NCP के नेता का विवादित बयान कहा राफेल डील के पहले शिकार हुए पर्रिकर

279

जहाँ हमारे देश को और भारतीय जनता पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है मनोहर पर्रिकर की डेथ के बाद पर इतने कठिन समय में भी सियासत का दौर थम नहीं रहा है..उनकी डेथ की खबर को अनाउंस कुछ ही बक्त गुजरा था कि कांग्रेस पार्टी ने गोवा में सरकार बनाने का दावा करना शुरू कर दिया था ..उन्होंने दो-दो बार राज्यपाल को लैटर लिख सरकार बनाने का दावा पेश किया था..अब नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के नेता जितेंद्र अवहद ने पर्रिकर जी पर विवादित बयान देते हुआ कहा कि उन्होंने कहा है कि पर्रिकर राफेल डील की बलि चढ़ने वाले पहले नेता हैं. उनके मुताबिक के मुताबिक पर्रिकर राफेल डील को लेकर काफी दुखी थे. ..उनके बोल यही नही रुके अवहद ने आगे कहा, ”मनोहर पर्रिकर काफी पढ़े-लिखे व्यक्ति थे. मुझे लगता है कि राफेल डील को लेकर वो खुश नहीं थे, इसलिए उन्होंने वापस गोवा जाने का फैसला कर लिया. वो दुखी थे. आज वो नहीं हैं इसलिए हमें ये बातें नहीं कहनी चाहिए, लेकिन मुझे लगता है कि वो राफेल डील के पहले शिकार हैं…

उन्होंने दावा किया कि पर्रिकर कई बार इस बात का जिक्र कर चुके थे..आपको यहाँ ये भी बता दे कि जब मनोहर पर्रिकर जी डिफेन्स मिनिस्टर थे उस समय ही राफेल डील हुए थी .. सुप्रीम कोर्ट और सीएजी से क्लीन मिलने के बावजूद कांग्रेस इस डील को लेकर बीजेपी पर बार बार घोटाले का आरोप लगा रही है..आपको ये भी याद होगा जब राहुल गाँधी मनोहर जी के बीमारी के दौरान उनके हालचाल ले ने गये थे…वापस आने के बाद उन्होंने एक press कांफ्रेंस की थी जिसमे उन्होंने कहा कि कल मैं पर्रिकर जी से मिला. उन्होंने खुद कहा था कि डील बदलते समय प्रधानमंत्री ने रक्षा मंत्री से नहीं पूछा था. राहुल ने कहा कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने बताया कि मोदी ने उनसे कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी डील का कॉन्ट्रेक्ट चाहिए तो अनिल अंबानी को कॉन्ट्रेक्ट देना ही पड़ेगा.

उसके बाद पर्रिकर जी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को लैटर लिखकर कहा था कि आप अपने राजनीतिक फायदे के लिए मुझसे मिलने आए थे … मेरे साथ बिताए 5 मिनटों में न तो आपने राफेल का जिक्र किया और ना ही उससे संबंधित किसी अन्य बारे में चर्चा हुई थी.

और अगर मीडिया रिपोर्ट्स की मने तो जब मनोहर पर्रिकर hospitalized थे तब से कांग्रेस पार्टी यहां जननेता मनोहर पर्रिकर की मौत पर सत्ता हड़पना चाहती थी। उसका कहना है कि, मनोहर पर्रिकर को मुख्यमंत्री बनाने की शर्त पर ही सहयोगी पार्टियों ने बीजेपी को समर्थन दिया था और जब वे ही नहीं रहे तो बीजेपी का सत्ता में बने रहने का कोई हक नहीं है…हमे समझ नहीं आता की ऐसे संवेदनशील समय में भी कुछ नेता राजनीती करने से बाज़ नहीं आते. ये कैसी सियासत है नेताओं की जो बस हर जगह अपना फ़ायदा देखती है .. कुर्सी के लिए राजनीति का स्तर दिन पर दिन गिरता जा रहा है. और यही वज़ह है कि अब राजनीति सोशल मीडिया पर लोगों के मनोरंजन का साधन बनती जा रही है. हमारी नज़र से अगर देखा जाए तो दिन पर दिन राजनीति का ये बदलता रूप सच में बहुत अजीब सा लगता है.