1400 करोड़ का स्मारक घोटाला कैसे कर गईं मायावती ?

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जब मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री थी, तब उन्होंने प्रदेश में बहुत विकास कराया था.. बहुत.. जैसे कांशी राम स्मारक, बौद्धविहार शांति उपवन, आंबेडकर स्मारक, कांशी राम ईको गार्डन, रमाबाई अम्बेडकर स्थल, कांशीराम संस्कृति स्थल और प्रतीक स्थल समता मूलक चौराहा, लखनऊ

नॉएडा में ही बनाये गए दलित प्रेरणा स्थल और ग्रीन गार्डन का निर्माण 33 एकड जमीन पर हुआ.

इतना ही नहीं, मायावती सरकार के दौरान बनाये गए इन सभी प्रतिमाओं, स्मारक और पार्क्स के निर्माण में लगभग 2600 करोड़ का खर्चा हुआ था.

लेकिन जो आप नहीं जानते वो है कि इन 2600 करोड़ में मायावती सरकार ने 111 करोड़ से भी ज्यादा का घोटाला किया था, और फिर इस घोटाले को नाम दिया गया था “स्मारक घोटाला”

अब आपको यह भी बताते हैं कि 111 करोड़ का यह घोटाला किया कैसे गया था??

1. स्मारकों में लगे पत्थरों के ऊंचे दाम वसूले गए थे।

2.  मिर्जापुर में एक साथ 29 मशीनें लगायी गई और कागजों में दिखाया गया था कि पत्थरों को राजस्थान ले जाकर वहां कटिंग करायी गई, फिर तराशा गया। ढुलाई के नाम पर करोड़ों रुपये का वारा न्यारा हुआ।

 3. कंसोर्टियम बनाया गया जो कि खनन नियमों के खिलाफ था। 

 4. 840 रुपये प्रति घनफुट के हिसाब से ज्यादा वसूली की गई।

 5. मंत्रियों, अफसरों और इंजीनियरों ने अपने चहेतों को मनमाने ढंग से पत्थर सप्लाई का ठेका दिया और मोटा कमीशन लिया।

 6. जांच में यह बात भी सामने आयी थी कि मनमाने ढंग से अफसरों को दाम तय करने के लिए अधिकृत कर दिया गया था। 

 7. ऊंचे दाम तय करने के बाद पट्टे देना शुरू कर दिया गया था। मायावती सरकार के सलाहकार के भाई की फर्म को मनमाने ढंग से करोड़ों रुपये का काम दे दिया गया था। 

मायावती राज में हुए इन घोटालों के खिलाफ सबसे पहले समाजवादी पार्टी के  कार्यकाल में गोमती नगर में एफआईआर दर्ज करवाई गई थी। बाद में घोटाले की जांच विजिलेंस को सौंपी गई लेकिन समय बीतने के साथ साथ स्मारक घोटाले की जांच भी ठन्डे बस्ते में चली गई.. शायद उनको भविष्य में होने वाले गठबंधन का आभास हो गया होगा

इस मामले में ईडी ने भी केस दर्ज किया लेकिन विजिलेंस की जांच आगे न बढ़ने के कारण आरोपियों के खिलाफ कोई चार्जशीट न होने की वजह से तब एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट की जांच भी ठंडे बस्ते में चली गई थी।लेकिन अब एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट ने सभी घोटालेबाजों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है.

सालों बाद मायावती जो अपने अच्छे दिन आने की उम्मीद लगाना शुरू कर पाई थी, उनपर अब पानी फिरता नजर आ रहा है, ED यानि एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट ने अवैध खनन और रिवर फ्रंट घोटाले में अखिलेश यादव पर शिकंजा कसने के बाद अब ने मायावती को स्मारक घोटाले के लिए घेरे में लेना शुरू कर दिया है.

इस मामले से जुड़े इंजिनियरों, ठेकेदारों और तमाम लोगों के साथ मायावती के करीबी रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी और बाबू सिंह कुशवाहा भी अब ED के निशाने पर है. सभी के यहाँ छापेमारी और गिरफ्तारी चल रही है.

बुआ भतीजा के अच्छे दिनों का तो पता नहीं.. पर बुरे दिन जरूर एक साथ आ गए हैं.. अब तो यह गठबंधन लम्बा चलेगा खैर अभी तो इन्वेस्टीगेशन चल रहे हैं और चुनाव भी आने वाले हैं तो देखते हैं घोटालेबाज़ों की कड़ी में अब अगला नाम किसका जुड़ता है.