै के एकमात्र संसद को भाजपा में श्मिओल कराया गया उसके बाद तेलुगु देशम पार्टी के 6 में से 4 सांसदों को भाजपा में शामिल कराया गया . समाजवादी पार्टी के संसद नीरज शेखर को भी भाजपा में शामिल होने के लिए मनाया गया .नीरज शेखर अपनी राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफ़ा दे कर भाजपा में शामिल हुए . अब उन्हें भाजपा के टिकट पर राज्यसभा भेजा जाएगा . कर्नाटक में जनता दल सेक्युलर कोटे के एक राज्यसभा सांसद पर भी भाजपा की नज़र है .

मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल मे सरकार राज्यसभा में बहुमत की कमी के कारण ही तीन तलाक और नागरिकता संसोधन क़ानून पास नहीं करा पाई थी लेकिन अब उम्मीद है कि 2020 तक भाजपा उपरी सदन में भी पूर्ण बहुमत में आ जायेगी