क्षेत्र के विकास के बाद भी अपनी कुर्सी नहीं बचा पाए ये सांसद

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चुनाव का मौसम खत्म हो चुका है .. और परिणाम हमारे सामने है .भले सरकार के खिलाफ बहुत आवाज़ उठाई गई थी और गुटबंदी भी हुई थी… लेकिन फिर भी जीत NDA की हुई…. वो भी ऐतिहासिक जीत.
उत्तर प्रदेश में गठबंधन बहुत आशाओं के साथ हुआ था… लेकिन उसका फायदा नहीं मिल पाया उन्हें. आम भाषा में कहें तो बुरी तरह फ्लॉप हो गई यह महागठबंधन… बुआ बबुआ का जादू कुछ खासा असर नहीं करपया.उल्टा सपा को ही नुक्सान का सामना करना पड़ा…

लेकिन इसके बावजूद बीजेपी को इस महागठबंधन की वजह से एक जीती हुई सीट गवानी पड़ी…. सपा-बसपा के गठबंधन ने बड़ी कामयाबी हासिल की है….हम बात कर रहे है उत्तरप्रदेश के गाजीपुर सीट की….भले बीजेपी की प्रचंड जीत हुई है लेकिन उसके बावजूद केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा गाजीपुर लोकसभा सीट से हार गए हैं…. उन्हें बीएसपी प्रत्याशी अफजाल अंसारी ने हराया है…. अफजाल संयुक्त गठबंधन के प्रत्याशी हैं ये … आपको बता दें कि अफजाल अंसारी को 564144 वोट मिले……वहीँ मनोज सिन्हा को 446960 वोट मिले….

वैसे आपको बता दें कि गाजीपुर सीट पर अगर इसस बार मनोज सिन्हा जीतते तो इनकी यह चौथी जीत होती …लेकिन सपा बसपा गठबंधन के कारण उको जीत हासिल नहीं हुई… ऐसा लगता है कि गाजीपुर में महागठबंधन का जातिगत समीकरण का पित्र काम आया काम आ गया…. वैसे आपको बता दें कि गाजीपुर से इस बार जो 4 कैंडिडेट चुनावी मैदान में उतरे थे वो हैं कांग्रेस के अजीत प्रसाद कुशवाहा,बहुजन समाज पार्टी से अफज़ल अंसारी, सीपीआई से भानु प्रकाश पाण्डेय और बीजेपी से मनोज सिन्हा…

हालांकि 1996 में मनोज सिन्हा ने पहली बार गाजीपुर सीट से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे…. 1999 में उन्हें फिर जीत हासिल हुई थी.. उसके बाद 2014 में मोदी लहर के कारण मनोज सिन्हा तीसरी बार लोकसभा के लिए चुने गए….. और मोदी सरकार में रेल राज्य मंत्री का कार्य भार संभाला..और साथ साथ संचार मंत्रालय भी.. अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने गाजीपुर को कई ट्रेनों की सौगात दी…. उनकी छवी बतौर नेता काफी साफ़ और इमानदार है… और कहते हैं कि मनोज सिन्हा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद के दावेदार भी थे … लेकिन आखिरी समय में योगी आदित्य नाथ को मुख्यमंत्री बनाया गया…

आपको बता दें कि मनोज सिन्हा छात्र जीवन से राजनीति में सक्रिय रहे हैं….. इनका नाम सिर्फ उत्तरप्रदेश में ही नहीं बल्कि देश के तात्कालिक राजनीति में एक बहुत बड़ा नाम है…. आईआईटी बीएचयू के पूर्व छात्र और छात्र संघ के नेता रहे है…

बहरहाल देश की एक लीडिंग मैगजीन ने उन्हें वर्तमान के सबसे ईमानदार सांसद का ख़िताब दिया है…. मैगजीन के मुताबिक वर्तमान में मनोज सिन्हा उन इमानदार नेताओं में शुमार हैं जिहोने अपने सांसद निधि का शत-प्रतिशत इस्तेमाल लोगों के विकास के लिए लगाया है… और गाजीपुर में हुए विकास को सबने देखा है … तो फिर ऐसी क्या वजह थी जिससे उनकी हार हुई…

दरअसल मनोज सिन्हा भूमिहार ब्राह्मण जाती से तालुख्ख रखते है… और गाजीपुर का इलाका जो है ठाकुर बाहुल्य है… सपा बसपा गठबंधन की वजह से इस पर जातिगत प्रभाव पड़ा है… और सभी मुस्लिम वोट का समर्थन बसपा प्रत्याशी अफजल अंसारी को मिला है… गाजीपुर में एक इलाका है गहमर जो कि ठाकुर बाहुल्य है.. ऐसा देखने में लग रहा है कि वहां की भी अधिकांश ठाकुर वोट अफजल अंसारी को ही मिले हैं…

गाजीपुर को उत्तर प्रदेश का VIPसीट मना जाता है … मनोज सिन्हा नें बतौर संसद उसके विकास के लिए बहुत काम किया है जिसकी गवाही वहाँ की सड़के, स्कूल, बिजली सबकुछ देता है…
अब देखना यह है की महागठबंधन प्रत्याशी गाजीपुर के लिए कितने लाभदायक साबित होते है… लेकिन मनोज सिन्हा की हार कहीं न कहीं गाजीपुर के विकास की हार है…