भारत आने की तैयारी कर रही है ये मोबाइल कंपनी, चीन को हो सकता है इतने करोड़ का नुकसान

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कोरोना के जन्मदाता चीन ने कोरोना वायरस को पुरे विश्व में फैलाकर त’बाही मचा रखी है. सभी देश चीन से पूरी तरह नाराज हैं. इसका खामि’याजा चीन को भुगतना पड़ सकता हैं. उसका कारण हैं की वहां पर काम करने वाली कम्पनी अब अपना बिज़नस को वहाँ से हटा कर भारत लाने की तैयारी में लगी हैं उसका कारन ये भी है की यहाँ पर लेबर कॉस्ट कम हैं.

चीन के पास मोबाइल फ़ोन को लेकर पूरी तरह से दुनिया में दबदबा बना रखा हैं. जिसके लिए भारत सरकार ने  मोबाइल फोन उत्पादन में भारत को दुनिया का शीर्ष देश बनाने के लक्ष्य के साथ 50 हजार करोड़ रुपये की लागत से तीन नई योजनाएं शुरू करने की घोषणा की है.

केन्द्रीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यह ऐलान करते हुए मंगलवार को कहा कि ‘मेक इन इंडिया किसी दूसरे देश को पीछे छोड़ने के लिए नहीं बल्कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए है. मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के साथ ही इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों एवं उसके कलपुर्जों के उत्पादन को गति देने के उद्देश्य से ये योजनाएं शुरू की गईं हैं.’

 रविशंकर प्रसाद ने कहा कि  ‘देश में जो बेरोजगारी की समस्या है वो भी इस परियोजना के आने के बाद एक हद्द तक कुछ कम हो जाएगी. उन्होंने आगे कहा कि इन तीनों योजनाओं से अगले पांच साल में करीब 10 लाख लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है. इसके साथ ही आठ लाख करोड़ रुपये के मैन्युफैक्चरिंगऔर 5.8 लाख करोड़ रुपये के निर्यात का लक्ष्य रखा गया है. उन्होंने कहा कि 40995 करोड़ रुपये की प्रोडक्ट लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) योजना का लक्ष्य मोबाइल फोन और इलेक्ट्रानिक कलपुर्जों के उत्पादन को बढ़ाना है.’

इस परियोजना के द्वारा मंत्रालय भारत में वैश्विक मोबाइल हैंडसेट निर्माताओं को भी आकर्षित करना चाहता है और मोबाइल हैंडसेट के लिए ग्लोबल मैन्युफक्चरिंग हब बनना चाहता है. रविशंकर ने कहा कि ‘दुनिया में मोबाइल मार्केट के 80 फीसदी हिस्से पर सिर्फ 5-6 कंपनियों का कब्जा है और इसलिए भारत चाहता है कि इन 5 टॉप ग्लोबल प्लेयर्स जो मोबाइल कंपनी हैं उनको वो अपने देश यानि की भारत में लेकर आयें. उसके लिए देश में तैयारी चल रही हैं और हम लोग देश में मोबाइल कंपनी को लेकर आयेंगे और अपने देश को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की पूरी कोशिश करेंगे.