भारत ने ट्रम्प को हड़काया तो बीच में क्यों कूद गया चीन!

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भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे कश्मीर विवाद पर उस वक्त हडकंप मच गया था जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अमेरिका के प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाक़ात की थी. इस मुलाक़ात में इमरान ने ट्रम्प के सामने मांग रखी थी कि अमेरिका इस मामले में मध्यस्थता करें. ट्रम्प ने इस पर हामी भरते हुए यह कह दिया था कि पीएम मोदी ने भी उनसे मध्यस्थता करने के लिए कहा था लेकिन अब चीन भी इस मसले में कूद पड़ा है.

आगे पढ़िए चीन ने आखिर कश्मीर मुद्दे पर क्या बोला है?

दरअसल भारत के इस मसले पर रुख को जानते हुए भी चीन ने अमेरिका के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा था कि यदि भारत चाहेगा तो वे इसमें मध्‍यस्‍थ की जिम्‍मेदारी निभाने को तैयार हैं. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने भारत-पाकिस्तान संबंधों को सुधारने में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए अमेरिका सहित अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए अपने देश का समर्थन व्यक्त किया, वो भी ये जानते हुए कि भारत, भारत पाकिस्तान के बीच चल रहे इस विवाद में किसी देश से मध्यस्थता कराने को तैयार नही है.

मध्यस्थता करने के लिए तैयार अमेरिका पहला देश नही है!

वैसे अमेरिका इस मामले में मध्यस्थता की पेशकश करने वाला पहला देश नहीं है। इससे पहले दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला और नार्वे के प्रधानमंत्री एर्ना सोलबर्ग ने भी इस मसले पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की पेशकश की थी. हालाँकि भारत पहले से कहता आया है कि जब तक पाकिस्तान अपने यहाँ से आतंकियों का खात्मा नही करता या फिर आतंकियों पर कार्रवाई नही करता तब तक बातचीत नही होगी.

चीन की सरकारी  मीडिया में आई खबर में यहां तक कहा गया है कि भारत को अंतरराष्‍ट्रीय विचार का सम्‍मान करना चाहिए। हालांकि वह ये भी मानता है कि इस पर अंतिम निर्णय भारत को ही लेना होगा। इसकी वजह है कि भारत दक्षिण एशिया का अहम देश है, यदि भारत और पाकिस्तान इस मादले को शान्तिपूर्वक हल कर लेते हैं तो भारत की छवि काफी बड़ी होगी. इतना ही नही चीन ने अपनी पीठ थपथपाते हुए यह भी कहा कि चीन ने दोनों देशों को एक मंच दिया है जहाँ से वे अपनी अपनी बात कह सकते है.

चीन देख रहा है अपना फायदा!

चीन के मुताबिक़ भारत और पाकिस्तान के बीच ये विवाद 70 साल से भी पुराना है जिससे दोनों देशों के बीच कई बार युद्ध स्थिति पैदा हो चुकी है. अगर दोनों देश की लड़ाई परमाणु युद्ध तक पहुँच जाती है तो भारी नुकसान होगा. वैसे भी चीन यहाँ भी अपना फायदा देख रहा है जबकि भारत पहले ही साफ़ कर चुका है कि जब तक आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई नही, तब तक बातचीत नही! इतना ही नही भारत का यह रुख भी स्पष्ट है कि कश्मीर विवाद में किसी तीसरे देश द्वारा मध्यस्थता करने की जरूरत भी नही है. दोनों देश आपसी बातचीत से ही इस विवाद को ख़त्म करेंगे.