मध्यप्रदेश में चल रही सियासी उठा-पठक के बीच कमलनाथ सरकार की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं. सिंधिया के साथ 22 विधायकों ने और इस्तीफा देकर पार्टी को बड़ा झटका दे दिया था, जिसके बाद से ही कमलनाथ सरकार पर संकट के बादल छा गये हैं और सरकार गिरने की स्थिति में पहुंच गयी है.

जानकारी के लिए बता दें मध्यप्रदेश के राज्यपाल ने कमलनाथ सरकार को चिट्ठी लिखते हुए आदेश भी जारी किया था कि वह फ्लोर टेस्ट करें और बहुमत साबित करें वहीं कमलनाथ फ्लोर टेस्ट से बचने के लिए हर दिन नया दाव चल रहे हैं और सरकार बचाने में लगे हुए हैं. वहीं शिवराज सिंह चौहान ने 106 विधायकों के साथ राज्यपाल के सामने परेड करवा दी और अपनी लिस्ट सौंपकर सरकार बनाने का दावा कर दिया.

सीएम कमलनाथ और दिग्विजय सिंह लगातार भाजपा पर आरोप लगा रहे हैं कि बीजेपी ने उनके विधायकों को बंधक बना रखा है और हमारे पास आने नहीं दिया जा रहा है. इसी बीच कांग्रेस के बागी विधायकों ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर कमलनाथ पर बड़े आरोप लगाए हैं. विधायक गोविन्द सिंह राजपूत ने कहा कि कमलनाथ जी ने हमारी 15 मिनट भी नहीं सुनी हम अपने क्षेत्र के विकास के लिए किससे बात करें.

गौरतलब है कि उन्होंने आगे आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार बनने के बाद सिंधिया जी को सीएम नही बनाया गया हम चुप रहे, हम अपने विधानसभा के क्षेत्र के लोगों का बंदूक का लाइसेंस तक नहीं बनवा पाए. उन्होंने बड़ी बात कहते हुए कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा हमारे क्षेत्र में एक पैसे का काम नही हुआ. छिंदवाडा के लिए करोड़ों रूपये का बजट स्वीकृत किया गया, अकेले छिंदवाडा की दम पर चुनाव नहीं जीता गया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के बाक़ी विधायक भी दुखी हैं उन्हें खुला छोड़ दीजिये वो भी भागकर बेंगलुरु आ जायेंगे.