उमेश जाधव ने पुल’वामा शही’दों को कुछ इस अंदाज में दी श्रधांजलि

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पुल’वामा हम’ले को आज एक बरस हो गया है. आज का दिन देश के लिए काले दिन जैसा है. पुल’वामा हम’ले के एक साल बाद जब भी याद आती है तो जेहन में उस दिन की यादें सिहरन पैदा करती हैं. हर इंसान जो पुल’वामा अ’टैक में शहीद हुए थे, जवानों को अपने-अपने तरीके से याद कर रहे है.

जो पिछले बरस पुलवा’मा अ’टैक हुआ था उसको लेकर ‘कश्मीर के लेथपोरा स्थित सीआरपीएफ कैंप में शही’दों के लिए श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जा रही है’. इस सभा में ‘उमेश गोपीनाथ’ यादव विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए है. बेंगलुरु निवासी उमेश गोपीनाथ जाधव पेशे से म्यूजिशियन और फार्माकॉलजिस्ट हैं. पिछले एक साल से शही’दों को अनोखे तरीके से श्रद्धासुमन अर्पित करते आ रहे हैं. इस बार उन्होंने एक अनूठा तरीका निकला है शहीदों को श्रदासुमन अर्पित करने का. वह इस बार शहीदों के घर जाकर उनके गांव की मिट्टी इकट्ठा की और उसके बाद उस मिट्टी एककत्रीत कर उन श’हीदों को श्रधांजलि दी.

उमेश ने लेथपोरा स्थित सीआरपीएफ कैंप पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा, ‘मुझे गर्व है कि मैं पुल’वामा हम’ले में शही’द हुए जवानों के परिवारों से मिला और उनकी दुआएं लीं,और कहा कि मां-बाप ने अपने बेटे को खोया, पत्नियों ने अपने पतियों को, बच्चों ने अपने पिता को, दोस्तों ने अपने दोस्त को और मैंने उनके घर और श्म’शान घा’ट जाकर मिट्टी इकट्ठा की जो मेरे लिए गर्व की बात है.

उमेश जाधव ने पुल’वामा हमले में शही’दों के परिजनों से मिलने के लिए पूरे भारत में ‘61 हजार किमी की यात्रा की’ और  पिछले हफ्ते ही उनकी यह यात्रा ख’त्म हुई जिसे वह ‘तीर्थ यात्रा’ मानते हैं. जाधव अस्थि’क’लश दिखाते हुए कहते हैं, मैंने पूरे साल प्रत्येक जवान के घर के बाहर से मिट्टी इकट्ठा की और ये सब कुछ मैं इस अ’स्थि कल’श में लेकर आया हूँ.

दरअसल जब उमेश जाधव कश्मी’र जा रहे थे तब उन्होंने बताया कि यह यात्रा मेरे लिए बहुत गर्व की बात है उमेश ने आगे बताया, ‘जवानों के परिवारों को ढूंढना इतना आसान नहीं था.  जवानों के कुछ घर गाँव के काफी अंदर के इलाके में थे. लेकिन उसके बाद भी अगर आपके अंदर कुछ करने का जज्बा हो तो आप वो काम कर सकते हो. लेकिन इसके बाद कई और चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा’. उमेश की कार में देशभक्ति के स्लोगन लिखे हुए हैं और रात गुजारने के लिए वह इसी में सोते भी जाते हैं. वह होटल का खर्चा नहीं उठा सकते इस वजह से वो अपनी कार को ही घर बना लेते है और उसी में सो जाते हैं.

शही’दों के परिजनों से मिलने के अनुभव को साझा करते हुए बोले कि  ‘हम साथ खाते थे और रोते थे’, हम एक दुसरे के सुख दुःख के साथी थे. उन्होंने शही’दों को श्रधांजलि देने को लेकर वो बोले की ऐसे पड़ाव पर उन्होंने एक मुट्ठी मिट्टी इकट्ठा की और उसे एक कल’श में रखा जिसे अब वह श्रीनगर के सीआरपीएफ को उन श’हीदों की यादें संजोने के लिए देंगें. स्पेशल डीजी (जम्मू-कश्मीर जोन) जुल्फिकार हसन ने बताया कि श्रद्धांजलि सभा एक साधारण तरीके से होगी लेकिन जाधव के इस काम को देखते हुए उन्हें एक मेहमान के तौर पर इस सभा का मुख्या अथिथि बनया है.