मिशनरी स्कूल का काला कारनामा: स्कूली छात्र की हत्या के मामले को दबाया

513

कभी कभी कुछ ऐसी घटनाएँ सामने आ जाती हैं जिसके बाद कुछ कहने लिए शब्द ही नही बचते, 5, 50,100 रुपयों के लिए जान ले ली जाती है.. इस बार एक 12 साल के स्कूली बच्चे की जान ले ली गई और वजह बना एक 5 रूपये के बिस्कुट का पैकेट.. देहरादून के एक मिशनरी स्कूल में एक 12 साल के बच्चे को उसी के स्कूल के 12वीं कक्षा के दो छात्रों ने बेरहमी से पीट पीट कर मार डाला.

यह ऐसी घटना है जिसे जिसने भी सुना सन्न रह गया.. पूरा मामला है देहरादून के मिशनरी स्कूल चिल्ड्रेन्स होम एकेडमी का जहाँ 12th क्लास के दो लड़कों ने एक 12 साल के बच्चे पर चोरी का आरोप लगाते हुए बैट और स्टंप्स से बेरहमी से पीटा, उसे ठन्डे पानी से नहलाया, उसे गंदा पानी पिलाया और फिर घायलावस्था में उसे क्लासरूम में ही छोड़ कर भाग गए.. आनन फानन में बच्चे को अस्पताल ले जाया गया मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी.. 12 साल का बच्चा जान दे चुका था.. इस मामले को सुन जितनी हैरानी उन 12th क्लास के लड़कों पर हुई उससे अधिक स्कूल प्रशासन का रवैया देख हुई, घटना के बाद स्कूल के गैर जिम्मेदाराना व्यवहार की अब हर तरफ थू थू हो रही है, इसके बाद देखिये स्कूल प्रशासन ने क्या किया

पहले तो घायल बच्चे को हॉस्पिटल पहुंचाने में देर की गई, उसके बाद इसे फ़ूड पोइसनिंग बोलकर घरवालो को बताया कि बच्चे की तबियत ख़राब है जबकि उसकी मौत हो चुकी थी.. डॉक्टर तक से फ़ूड पोइसोनिंग की झूठी रिपोर्ट बनवा ली गई

बिना किसी को जानकारी दिए बच्चे की लाश को दफना दिया गया, ये स्कूल है ऋषिकेश तहसील के रानीपोखरी स्थित होम अकादमी स्कूल मृत छात्र का नाम वासु यादव था। स्कूल प्रशासन और जौलीग्रांट के डॉक्टर्स तक ने इसे फ़ूड पॉइज़निंग का मामला बताया, पहले तो रानीपोखरी थाना ने भी इसे फ़ूड पॉइज़निंग का ही मामला माना लेकिन वो पूरी तरह से यकीन नही कर पा रहे थे।

मृत छात्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश स्थित हापुड़ का रहने वाला था। उसके पिता कुष्ठ रोगी हैं। पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने एकेडमी में पढ़ने वाले दो छात्रों और एकेडमी के वॉर्डन, पीटी टीचर और एक अन्य व्यक्ति को इस हत्या का दोषी पाते हुए गिरफ़्तार किया है। लेकिन अभी तक स्कूल के डायरेक्टर स्टेफेन सरकार पर कोई कार्यवाही नही हुई है जिससे स्थानीय पुलिस पर भी सवाल खड़े हो गए हैं, मगर हैरानी और भी ज्यादा तब हुई जब नेशनल मीडिया ने भी इस मामले में कोई दिलचस्पी नही दिखाई, एक दो स्थानीय अखबारों को छोड़ दे तो कहीं भी यह खबर नही थी

Amar Ujala’s report over the story

मामले पर कार्यवाही हुई उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन उषा नेगी के हस्तक्षेप के बाद.. इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए उषा नेगी ने कहा,

“स्कूल प्रशासन ने मामले को छिपाने की हर संभव कोशिश की। घटना 10 मार्च को हुई और 11 मार्च को हमें इसका पता चला। फिर भी, जब हमें पता चला और हम स्कूल पहुँचे तब पता चला कि विद्यालय प्रबंधन ने बिना पोस्टमॉर्टम कराए छात्र के शव को कैंपस में ही दफ़ना दिया है। छात्र के परिजनों को भी इस बात की जानकारी नहीं दी गई कि उनके बच्चे की मौत हो चुकी है।”

कोई सोच भी नही सकता था कि मामूली से बिस्कुट के पैकेट पर विवाद इतना बढेगा कि उसमें किसी की जान ही चली जाएगी लेकिन उसके बाद स्कूल प्रशासन का यह गैर जिम्मेदाराना व्यवहार और अधिक गुस्सा दिलाता है.. स्कूल के नाम पर चल रहे गोरख धंधे के बारे में जानकारी होना बहुत जरूरी है.. बच्चे के एडमिशन करने से पहले जानकारी करें ऐसे मिशनरी स्कूल के पूरे इतिहास के बारे में ताकि अगली बार कोई माँ बाप अपने बच्चे को स्कूल के नाम पर भेड़ियों के बीच ना छोड़ आये