वज्र और सुदर्शन ने साथ मिलकर किया था पाकिस्तान पर हवाई हमला

351

इंडियन एयर फ़ोर्स ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर एयर स्ट्राइक को नजाम दिया है. ऐसा बताया जा रहा है कि इस एयर स्ट्राइक में आतंकियों के कई कैंप तबाह कर दिए गए हैं. और अभी तक मिले आंकड़े बता रहे हैं कि एयर स्ट्राइक में करीब 325 आतंकियों को जन्नत अता हुई है.

इस एयर स्ट्राइक को दुनिया की सबसे बड़ी एयर स्ट्राइक माना जा रहा है. इस एयर स्ट्राइक में शामिल था मिराज 2000 फाइटर प्लेन, और इस फाइटर प्लेन से लेजर गाइडेड बम का इस्‍तेमाल कर इंडियन एयरफोर्स ने पाकिस्तान में कई आतंकी कैंप राख किये.

पुलवमा में CRPF के काफिले पर हुए फिदायीन हमले को बस 13 दिन ही बीते थे कि इंडियन एयरफोर्स ने जवानों की शहादत का बदला ले लिया. ये बदला ज़रूरी भी था, क्योंकि देश गुस्से से भरा हुआ था, और नापाक पाक को सबक सिखाना ज़रूरी था.

इंडियन एयरफोर्स ने जैश ए मुहम्‍मद के कई ठिकानों को जबरदस्‍त गोलाबारी कर धूल में मिला दिया है. सर्जिकल स्ट्राइक को ना मानने वाले पाकिस्तान ने माना है कि एयर स्ट्राइक हुई है. और इस एयर स्ट्राइक को लेकर पाकिस्तान ने भारत की निंदा भी की है.

इंडियन एयरफ़ोर्स ने मिराज 2000 से जो लेजर गाइडेड बम बरसाए, उन बमों का नाम ‘सुदर्शन’ है. हाई-एल्‍टीट्यूड से निशाने पर बम गिराने में माहिर मिराज- 2000 को भी भारत की वायुसेना ने अपनी तरफ से ‘वज्र’ नाम दिया हुआ है.

इस तरह से कहा जा सकता है कि ‘वज्र’ ने पाकिस्‍तान के एयरस्‍पेस में घुसकर आतंकियों पर ‘सुदर्शन’ से हमला किया.

सुदर्शन भारत का पहला स्वदेशी लेजर गाइडेड बम है. जो कि सिर्फ और सिर्फ इंडियन आर्मी के लिए बनाया गया था. साल 2006 में इसको बनाने की शुरुआत हुई. शुरुआत की गयी एक अत्त्याधुनिक लेजर गाइडेड किट बनाने की जो 450 किलो के बम से भी सटीक निशाना लगा सके.

2010 में सुदर्शन पूरी तरह बनकर तैयार हो गया. ये बेहद घातक बम आईआरडीई ने डीआरडीओ की लैब में बनाया. और इसे बनाने में BEL ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके बाद बारी आई इसकी टेस्टिंग की. 2010 में ही 21 जनवरी को चांदीपुर ओडिशा में इसकी टेस्टिंग की गयी.

सबकुछ ठीक था लेकिन फिर भी इसका दूसरा परीक्षण हुआ पोखरण की टेस्टिंग रेंज में. सबकुछ सही होने के बाद भी इसमें गुंजाइश थी सटीकता को और बढ़ाने की. इसपर फिर से काम किया गया और उसके बाद इसे इंडियन एयरफोर्स की मिग- 27 यूनिट में जगह दी गयी.

मिग- 27 में सफल रहने के बाद इसे जैगुआर, मिग- 29, सुखोई और मिराज- 2000 में भी इसको जगह दी गयी. सुदर्शन की रेंज लगभग 9 किलोमीटर है. ये इतना सफल और सटीक रहा है कि आज इंडियन नेवी में भी अपनी जगह बना चुका है.

सुदर्शन के बाद अब EDE यानी एयरोनॉटिकल डेवलेपमेंट इस्‍टेबलिशमेंट, नेक्‍सट जनरेशन लेजर गाइडेड बम बनाने की कोशिशों में जुटा हुआ है. इसके अलावा सुदर्शन की रेंज बढ़ाकर उसे 50 किलोमीटर तक बनाने पर भी ज़ोरों से काम किया जा रहा है.

निशाना लगाने के लिहाज़ से लेज़र गाइडेड बम बहुत कारगर माने जाते हैं, क्योंकि इनकी मदद से सटीक और अचूक निशाना लगाया जा सकता है. अमेरिका ने सबसे पहले वियतनाम युद्ध में इसका इस्तेमाल किया.  इसके बाद और भी कई देश जैसे रूस, फ्रांस और ब्रिटेन ने भी लेज़र गाइडेड बम बनाए और उनका इस्तेमाल किया. ये बम एक इनविजिबल लाइट की मदद से सटीक निशाना लगाते हैं. इसी इनविजिबल लाइट से इसका टारगेट सेट किया जाता है.

कुल मिलाकर भारत की पहली एयर स्ट्राइक पूरी तरह सफल रही. और सफल रहती भी कैसे नहीं जब भारत पाकिस्तान के खिलाफ वज्र और सुदर्शन लेकर उतरा था.

देखें वीडियो: